फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Despite the grimness in Delhi Police, functional rank is given importance

Delhi : किरकिरी के बावजूद दिल्ली पुलिस में फंक्शनल रैंक को दी जा रही तवज्जो, इस वजह से एक अपराधी हो गया था बरी

Mon, 26 Aug 2024 05:30 AM IST
दुष्यंत शर्मा पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली
पुरुषोत्तम वर्मा, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Mon, 26 Aug 2024 05:30 AM IST
सार

फंक्शनल रैंक(एफआर) पुलिस अधिकारी को काम को देखने के लिए पदोन्नत कर अगली रैंक तो दे दी गई है, मगर कन्फर्म न होने की वजह से उनके पास कानूनी अधिकार नहीं है।

विज्ञापन
Despite the grimness in Delhi Police, functional rank is given importance
दिल्ली पुलिस, Delhi police - फोटो : X: @DelhiPolice

विस्तार

दिल्ली पुलिस (डीपी) में किरकिरी होने के बावजूद दिनों दिन फंक्शनल रैंक को तवज्जो दी जा रही है। फंक्शनल रैंक(एफआर) पुलिस अधिकारी को काम को देखने के लिए पदोन्नत कर अगली रैंक तो दे दी गई है, मगर कन्फर्म न होने की वजह से उनके पास कानूनी अधिकार नहीं है।

विज्ञापन


दिल्ली पुलिस ने अपराध शाखा में एफआर रैंक के एसीपी तैनात करने की वजह से कोर्ट से एक अपराधी को बरी कर दिया था। अब साइबर थानों के थानाध्यक्ष भी एफआर रैंक के इंस्पेक्टर लगाए जा रहे हैं। दो इंस्पेक्टरों को तो थानाध्यक्ष लगा दिया गया था। दिल्ली पुलिस ने एक दिन में अपनी गलती मानते हुए दोनों को पद से हटा दिया।
विज्ञापन


दिल्ली पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली पुलिस में पिछले कुछ सालों में खासकर सब-इंस्पेक्टर को पदोन्नति देकर इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर को एसीपी बना दिया गया है। मगर इनमें से ज्यादातर को अभी तक अभी कन्फर्म नहीं किया गया है। यानी कामकाज देखने के लिए इनको इंस्पेक्टर या एसीपी बना दिया गया है, मगर कोर्ट या फिर सरकार की ओर से इनको मान्यता नहीं दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन


ऐसे में इनको कानूनी अधिकार नहीं है। दिल्ली पुलिस ने अपनी अपराध शाखा में एफआर रैंक के एसीपी को एसीपी लगा दिया गया था। इस कारण मादक पदार्थों के तस्करी करने वाला एक अपराधी गत वर्ष बरी हो गया था। अपराधी से मादक पदार्थों की तलाशी व जब्ती एसीपी यानि राजपत्रित अधिकारी के सामने ही की जा सकती है।

कोर्ट ने उन एसीपी से पूछा कि क्या आप एसीपी है तो उन्होंने कहा कि वह एसीपी हैं, जबकि उनकी सैलरी स्लिप व अन्य जगहों पर इंस्पेक्टर लिखा हुआ था। इस कारण कोर्ट ने अपराधी को बरी कर दिया। ऐसे ही अब दिल्ली पुलिस ने साइबर अपराध को बढ़ते देख हर जिले में एक साइबर थाना खोला था। मगर इन थानों के थानाध्यक्ष एफआर रैंक के इंस्पेक्टर लगा दिए गए। इन इंस्पेक्टर को चार्जशीट पर हस्ताक्षर करने का कानूनी अधिकार तक नहीं है।

दो इंस्पेक्टर को हटाया गया
दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को निकाली अपने 75 थानाध्यक्षों की तबादला सूची में दो ऐसे इंस्पेक्टर लगा दिए गए जो एफआर रैंक के है। खास बात ये है कि इन इंस्पेक्टर का थानाध्यक्ष पद के लिए न तो साक्षात्कार लिया गया और न ही प्रोबेशनरी पीरियड पूरा हुआ था। सोशल मीडिया व दिल्ली पुलिसकर्मियों के भारी विरोध के बाद दिल्ली पुलिस आयुक्त कार्यालय को अपनी सूची में संशोधन करना पड़ा।


तीन एसीपी को थानाध्यक्ष लगाया गया
हाल ही में थानाध्यक्षों के तबादले की आई सूची में तीन एसीपी(एफआर रैंक) को थानाध्यक्ष लगा दिया गया है। हालांकि कानूनी रूप से वह लग सकते हैं। मगर ये भी पहली बार हो रहा है कि एसीपी की वर्दी पहने एक पुलिस अधिकारी थानाध्यक्ष का पद संभाल रहा है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि एसीपी रैंक को अधिकारी को थानाध्यक्ष पद बैठे देखना बहुत ही अजीब लगता है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed