{"_id":"5d2693bd8ebc3e6ca56c2d25","slug":"doctors-save-life-of-girl-injured-in-road-accident-in-delhi","type":"story","status":"publish","title_hn":"सड़क हादसे में घायल युवती की डॉक्टरों ने बचाई जान, 7 सर्जरी के बाद काम करने लगा हाथ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सड़क हादसे में घायल युवती की डॉक्टरों ने बचाई जान, 7 सर्जरी के बाद काम करने लगा हाथ
Thu, 11 Jul 2019 07:11 AM IST
देव कश्यप
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 11 Jul 2019 07:11 AM IST
विज्ञापन
कृति किशोर
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मरीजों के लिए डॉक्टर भगवान से कम नहीं होते हैं। कई बार ऐसे चमत्कार हो जाते हैं, जो मरीज के जीवन को रोशन कर जाते हैं। ऐसा ही मामला मैक्स अस्पताल में सामने आया, जहां सड़क हादसे में घायल युवती की ना सिर्फ जान बचाई, बल्कि बुरी तरह कुचले उसके हाथ को भी 7 आपरेशन के बाद जीवित कर दिया।
विज्ञापन
बुधवार को पटपड़गंज स्थित मैक्स अस्पताल के डॉ. मनोज जौहर ने बताया कि करीब दो वर्ष गाजीपुर निवासी युवती कृति किशोर सड़क दुर्घटना घायल हो गई थी। हादसे में उसका दायां हाथ बुरी तरह कुचल चुका था। हड्डी, जोड़, टेंडन, नस, मांसपेशी, खून की नलियां और त्वचा सब चौपट हो चुकी थीं। 29 अगस्त 2017 को मैक्स अस्पताल में जब कृति को घायल अवस्था में लाया गया, उस वक्त खून के बहाव को रोकना और संक्रमण ना फैलने डॉक्टरों के लिए चुनौती था।
विज्ञापन
एक ऑपरेशन के बाद जब कृति का जीवन सुरक्षित हो गया तो उन्होंने विशेषज्ञों की टीम के साथ मिलकर दायें हाथ को जीवित करने का फैसला लिया। चूंकि, कृति की हादसे से पहले शादी तय हो चुकी थी। घटना के कारण विवाह टालना पड़ा। इसलिए सामाजिक स्तर पर भी कृति के सामने काफी चुनौतियां थीं। करीब सात बार ऑपरेशन के बाद उनके हाथ को वापस जीवित किया गया। 22 जनवरी 2018 को उन्होंने शादी कर ली।
विज्ञापन
पहली से लेकर आखिरी सर्जरी तक लगभग 8-8 घंटे का समय लगा। सबसे पहले उसके अंग को बचा लेने की तत्काल सर्जरी की गई। टीम में प्लास्टिक सर्जरी, एनेस्थेसिया, हड्डी विभाग और धमनी सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ थे। इसके बाद उसे आईसीयू में रखा गया। मरीज की रिकवरी में 2 वर्ष लगे। पति और परिवार की मदद से वह जल्द ही शारीरिक और मानसिक दोनों आघातों से बाहर निकल आई।