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पशुओं पर भी होने लगा नोटबंदी का असर, मालिकों के पास नहीं चारा खरीदने के पैसे

Thu, 17 Nov 2016 12:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा
ब्यूरो/अमर उजाला, ग्रेटर नोएडा Updated Thu, 17 Nov 2016 12:09 AM IST
सार

चारा खरीदने को भी नहीं मिल पा रहे नए नोट
व्यापारियों ने पुराने नोट से देने से किया मना

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demonetization effect: people dont have money to buy fodder

विस्तार

नोट बंदी का असर किसानों पर दिखाई देने लगा है। हालत यह है कि पशुओं के लिए चारा खरीदने तक के रुपये नहीं बचे हैं। चारा व्यापारियों ने पांच सौ और हजार रुपये के नोट लेना बंद दिया है। परेशान किसानों को चारा उधार लेना पड़ रहा है। बैंकों की लंबी लाइन में लगकर पांच सौ और हजार रुपये के पुराने नोट बदलने व जमा करने का समय नहीं मिल पा रहा है।
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जनपद गौतमबुद्ध नगर के अधिकांश किसानों की जमीन अधिग्रहीत हो चुकी है, इसके बावजूद आज भी बड़ी संख्या में किसान पशुपालन से जुड़े हैं। फायदे का सौदा होने से ऐसे ग्रामीण भी पशुपालन कर रहे हैं, जिनके पास खेती की जमीन नहीं है।
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नोट बंदी के बाद से पशुओं के चारे की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं। चारा व्यापारियों ने पांच सौ और हजार रुपये के पुराने नोट लेना बंद कर दिया है। परेशानी झेलने के बाद भी किसान केंद्र सरकार के निर्णय को सही नहीं मान रहे हैं।
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पुराने नोट से नहीं मिल रहा चारा

demonetization effect: people dont have money to buy fodder
पशुपालन से परिवार का पालन पोषण कर रहा हूं। दूध बेचकर हर माह 50 हजार रुपये आते हैं, जिसमें करीब 30 हजार रुपये का चारा पशुओं का आता था। नोट बंदी के बाद व्यापारियों ने पुराने नोट पर चारा नहीं दे रहे हैं। बैंक से नोट बदलकर कम चारा मिल पा रहा है।-पवन नागर, डेरीन गुजरान गांव निवासी

दूध सप्लाई से होने वाली कमाई से पशुओं के चारे की व्यवस्था की जाती थी, लेकिन नोट बंदी के बाद से व्यापारियों ने पुराने नोटों को लेने से इंकार कर दिया है। बैंक पर रोजाना लाइन में लगकर नोट बदलने के बाद प्रतिदिन चारे की व्यवस्था की जा रही है। केंद्र सरकार का नोट बंदी का निर्णय किसान हित में नहीं है।-पंकज शर्मा, हतेवा गांव निवासी
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