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दिल्ली में प्रदूषण अलर्ट सिस्टम की सटीक चेतावनी, 80 फीसदी तक सही भविष्यवाणी : सीईईडब्ल्यू
Wed, 01 Oct 2025 06:29 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, दिल्ली-एनसीआर
संवाद न्यूज एजेंसी, दिल्ली-एनसीआर
Updated Wed, 01 Oct 2025 06:29 PM IST
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-दिल्ली के एक्यूईडब्ल्यूएस ने 300 से अधिक एक्यूआई वाले दौर का लगभग 80 फीसदी बार पूर्वानुमान लगाया,
-400 से अधिक गंभीर श्रेणी के एक्यूआई का पूर्वानुमान 2024-25 में बेहतर हुआ
-दिल्ली में प्रदूषण की सटीक चेतावनी देने लगा सिस्टम, विशेषज्ञों ने कहा- अब पूरे साल हो निगरानी और डेटा हो सार्वजनिक
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राजधानी में सर्दियों के दौरान बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए विकसित एयर क्वालिटी अर्ली वाॅर्निंग सिस्टम (एक्यूईडब्ल्यूएस) ने अच्छा प्रदर्शन किया है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के एक ताजा अध्ययन से पता चला है कि यह सिस्टम 2023-24 और 2024-25 की सर्दी (अक्तूबर से फरवरी) में 'बहुत खराब' और 'उच्च' स्तर के प्रदूषण दौर की भविष्यवाणी 80 फीसदी से अधिक सटीकता के साथ कर सका।
अध्ययन में कहा गया है कि 2023-24 में 92 ऐसे प्रदूषण एपिसोड्स में से 83 और 2024-25 में 58 में से 54 का पूर्वानुमान सही रहा। यह सिस्टम एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 300 से ऊपर के स्तर को पहले ही बता देता है, जिससे प्रशासन प्रतिबंध लगाने और स्वास्थ्य सुरक्षा के उपाय समय पर कर सके।
सीईईडब्ल्यू की रिपोर्ट 'हाउ वेल कैन दिल्ली प्रिडिक्ट एयर क्वालिटी? इनसाइट्स फॉर इंडियाज डिसीजन सपोर्ट सिस्टम्स' में यह भी उल्लेख है कि गंभीर दिनों (एक्यूआई 400 से अधिक) की भविष्यवाणी में 2024-25 में सुधार हुआ। 2023-24 में 15 में से सिर्फ एक दिन सही पकड़ा गया, जबकि अगले साल 14 में से 5 दिनों का पूर्वानुमान सटीक रहा, यानी लगभग पांच गुना बेहतर।
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वहीं, सीईईडब्ल्यू के प्रोग्राम लीड डॉ. मोहम्मद रफीउद्दीन ने कहा कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत देश ने मॉनिटरिंग और वाॅर्निंग सिस्टम में प्रगति की है। दिल्ली का एक्यूईडब्ल्यूएस उच्च सटीकता दिखा रहा है लेकिन अपडेटेड एमिशन इनवेंट्री से इसे और मजबूत किया जा सकता है। इससे प्रदूषण के स्रोतों की बेहतर समझ मिलेगी। देश को विज्ञान, फंडिंग और पारदर्शिता के साथ इन सिस्टम्स को बढ़ाना चाहिए, ताकि मिटिगेशन प्लान 2025 सबूत-आधारित हो।
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हाई-रिजोल्यूशन मॉडलिंग में निवेश की सलाह दी
सीईईडब्ल्यू ने राष्ट्रीय एमिशन इनवेंट्री को हर 2-3 साल अपडेट करने, डेटा को पब्लिक करने और हाई-रिजोल्यूशन मॉडलिंग में निवेश की सलाह दी। इससे न सिर्फ पूर्वानुमान बेहतर होगा, बल्कि प्रदूषण रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाई जा सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पारदर्शिता से जनता का भरोसा बढ़ेगा और शोध को बढ़ावा मिलेगा। दिल्ली जैसे शहरों में प्रदूषण प्रबंधन के लिए यह महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
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सिस्टम का बैकग्राउंड और विस्तार
2018 में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने गंभीर धुंध और धूल भरी आंधियों के बाद एक्यूईडब्ल्यूएस शुरू किया, जिसे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम) और इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (आईएमडी) चलाते हैं। यह तीन से 10 दिन पहले अलर्ट देता है। 2021 में डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) जोड़ा गया, जो प्रदूषण स्रोतों का सेक्टर-वाइज विश्लेषण करता है। अध्ययन के अनुसार, ये टूल्स डेटा को एकीकृत कर निर्णय लेने में मददगार है लेकिन डीएसएस अभी सिर्फ सर्दियों में सक्रिय है। इसे साल भर चलाने और वाहन प्रतिबंधों या पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधारों के सिमुलेशन जोड़ने से प्रभाव बढ़ेगा।
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-400 से अधिक गंभीर श्रेणी के एक्यूआई का पूर्वानुमान 2024-25 में बेहतर हुआ
-दिल्ली में प्रदूषण की सटीक चेतावनी देने लगा सिस्टम, विशेषज्ञों ने कहा- अब पूरे साल हो निगरानी और डेटा हो सार्वजनिक
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। राजधानी में सर्दियों के दौरान बढ़ते वायु प्रदूषण को रोकने के लिए विकसित एयर क्वालिटी अर्ली वाॅर्निंग सिस्टम (एक्यूईडब्ल्यूएस) ने अच्छा प्रदर्शन किया है। काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरनमेंट एंड वॉटर (सीईईडब्ल्यू) के एक ताजा अध्ययन से पता चला है कि यह सिस्टम 2023-24 और 2024-25 की सर्दी (अक्तूबर से फरवरी) में 'बहुत खराब' और 'उच्च' स्तर के प्रदूषण दौर की भविष्यवाणी 80 फीसदी से अधिक सटीकता के साथ कर सका।
अध्ययन में कहा गया है कि 2023-24 में 92 ऐसे प्रदूषण एपिसोड्स में से 83 और 2024-25 में 58 में से 54 का पूर्वानुमान सही रहा। यह सिस्टम एक्यूआई (एयर क्वालिटी इंडेक्स) 300 से ऊपर के स्तर को पहले ही बता देता है, जिससे प्रशासन प्रतिबंध लगाने और स्वास्थ्य सुरक्षा के उपाय समय पर कर सके।
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सीईईडब्ल्यू की रिपोर्ट 'हाउ वेल कैन दिल्ली प्रिडिक्ट एयर क्वालिटी? इनसाइट्स फॉर इंडियाज डिसीजन सपोर्ट सिस्टम्स' में यह भी उल्लेख है कि गंभीर दिनों (एक्यूआई 400 से अधिक) की भविष्यवाणी में 2024-25 में सुधार हुआ। 2023-24 में 15 में से सिर्फ एक दिन सही पकड़ा गया, जबकि अगले साल 14 में से 5 दिनों का पूर्वानुमान सटीक रहा, यानी लगभग पांच गुना बेहतर।
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वहीं, सीईईडब्ल्यू के प्रोग्राम लीड डॉ. मोहम्मद रफीउद्दीन ने कहा कि नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के तहत देश ने मॉनिटरिंग और वाॅर्निंग सिस्टम में प्रगति की है। दिल्ली का एक्यूईडब्ल्यूएस उच्च सटीकता दिखा रहा है लेकिन अपडेटेड एमिशन इनवेंट्री से इसे और मजबूत किया जा सकता है। इससे प्रदूषण के स्रोतों की बेहतर समझ मिलेगी। देश को विज्ञान, फंडिंग और पारदर्शिता के साथ इन सिस्टम्स को बढ़ाना चाहिए, ताकि मिटिगेशन प्लान 2025 सबूत-आधारित हो।
हाई-रिजोल्यूशन मॉडलिंग में निवेश की सलाह दी
सीईईडब्ल्यू ने राष्ट्रीय एमिशन इनवेंट्री को हर 2-3 साल अपडेट करने, डेटा को पब्लिक करने और हाई-रिजोल्यूशन मॉडलिंग में निवेश की सलाह दी। इससे न सिर्फ पूर्वानुमान बेहतर होगा, बल्कि प्रदूषण रोकथाम में सक्रिय भूमिका निभाई जा सकेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी पारदर्शिता से जनता का भरोसा बढ़ेगा और शोध को बढ़ावा मिलेगा। दिल्ली जैसे शहरों में प्रदूषण प्रबंधन के लिए यह महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
सिस्टम का बैकग्राउंड और विस्तार
2018 में पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने गंभीर धुंध और धूल भरी आंधियों के बाद एक्यूईडब्ल्यूएस शुरू किया, जिसे इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेट्रोलॉजी (आईआईटीएम) और इंडियन मेट्रोलॉजिकल डिपार्टमेंट (आईएमडी) चलाते हैं। यह तीन से 10 दिन पहले अलर्ट देता है। 2021 में डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (डीएसएस) जोड़ा गया, जो प्रदूषण स्रोतों का सेक्टर-वाइज विश्लेषण करता है। अध्ययन के अनुसार, ये टूल्स डेटा को एकीकृत कर निर्णय लेने में मददगार है लेकिन डीएसएस अभी सिर्फ सर्दियों में सक्रिय है। इसे साल भर चलाने और वाहन प्रतिबंधों या पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुधारों के सिमुलेशन जोड़ने से प्रभाव बढ़ेगा।