दिल्ली के इन अस्पतालों में पैदा होते हैं सिर्फ लड़के!
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दिल्ली के कुछ प्राइवेट अस्पतालों में लड़कों का जन्म ज्यादा हो रहा है। एक अस्पताल ऐसा भी है जहां जन्म लेने वाले दस बच्चों में सात लड़के हैं तो दो अस्पतालों में दस में से 3-4 लड़कियां जन्म ले रही हैं, बाकी लड़के।
ऐसे अस्पतालों के आंकड़े देखकर दिल्ली सरकार भी गंभीर हो गई है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण निदेशालय ने प्रति हजार 285-788 के बीच रहे 89 अस्पतालों को नोटिस जारी करके चार सवालों के जवाब 10 दिन में मांगे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने संवाददाता सम्मेलन में बताया कि राजधानी में जनगणना के अनुसार प्रति एक हजार 896 का लिंगानुपात है। लिंगानुपात की चिंता को लेकर सरकार ने बैठक ली तो उसमें यह बात सामने आई कि अस्पतालों पर आंकड़ों से नजर रखने का फ्रेम या सर्वे नहीं किया गया है।
ये आंकड़े चौंकाने वाले हैं
आंकड़े मंगाने के निर्देश दिए तो चौंकाने वाले परिणाम सामने आए। जिन अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों का लिंगानुपात प्रति हजार लड़कों के मुकाबले 800 लड़की के नीचे रही, उन्हें सरकार ने नोटिस जारी किया है।
स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि एक सेंटर पर प्रति हजार लड़कों के मुकाबले सिर्फ 285 लड़कियां पैदा हुईं। दो केंद्र पर 300-400 केबीच लिंगानुपात था तो सात सेंटर पर 400-500 के बीच लिंगानुपात सामने आया है।
लिंगानुपात कम रहने वाले इन अस्पतालों को नोटिस भेजकर लिंगानुपात में इतना बड़ा अंतर क्यों हैं? आपके सेंटर या अस्पताल का रजिस्ट्रेशन नर्सिंग होम सेल केसाथ है या दिल्ली स्वास्थ्य निदेशालय केसाथ? यहां एमटीपी(गर्भपात) कराने की सुविधा है या नहीं? केंद्र का पंजीकरण एमटीपी एंड पीसी या पीएनडीटी एक्ट में कहां से है? अगर गर्भपात की सुविधा नहीं है तो दिक्कत आने पर कहां से करवाते हैं?
पैदा होने से पहले बच्चे को मारना, बाद में मारने जैसा ही है
स्वास्थ्य मंत्री कहा, मैं नागरिकों से भी अपील करता हूं कि बेटा-बेटी में अंतर न करें। भगवान के पास जाकर मुंह दिखाना है। पैदा होने से पहले बच्चे को मारना, पैदा होने के बाद किसी को मारने जैसा ही अपराध है।
अगर इन अस्पतालों को अलग करें तो दिल्ली का लिंगानुपात सुधर जाएगा। इस मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने विभाग को लड़की के जन्म को लेकर जो भ्रांतियां हैं, उसे दूर करने और जागरूकता का अभियान चलाने के लिए कहा है।
किसी अस्पताल में लिंगानुपात 300 से नीचे है तो ये भगवान नहीं कर सकता। अगर इत्तेफाक होता तो लिंगानुपात 800 से नीचे इतने सारे अस्पतालों का नहीं होगा। कुछ तो गड़बड़ है। हम दोषियों को छोड़ेंगे नहीं। कानून में प्रावधान के अनुसार पुलिस में एफआईआर कराएंगे और कोर्ट में भी मुकदमा करेंगे।