दिल्ली के इस बड़े अस्पताल में हड़ताल पर डॉक्टर, मरीजों के लिए बाहर लगाई ओपीडी
- हड़ताल के साथ ही डॉक्टरों ने मरीजों की देखभाल रखी जारी
- हिंदूराव अस्पताल के शैक्षणिक परिसर में लगाई थी ओपीडी
विस्तार
करीब तीन माह से वेतन न मिलने के कारण सोमवार को हिंदूराव अस्पताल के डॉक्टरों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि बार बार शिकायत के बाद भी उत्तरी दिल्ली नगर निगम और दिल्ली सरकार राजनीति करने में व्यस्त हैं, लेकिन डॉक्टरों की परेशानी सुनने वाला कोई नहीं। उन्होंने वेतन के अलावा भी कुछ और मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मांगें पूरी होने तक हड़ताल जारी रहेगी। उधर सोमवार को अस्पताल आए मरीजों की तकलीफ को देखते हुए डॉक्टरों ने हड़ताल के दौरान सेवाभाव भी जारी रखा।
हिंदूराव अस्पताल के शैक्षणिक परिसर में डॉक्टरों ने बकायदा ओपीडी लगाई और वहां मरीजों के स्वास्थ्य की जांच की। हालांकि इसके बाद भी अस्पताल में मरीजों को लेकर काफी परेशानी देखने को मिली। करीब 100 से ज्यादा ऑपरेशन टालने पड़ गए। वहीं रोज के मुकाबले सोमवार को यहां मरीजों की संख्या में करीब 60 फीसदी कमी भी देखने को मिली। कहा जा रहा है कि पिछले कुछ दिन से अस्पताल में चल रहे प्रदर्शनों को लेकर मरीज भी खासा परेशान हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि वे मरीजों को परेशानी में डाल हड़ताल करने के कतई पक्षधर नहीं है, लेकिन अपने अधिकारों के लिए उन्हें ऐसा करना पड़ रहा है। इसीलिए वे हड़ताल के दौरान जरूरतमंद मरीजों की मदद करते रहेंगे। अस्पताल के आरडीए सचिव डॉ. संजीव चौधरी का कहना है कि तीन तीन घंटे हड़ताल करते हुए वेतन जल्द से जल्द दिलाने की मांग की गई थी, लेकिन निगम प्रबंधन ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया।
इसी के चलते उन्हें अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाना पड़ा। उन्होंने कहा कि जब तक वेतन सहित सभी मांगों पर संज्ञान नहीं लिया जाएगा, हड़ताल जारी रहेगी। उनका कहना है कि डॉक्टरों को पीने के लिए बाहर से पानी मंगवाना पड़ता है। इस मामले को लेकर भी कई बार अस्पताल प्रशासन के साथ बैठक में शिकायत भी दी जा चुकी है।
डॉक्टरों का राष्ट्रीय संगठन भी उतरा समर्थन में
हड़ताल में सोमवार को डॉक्टरों का राष्ट्रीय संगठन भी मैदान में उतर आया। फेडरेशन ऑफ रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन (फोर्डा) ने दिल्ली सरकार और नगर निगम को पत्र लिखते हुए जल्द से जल्द वेतन दिलाने की अपील की है। अध्यक्ष डॉ. सुमेध के मुताबिक अक्सर नगर निगम और राज्य सरकार के अस्पतालों के डॉक्टरों को लंबे समय तक वेतन नहीं दिया जाता। उन्हें केवल आश्वासन दे दिया जाता है। इससे घर चलाना काफी मुश्किल हो जाता है। उन्होंने ये भी कहा कि लापरवाही की चादर ओढ़ नींद में डूबे सरकारी सिस्टम को हड़ताल के जरिए ही जगाया जा सकता है।
वेतन के अलावा डॉक्टरों की ये भी हैं मांगें
-तीन महीने से अटकी सैलरी जल्दी दी जाए
-सातवें वेतन आयोग के तहत एरियर दी जाए
-डॉक्टरों की सुरक्षा की गारंटी दी जाए
-डॉक्टरों पर अत्यधिक कार्यभार कम किया जाए
-पढ़ाई के लिए लाइब्रेरी बनाई जाए
-डॉक्टरों के लिए पीने का पानी मुहैया करवाया जाए
-इमरजेंसी डिपार्टमेंट में पर्याप्त दवाईयां और उपकरण उपलब्ध करवाए जाएं