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Delhi NCR News: आबकारी मामले में सुनवाई ट्रांसफर करने की मांग
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केजरीवाल-सिसोदिया ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को लिखा पत्र
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया समेत दिल्ली आबकारी नीति मामले के कई आरोपियों ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत से हटाकर किसी अन्य बेंच को सौंपने की मांग की है। पत्र में न्यायिक निष्पक्षता और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए मामले के ट्रांसफर का अनुरोध किया है।
उन्होंने पत्र में कहा गया कि आबकारी नीति से जुड़े इस मामले में पहले पारित किए गए कई आदेशों को सुप्रीम कोर्ट पलट चुका है। ऐसे में उनको आशंका है कि मौजूदा बेंच के समक्ष मामले की सुनवाई पूरी तरह निष्पक्ष ढंग से नहीं हो पाएगी। इसी आधार पर उन्होंने सीबीआई बनाम कुलदीप सिंह और अन्य मामले को किसी अन्य बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए स्थानांतरित करने की मांग की है।
पत्र में उन्होंने कहा कि 27 फरवरी 2026 को विशेष सीबीआई अदालत ने विस्तृत आदेश पारित करते हुए सभी 23 आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए सीबीआई ने हाईकोर्ट में लगभग 50 पन्नों की रिवीजन याचिका दायर की है। इस याचिका में निचली अदालत के निष्कर्षों या साक्ष्यों में किसी विशेष त्रुटि को स्पष्ट रूप से नहीं दर्शाया गया है, फिर भी मामले को चुनौती दी गई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि 9 मार्च 2026 को हुई पहली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर दिया और प्रारंभिक टिप्पणी दर्ज कर ली कि निचली अदालत का विस्तृत आदेश गलत प्रतीत होता है। साथ ही अदालत ने जांच अधिकारी के खिलाफ निचली अदालत की टिप्पणियों और संभावित विभागीय कार्रवाई से जुड़े निर्देशों पर भी रोक लगा दी। दूसरी ओर, हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुकदमे की सुनवाई कर रही निचली अदालत की कार्यवाई को भी स्थगित करने का निर्देश दिया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।
आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल व मनीष सिसोदिया समेत दिल्ली आबकारी नीति मामले के कई आरोपियों ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर मामले की सुनवाई जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत से हटाकर किसी अन्य बेंच को सौंपने की मांग की है। पत्र में न्यायिक निष्पक्षता और न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास को बनाए रखने के लिए मामले के ट्रांसफर का अनुरोध किया है।
उन्होंने पत्र में कहा गया कि आबकारी नीति से जुड़े इस मामले में पहले पारित किए गए कई आदेशों को सुप्रीम कोर्ट पलट चुका है। ऐसे में उनको आशंका है कि मौजूदा बेंच के समक्ष मामले की सुनवाई पूरी तरह निष्पक्ष ढंग से नहीं हो पाएगी। इसी आधार पर उन्होंने सीबीआई बनाम कुलदीप सिंह और अन्य मामले को किसी अन्य बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए स्थानांतरित करने की मांग की है।
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पत्र में उन्होंने कहा कि 27 फरवरी 2026 को विशेष सीबीआई अदालत ने विस्तृत आदेश पारित करते हुए सभी 23 आरोपियों को आरोप मुक्त कर दिया था। इस आदेश को चुनौती देते हुए सीबीआई ने हाईकोर्ट में लगभग 50 पन्नों की रिवीजन याचिका दायर की है। इस याचिका में निचली अदालत के निष्कर्षों या साक्ष्यों में किसी विशेष त्रुटि को स्पष्ट रूप से नहीं दर्शाया गया है, फिर भी मामले को चुनौती दी गई है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया है कि 9 मार्च 2026 को हुई पहली सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर दिया और प्रारंभिक टिप्पणी दर्ज कर ली कि निचली अदालत का विस्तृत आदेश गलत प्रतीत होता है। साथ ही अदालत ने जांच अधिकारी के खिलाफ निचली अदालत की टिप्पणियों और संभावित विभागीय कार्रवाई से जुड़े निर्देशों पर भी रोक लगा दी। दूसरी ओर, हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के मुकदमे की सुनवाई कर रही निचली अदालत की कार्यवाई को भी स्थगित करने का निर्देश दिया है।
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