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अजब-गजब: 12 साल की बच्ची की लार ग्रंथि से निकला स्टोन, गले में सूजन व दर्द से थी परेशान, डॉक्टर बोले- ये दुर्लभ मामला

Thu, 26 May 2022 09:42 PM IST
आकाश दुबे अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: आकाश दुबे Updated Thu, 26 May 2022 09:42 PM IST
सार

दिल्ली के अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने एक 12 वर्षीय बच्ची के गले से स्टोन निकाल उसे नया जीवन दिया है। गले में स्टोन की वजह से सूजन और दर्द से बच्ची पीड़ित थी। भोजन करना तक बच्ची को मुश्किल होता था।

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Doctors in delhi removed 1.6 mm stone from salivary gland of a girl
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

गले में स्टोन की दुर्लभ समस्या से ग्रस्त एक 12 वर्षीय बच्ची को दिल्ली के अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने नया जीवन दिया है। बच्ची के गले में एक स्टोन था जिसकी वजह से उन सिर्फ उसे सूजन बल्कि असहनीय दर्द भी होता था। भोजन करना उसके लिए और भी ज्यादा मुश्किल होता था। लेकिन डॉक्टरों ने नई तकनीक के सहारे न सिर्फ सफलतापूर्वक स्टोन बाहर निकाला बल्कि बच्ची को एक सामान्य जीवन भी लौटाया है।

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अस्पताल की वरिष्ठ डॉ. चंचल पाल ने बताया कि जब बच्ची को लाया गया तो जांच में पता चला कि उसकी लार ग्रंथियों में से एक में 1.6 मिमी आकार का स्टोन है। यह काफी दुर्लभ मामला है। बच्ची को गले के दाहिने ओर सूजन और दर्द की शिकायत थी। उसके पिता ने पहले इस परेशानी को लेकर कई डॉक्टरों से परामर्श किया लेकिन लक्षण अस्पष्ट होने की वजह से उसका सही निदान नहीं हो पाया। बार-बार सूजन, गर्दन में दर्द, सांस लेने में कठिनाई और ठोस या फिर तरल भोजन के सेवन में उसे परेशानी होने लगी। बच्ची के माता पिता एक स्थानीय डॉक्टर की सलाह पर उसे लेकर अस्पताल पहुंचे।

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यहां जांच में पता चला कि बच्ची की एक लार ग्रंथि में 1.6 एमएम का स्टोन है। इसके बाद डॉक्टरों ने सियालो एंडोस्कोपी की सहायता से स्टोन बाहर निकालने का निर्णय लिया। परिजनों से बातचीत के बाद डॉक्टरों ने जब इस नई तकनीक का सहारा लिया तो स्टोन को वे सफलतापूर्वक बाहर निकाल सके। डॉ पाल ने कहा, ‘हमारे सिर और गर्दन के आसपास कुछ लार ग्रंथियां मौजूद होती हैं जो लार बनाने और उनके पाचन में मदद करती हैं। कभी-कभी संक्रमण या फिर डिहाईड्रेशन की वजह से इन ग्रंथियों की नलियों में पथरी (स्टोन) बनने की आशंका रहती है जो लार का उत्पादन करना बंद कर देती हैं।

आमतौर पर ऐसी स्थिति में पूरी ग्रंथि को हटा दिया जाता है। लेकिन नई तकनीकों की मदद से यह प्रक्रिया काफी आसान हुई है। सियालो एंडोस्कोपी के माध्यम से स्टोन को हटाया जा सकता है। यह एक न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया है जिसका उपयोग लार ग्रंथि में उपचार और निदान के लिए किया जाता है। उन्होंने बताया कि चिकित्सीय प्रक्रिया के बाद बच्ची को कुछ समय निगरानी में रखा गया और फिर उसे छुट्टी दे दी गई। फिलहाल बच्ची पूरी तरह से स्वस्थ है। 

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