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शपथ से पहले मोदी के फैसले की मुख़ालफ़त

Mon, 26 May 2014 03:55 PM IST
Updated Mon, 26 May 2014 03:55 PM IST
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dmk and admk protest against president of shrilanka mahinda rajpakshe

देश के नए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में पड़ोसी देशों के राजनयिकों के आने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है।

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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के आने से जहां शिवसेना में नाराजगी दिख रही हैं, वहीं श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को बुलाए जाने के विरोध में तमिलनाडु की राजनीति की दो चिर प्रतिद्वंद्वी पार्टियां भी एकजुट हो गई हैं।

श्रीलंका के राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे के भारत के पीएम नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने से नाराज एमडीएमके और एआईडीएमके के लोगों को जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया।
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ये है विरोध की मुख्य वजह!

dmk and admk protest against president of shrilanka mahinda rajpakshe

एमडीएमएके प्रमुख ने कहा कि राजपक्षे की मौजूदगी मोदी के शपथ ग्रहण समारोह की पवित्रता को नष्ट कर देगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राजपक्षे ने श्रीलंका में तमिलों का नरसंहार किया है।

वाइको ने यह भी बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी ने शपथ ग्रहण करने के दौरान श्रीलंकाई राष्ट्राध्यक्ष को नहीं बुलाया था। उन्होंने कहा कि निवर्तमान पीएम मनमोहन सिंह ने भी अपने शपथ ग्रहण समारोह के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति को आमंत्रण नहीं भेजा था।

हालांकि वाइको ने कहा कि वह नई सरकार के खिलाफ नहीं हैं और उन्होंने आज प्रधानमंत्री के रुप में शपथ लेने वाले नरेंद्र मोदी को बधाई दी।

किस ने कहा ये ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ है?

dmk and admk protest against president of shrilanka mahinda rajpakshe

श्रीलंकाई राष्टपति राजपक्षे के प्रशासन की मुखर विरोधी एडीएमके पहले ही राजपक्षे को आमंत्रिक किये जाने के फैसले को गलत ठहरा चुकी है।

इस मामले में जयललिता ने पहले ही कहा था कि केंद्र में सत्ता परिवर्तन से तमिलनाडु और श्रीलंका के बीच चले आ रहे तनावपूर्ण संबंध में कोई बदलाव नहीं आने वाला है।

अन्नाद्रमुक प्रमुख और मुख्यमंत्री जयललिता ने इसे ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ करार देते हुए पहले से दुखी तमिलों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया था। प्रदर्शन कर रहे लोगों का आरोप है कि मोदी को इस संबंध में तमिल लोगों की भावना को समझना चाहिए और इससे से बचना चाहिए था।

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