{"_id":"b169289d395e0950027374357485011b","slug":"dmrc-has-started-advertising-on-the-token-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"डीएमआरसी ने मेट्रो टोकन पर शुरू किए विज्ञापन ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
डीएमआरसी ने मेट्रो टोकन पर शुरू किए विज्ञापन
ब्यूरो / अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Sun, 29 Nov 2015 05:27 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बदरपुर-फरीदाबाद कॉरिडोर पर अनुमान से काफी कम सवारियां मिलने की वजह से डीएमआरसी आय के दूसरे संसाधनों पर ध्यान दे रही है।
विज्ञापन
दिल्ली की तर्ज पर इस कॉरिडोर पर भी निजी कंपनी के विज्ञापन वाले टोकन बांटा जाना शुरू हो गए। शहर के एसआरएस ग्रुप को भी टोकन पर विज्ञापन करने की जगह मिली है।
13.875 किलोमीटर लंबे बदरपुर-वाईएमसीएस कॉरीडोर की प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाते वक्त इसके नौ स्टेशनों पर रोजाना 1.94 लाख सवारियां मिलने का अनुमान लगाया गया था। सेवा शुरू हुए करीब ढाई माह बीत चुके हैं।
विज्ञापन
यात्रियों की संख्या प्रतिदिन 50 हजार भी नहीं पहुंच सकी है। ऐसे में डीएमआरसी ने अपनी आय के दूसरे संसाधनों की तरफ भी ध्यान देना शुरू कर दिया है। अब डीएमआरसी ने मेट्रो सफर के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले टोकन पर विज्ञापन छापकर कमाई का तरीका निकाला है।
विज्ञापन
मेट्रो में दिए जाने वाला टोकन एक दिन में औसतन सात-आठ लोगों के पास जाता है। एक टोकन के माध्यम से इतने लोगों तक विज्ञापन को पहुंचाया जा सकता है।
आद्योगिक शहर के एसआरएस ग्रुप को भी डीएमआरसी के टोकनों पर जगह मिली है। इसके लिए पिछले दिनों ही डीएमआरसी ने टेंडर की प्रक्रिया पूरी की थी, अब टोकन पर विज्ञापन छापे गए हैं। पहले केवल दिल्ली मेट्रो के लोगो वाले टोकन मिलते थे, लेकिन डीएमआरसी ने अब टोकन का स्वरूप बिल्कुल ही बदल दिया है।
मालूम हो कि फरीदाबाद के सभी मेट्रो स्टेशनों पर डीएमआरसी ने प्रॉपर्टी डेवेलपमेंट के लिए पहले से ही जगह रिजर्व कर रखी है। इसके अलावा व्यवयायिक गतिविधियों के लिए डीएमआरसी ने लगभग 10 एकड़ जमीन भी मांगी है। हुडा संभवता सेक्टर 20 बी में लगभग ढाई एकड़ जमीन डीएमआरसी को उपलब्ध करा सकता है।
डीएमआरसी प्रवक्ता का कहना है कि केवल टोकन बेचकर ही मेट्रो का संचालन करना संभव नहीं हैं। आय बढ़ाने के लिए दूसरे संसाधनों को भी तलाशना जरूरी है।