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पशु क्रूरता रोकने के लिए कार्रवाई करें पुलिस-प्राधिकरण, डीएम सुहास एलवाई ने की पहल

Thu, 08 Oct 2020 10:19 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा
अमर उजाला नेटवर्क, ग्रेटर नोएडा Published by: प्राची प्रियम Updated Thu, 08 Oct 2020 10:19 PM IST
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DM gautambuddh Nagar orders action against animal cruelty
लावारिस पशु - फोटो : अमर उजाला

गौतमबुद्ध नगर के जिलाधिकारी ने नोएडा प्राधिकरण और पुलिस को पत्र लिखकर पूरे जिले में पशु क्रूरता रोकने के लिए कार्रवाई करने का अनुरोध किया है। सोफिक मेमोरियल एनिमल रिलीफ ट्रस्ट ग्रेटर नोएडा ने डीएम को पशु क्रूरता का जिक्र करते हुए पत्र सौंपा था। 

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इसमें ट्रस्ट की फाउंडर कावेरी राणा ने बताया कि सोसाइटियों और सेक्टरों में पशुओं से क्रूरता होती है। लोग लावारिस पशुओं को मारते हैं और खाना खिलाने से रोकते हैं। इस कारण पशु प्रेमियों और पशु विरोधियों में विवाद बढ़ रहे हैं। 
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उन्होंने डीएम से इन्हें रोकने की अपील की थी। मांग की थी कि सोसायटी के अंदर ही एक जगह चिह्नित होनी चाहिए, जहां लावारिस पशुओं को खाना खिलाया जा सके। इसी के बाद जिलाधिकारी सुहास एलवाई ने जिले के पुलिस कमिश्नर और नोएडा प्राधिकरण के अपर मुख्य कार्यवाहक अधिकारी को पत्र लिखकर लावारिस पशुओं को खाना खिलाने के लिए जगह चिन्हित करने का अनुरोध किया है। यह देश के किसी भी जिलाधिकारी द्वारा दिया गया अपनी तरह का पहला आदेश है।
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यह फीडिंग प्वाइंट्स एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया (एडब्ल्यूबीआई) के प्रतिनिधियों द्वारा स्थापित किए जाएंगे क्योंकि वही जानवरों के रहने की जगह और उनके व्यवहार से परिचित होते हैं। नीचे देखें वह पत्र जो डीएम सुहास एलवाई ने नोएडा कमिश्नर और नोएडा प्राधिकरण को लिखा है-



संप्रीति दत्ता जैसे पशु प्रेमी उठाते रहे हैं पशु क्रूरता के खिलाफ आवाज
ग्रेटर नोएडा के चेरी काउंटी सोसायटी के पास जुलाई माह में करंट लगने से एक गाय मर गई थी। इस मामले में एक महिला ने कार्रवाई के लिए आवाज उठाई। सोसायटी निवासी सामाजिक कार्यकर्ता संप्रीति दत्ता ने स्टाफ पर लापरवाही का आरोप लगाया था।

महिला का कहना था कि बिजली का तार खुला पड़ा था। इससे किसी अन्य की भी जान जा सकती थी। आरोप था कि शिकायत के बावजूद पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज नहीं की। बिना पोस्टमार्टम शव दफना दिया गया। महिला ने ट्विटर पर आला अधिकारियों से शिकायत कर केस दर्ज करने की मांग भी की थी। संप्रीति के जैसे ही अन्य समाजसेवी व पशु प्रेमी लगातार पशु क्रूरता रोकने के लिए प्रशासन से गुहार लगाते रहे हैं।

लॉकडाउन में भी सामने आए थे पशु प्रेमी
जहां आए दिन लावारिस पशुओं के साथ क्रूरता होती है, वहीं समाज में कई ऐसे लोग हैं जो पशुओं के हक के लिए सड़कों पर भी उतरते हैं। वो न सिर्फ उन्हें खाना आदि देते हैं बल्कि अगर किसी लावारिस पशु को चोट लग जाए तो उसका इलाज भी कराते हैं।


लॉकडाउन में बेजुबान और बेसहारा जानवरों पर जब आफत टूटी थी, तब कई ऐसे लोग आगे आए थे जिन्होंने बेसहारा जानवरों का सहारा बन नई मिसाल पेश की थी। जानवरों को खाना खिलाना और उनकी देखभाल करना उनकी दिनचर्या में शामिल हो गया। बीमार पड़ने वाले जानवरों का अपने खर्च पर इलाज कराकर यह युवा अन्य लोगों के लिए मिसाल बने।

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