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Delhi: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री से डॉक्टरों के संगठन फोर्डा ने की दस मांग, कहा लंबे समय से नहीं हुई हैं पूरी

Wed, 25 Jan 2023 09:31 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Wed, 25 Jan 2023 09:31 PM IST
सार

मांगों में लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के अनुरूप भारतीय चिकित्सा सेवा का गठन करना, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम का अधिनियमन, जोखिम भत्ता और बांड-मुक्त चिकित्सा शिक्षा प्रदान करना शामिल है।

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Doctors organization FORDA made ten demands from Union Health Minister
मांगों की जानकारी देते संगठन के पदाधिकारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डॉक्टरों की लंबित मांगों पर फेडरेशन ऑफ रेजिडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (फोर्डा) ने निराशा जाहिर करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया के समक्ष दस मांगों का चार्टर रखा है। इनमें संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) के अनुरूप भारतीय चिकित्सा सेवा का गठन करना, राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम का अधिनियमन, जोखिम भत्ता और बांड-मुक्त चिकित्सा शिक्षा प्रदान करना शामिल है। इसके अलावा संविदा पदों के स्थान पर डॉक्टरों के लिए स्थायी पदों का सृजन करना, तदर्थ(एडहॉक) पदों पर कम से कम छह माह की अवधि का प्रावधान, रेजीडेंसी योजना में संशोधन, रेजिडेंट डॉक्टरों के लिए एक समान वजीफा का प्रावधान, समय पर नीट पीजी परीक्षा का आयोजन और एनईईटी का गठन करना शामिल है।

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डॉक्टर राम मनोहर लोहिया अस्पताल में हुई बैठक में फोर्डा के अध्यक्ष डॉ. अविरल माथुर ने कहा कि ये मांगें सालों से लंबित हैं, लेकिन इन्हें दूर करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि हम इन मुद्दों पर चर्चा करने के लिए आईएमए सहित डॉक्टरों की राज्य संगठनों को आमंत्रित करेंगे। फरवरी के पहले सप्ताह में बैठक होने की उम्मीद हैं। सभी संगठन साथ मिल कर सामूहिक रूप से सरकार के सामने मुद्दों को उठाएंगे। वहीं फोर्डा के महासचिव डॉ सर्वेश कुमार पांडे ने कहा कि इन मुद्दों को आज तक कवर नहीं किया गया है।

आईएमएस का मुद्दा वर्षों से लंबित है। हम सरकार से जल्द से जल्द इसका समाधान करने का आग्रह करते हैं। हम पाते हैं कि कई स्वास्थ्य कर्मियों के साथ अक्सर मारपीट की जाती है। हम मांग करते हैं कि केंद्रीय सुरक्षा अधिनियम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा की नर्सिंग छात्रों और नर्सों को जोखिम भरा भत्ता दिया जाता है, लेकिन डॉक्टरों को नहीं। हमें जोखिम जोखिम भत्ता दिया जाना चाहिए। हम संविदा पदों को समाप्त कर स्थायी पदों का सृजन करना चाहते हैं।  हमारी मांग है कि तदर्थ प्रणाली में कम से कम छह महीने की अवधि होनी चाहिए, जो वर्तमान में 45 दिनों की है।  हम रेजीडेंसी योजना में और संशोधन की मांग करते हैं, जो 1992 से लंबित है।

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