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हेल्थ पॉलिसी में कोराना के लिए अलग-अलग फंडे, नहीं कोई मानक पैमाना

Thu, 30 Jul 2020 06:11 AM IST
दुष्यंत शर्मा अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली
अभिषेक पांचाल, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 30 Jul 2020 06:11 AM IST
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different fundas of health policy
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Social Media

अगर आपने मार्च से पहले स्वास्थ्य बीमा कराया है और इस वक्त कोरोना से संक्रमित होते हैं तो आपको बीमा कवर नहीं मिलेगा। वहीं, मार्च से होने वाली पॉलिसी में भी बीमा कंपनियों का कोई एक पैमाना नहीं है। सभी कंपनियां अपनी-अपनी सहूलियत के हिसाब से कोरोना पीड़ितों को बीमा कवर दे रही हैं। इसमें से कुछ ने 100 फीसदी बीमा कवर दे रखा है, जबकि कुछ ने लिमिट बांध रखी है। हालांकि, इस समय स्वास्थ्य बीमा लेने वालों को कोविड के लिए अलग से किसी तरह की तरह की पॉलिसी लेने की जरूरत नहीं है।

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बीमा कंपनियों का कहना है कि मार्च से होने वाले स्वास्थ्य बीमा में कोविड कवर दिया जा रहा है। बीमा लेने के बाद अगर व्यक्ति संक्रमित हो जाता है तो पॉलिसी में तय की गई रकम के अनुसार व्यक्ति इलाज का पूरा खर्च क्लेम कर सकता है। इसमें जितना भी सम एश्योर्ड होगा, कंपनी उसका पूरा भुगतान करेगी। इसके लिए अलग से कोई पॉलिसी लेने की जरूरत नही है। 
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दूसरी तरफ मार्च से पहले के स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में कोविड कवर नहीं होता है। कंपनियों की दलील है कि इससे पहले इस तरह की कोई बीमारी नही थी। ऐसे में प्रावधान न होने से बीमा कवर मिलना संभव नहीं है।
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आईसीआईसीआई लोम्बार्ड के सेल्स मैऩेजर समरजीत सिंह ने बताया कि इस वक्त सामान्य स्वास्थ्य बीमा में ही कोविड कवर जुड़ा है। पॉलिसी की उम्र 18 से 65 साल के बीच है। बच्चों में एक दिन से 25 साल के बीच है। जबकि एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस कंपनी के सेल्स मैनेजर आशीष का कहना है कि अब जो पॉलिसी दी जा रही है, उसमें अस्पताल में भर्ती होने पर बेड, नर्सिंग चार्ज, बल्ड टेस्ट, ऑक्सीजन, आईसीयू की सुविधा शामिल है।

 इतना ही नहीं, मरीज के भर्ती होने से पहले भी घर पर इलाज और दवाइयों का 14 दिनों का खर्च दिया जाएगा। जबकि बजाज इंश्योरेंस का कहना है कि जिस दिन पॉलिसी हुई है, उसके 30 दिन के बाद से कोविड समेत अन्य बीमारियों का कवर मिलेगा। लेकिन अगर कोई हादसा हो जाता है तो उसमें पहले दिन से ही कवर मिलेगा। इसमें कोई कैप लिमिट नहीं है। 

पॉलिसी लेने से पहले इन बातों का रखें ध्यान:

अस्पताल का बिल ज्यादा आए
अस्पताल में भर्ती मरीज कोरोना अपने स्वास्थ्य बीमा के तहत क्लेम कर सकता है। अगर अस्पताल का बिल इसके इंश्योरेंस की रकम से ज्यादा आता है तो व्यक्ति को वह पैसा खुद भरना होगा। 

ज्यादा नेटवर्क वाली कंपनी से लें बीमा:
बीमा लेते समय इस बात का ध्यान रखें की जिस कंपनी के पास अस्पतालों का सबसे बड़ा नेटवर्क है। उससे ही बीमा लें। इससे बीमारी के समय किसी भी अस्पताल में भर्ती होने में परेशानी नहीं होगी। 

जांच कर लें की बीमा में पुरानी बीमारियों शामिल होगी या नहीं:
बीमा लेने से पहले यह जांच लें की इसमें कोविड कवर के साथ साथ अन्य बीमारियों का भी इलाज है या नहीं,हालांकि अधिकतर कंपिनयों का यही कहना है कि स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में अन्य बीमारियों के साथ कोविड भी शामिल है। जिसका पूरा खर्च उठाया जाएगा। 

विशेषज्ञों की राय:
सीए और बीमा मामलों के जानकार सजय गुप्ता बताते हैं कि नई पॉलिसी से सभी लोगों को लाभ मिलेगा,लेकिन समस्या यह है कि इस समय अस्पतालों ने कैश लेस सुविधा खत्म कर दी है। ऐेसे में मरीज को अस्पताल से डिस्चार्ज होने के समय सारा भुगतान खुद से ही करना पड़ता है। करीब दो महीने बाद कागजी कार्रवाई के बाद यह पैसा उसे मिलता है। वहीं,कैशलेस सुविधा के अंदर व्यक्ति को नकद भुगतान नहीं करना पड़ता । बीमा कंपनी ही अस्पताल को भुगतान करती है। इसलिए अगर व्यक्ति के पास नकद पैसै नहीं हैं तो उसे समस्या हो सकती है। 

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