हीरो में फिर भड़का विवाद, बड़े बवाल की आशंका
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देश की नामचीन दोपहिया वाहन निर्माता कंपनी हीरो मोटोकॉर्प में फिर विवाद खड़ा हो गया है। कंपनी प्रबंधन द्वारा निलंबित चल रहे तीन यूनियन नेताओं को बर्खास्त करने के बाद श्रमिक विरोध में उतर गए है।
श्रमिकों ने हड़ताल की चेतावनी दी है जिस पर प्रशासन भी गंभीर हो गया है। इस मसले पर पुलिस आयुक्त ने कंपनी प्रबंधन से जल्द बातचीत कर मामला सुलझाने का आश्वासन दिया है। इस मसले पर श्रमिकों ने चेतावनी दी है कि इस मामले पर जल्द नहीं सुलझाया गया तो वे हड़ताल पर चले जाएंगे।
हीरो मोटो कॉर्प कंपनी के सेक्टर-37 स्थित कंपनी प्लांट में यूनियन के चार नेताओं के निलंबन को लेकर चल रहे मामले में शनिवार को कंपनी प्रबंधन ने चारों नेताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए पूर्व कमलप्रीत, महासचिव भीमराव, सदस्य बपेंद्रम मातराम को बर्खास्त कर दिया।
जबकि, चौथे श्रमिक राजबीर सिंह के खिलाफ मामला विचाराधीन रख लिया। कंपनी के इस फरमान के बाद श्रमिकों में आक्रोश फैल गया। बुधवार दोपहर ढाई बजे कंपनी शिफ्ट खत्म करने के बाद सैंकड़ों की तादाद में श्रमिकों ने कंपनी प्लांट के आगे इकट्ठा होकर प्रदर्शन किया। जिसके बाद सभी श्रमिक पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंच गए।
पढ़िए, क्या है इस विवाद की जड़?
पुलिस आयुक्त कार्यालय के बाहर सैंकड़ों श्रमिकों के प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस के पुख्ता इंतजाम कर लिए गए। श्रमिकों के पुलिस प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग पर पुलिस आयुक्त आलोक मित्तल ने यूनियन पदाधिकारियों से मिलते हुए कंपनी प्रबंधन से बातचीत का भरोसा दिलाया।
हालांकि, पुलिस के आश्वासन के बाद भी श्रमिक संतुष्ट नहीं है उन्होंने दो टूक में कहा कि जल्द ही इस मसले का हल नहीं निकला तो वे हड़ताल पर भी जा सकते है। यूनियन के वर्किंग प्रधान दशरथ कुमार ने आरोप लगाया कि कंपनी में वेतन एग्रीमेंट को लेकर कंपनी जानबूझ कर ऐसा कदम उठा रही है।
बर्खास्त पूर्व प्रधान कमलप्रीत ने बताया कि कंपनी ने एक तरफा जांच करते हुए उन्हें बर्खास्त किया है। उन्होने आरोप लगाया कि कंपनी की तरफ से उन्हें बर्खास्तगी का बिना नोटिस दिए निकाल उनके खाते में कंपनी ने जीपी समेत रिफंड जमा करा दिया। पुलिस आयुक्त ने बताया कि कंपनी पदाधिकारियों को बुलाकर जल्द इस मसले को सुलझाया जाएगा।
हीरो मोटो कॉर्प में त्रि-वर्षीय वेतन वृद्धि के मामले में एक साल पहले श्रमिकों का प्रबंधन के साथ विवाद शुरु हुआ था। 6 सितंबर 2013 को श्रमिकों के 20 फीसदी बढ़ोतरी को लेकर कंपनी प्रबंधन के साथ विवाद हो गया था। प्रबंधन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए पूर्व प्रधान कमलप्रीत समेत यूनियन के नौ श्रमिकों को निलंबित कर दिया था। हालांकि बाद में श्रमिकों के कड़े रूख को देखते हुए प्रबंधन ने पांच श्रमिकों को बहाल कर दिया जबकि बाकी चारों का निलंबन बरकरार रखते हुए उनके खिलाफ जांच बैठा दी गई थी।