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आपके पास है डीजल जनरेटर तो हो जाएं सावधान, दिल्ली में जल्द लगेगी इस पर रोक

Sat, 21 Jan 2017 12:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sat, 21 Jan 2017 12:43 PM IST
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diesel generators to be ban in delhi soon
दिल्ली प्रदूषण - फोटो : self

दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए सुप्रीम कोर्ट के जरिये गठित पर्यावरण प्रदूषण संरक्षण प्राधिकरण (ईपीसीए) की शुक्रवार को पहली बैठक संपन्न हुई।

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बैठक में प्राधिकरण ने दिल्ली की हवा को बेहद खराब (वेरी पुअर) और एनसीआर की वायु गुणवत्ता को सामान्य से खराब (मॉडरेट टू पुअर) श्रेणी में रखते हुए इन राज्यों को श्रेणी के हिसाब से एक्शन प्लान लागू करने का निर्देश दिया।
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एक्शन प्लान के मुताबिक, बेहद खराब वायु गुणवत्ता श्रेणी के तहत अब दिल्ली सरकार को पूरी दिल्ली में डीजल जनरेटर सेट पर रोक लगानी होगी और पार्किंग फीस को तीन से चार गुना तक बढ़ाना होगा।
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सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को मजबूत करना होगा। खुले में फास्ट फूड बेचने वालों को ईंधन और कोयला इस्तेमाल करने से रोकना होगा। इसकी जानकारी समाचार पत्रों में भी देनी होगी।

जल्द से जल्द पार्किंग नीति लाएं

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पार्किंग स्थल - फोटो : अमर उजाला

हालांकि, ईपीसीए ने दिल्ली सरकार को इसके लिए कुछ वक्त देते हुए कहा है कि वह जल्द से जल्द पार्किंग नीति लाएं और मोटर व्हिकल एक्ट में बदलाव कर गलत जगह गाड़ी पार्किंग करने वालों पर भारी जुर्माना लगाने का प्रावधान करें।

फिलहाल बैठक में तय किया गया है कि प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की निगरानी की जाए। जो वाहन के जरिये प्रदूषण फैलाता पाया जाए, उससे 1000 रुपये वसूले जाएं।

सुप्रीम कोर्ट में दिए गए एक्शन प्लान के तहत मॉडरेट टू पुअर वायु गुणवत्ता श्रेणी की अवस्था में उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान को पूरी तरह से कूड़ा-कचरा जलाने पर रोक लगानी होगी। यदि कोई आदेश का उल्लंघन करता है, तो उस पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।

तो खामोश हो जाएंगी चिमनियां

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प्राधिकरणों को इस अवस्था में ईंट भट्ठों और औद्योगिक इकाइयों को बंद करना होगा या फिर पूरी सख्ती से इनके जरिये होने वाले प्रदूषण पर रोक लगानी होगी।

बैठक में निर्णय लिया गया है कि सभी ईंट-भट्ठों को अपनी चिमनियों को जिग-जैग मॉडल में तैयार करना होगा। यदि कोई ईंट भट्ठा यह करने में विफल रहा तो उसका लाइसेंस रद्द कर दिया जाएगा।

जिग-जैग चिमनी से कॉर्बन कणों को कम किया जाता है। ईपीसीए ने इसके लिए राज्यों को मोहलत दी है, हालांकि इसे लागू करने के लिए कोई टाइमलाइन नहीं दी गई है।

बैठक की अध्यक्षता कर रहे ईपीसीए के चेयरमैन भूरेलाल ने कहा कि बीते वर्ष नवंबर में जिस धुएं के साथ धुंध (स्मॉग) को दिल्ली वासियों ने झेला है, उसका दोहराव नहीं होना चाहिए। बैठक में पर्यावरणविद् व ईपीसीए सदस्य सुनीता नारायण व दिल्ली पर्यावरण सचिव चंद्रेकर भारती मौजूद थे।

ऐसे समझें इसे
मालूम हो कि बेहद खराब वायु गुणवत्ता तब मानी जाएगी जब हवा में पर्टिकुलेट मैटर (पीएम) 2.5 का स्तर 121 से 250 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होगा और पीएम 10 का स्तर 351 से 430 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होगी। मॉडरेट टू पुअर वायु गुणवत्ता श्रेणी तब माना जाएगा जब वायु में पीएम 2.5 का स्तर 91 से 120 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर हो और पीएम 10 का स्तर 251 से 350 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर मौजूद हो। ईपीसीए ने इसी के तहत दिल्ली समेत एनसीआर राज्यों को तय किए गए एक्शन प्लान को लागू करने को कहा है।

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