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Delhi NCR News: असोला भट्टी से बदलेगी दिल्ली की हवा, 10 लाख पेड़ों से मजबूत होगा हरित कवच
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अरावली में खराब हो चुके इलाकों को वैज्ञानिक तरीके से दोबारा प्राकृतिक वन क्षेत्र में बदलने की योजना
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने और अरावली क्षेत्र के प्राकृतिक स्वरूप को पुनर्जीवित करने के लिए असोला भट्टी वन्यजीव अभयारण्य में बड़े स्तर पर ईको-रिस्टोरेशन अभियान शुरू किया गया है। दक्षिणी रिज क्षेत्र में 10 लाख से अधिक देसी प्रजातियों के पेड़ तैयार किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य राजधानी के हरित क्षेत्र को मजबूत करना, जैव विविधता बढ़ाना और पर्यावरणीय संतुलन को बेहतर बनाना है।
वन एवं वन्यजीव विभाग ने बताया कि अभयारण्य के उन हिस्सों को वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया जा रहा है, जो पहले खनन और अन्य मानवीय गतिविधियों से प्रभावित रहे हैं। इसके तहत स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल पौधों का चयन, नियमित निगरानी और दीर्घकालिक संरक्षण की व्यवस्था की गई है।
पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने अभियान के तहत पौधरोपण किया। उन्होंने कहा कि असोला भट्टी केवल वन क्षेत्र नहीं, बल्कि दिल्ली की महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर है। सरकार का लक्ष्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि ऐसे आत्मनिर्भर जंगल विकसित करना है जो लंबे समय तक टिके रहें और वन्यजीवों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराएं।
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वन्यजीवों के लिए बनाए गए पानी के 218 कृत्रिम स्रोत
अभयारण्य में वन्यजीवों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 218 वाटर होल (पानी के कृत्रिम स्रोत) विकसित किए गए हैं। इन्हें वन्यजीवों के आवाजाही वाले मार्गों के आसपास बनाया गया है, जहां नियमित रूप से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि गर्मियों में पानी की कमी वन्यजीवों के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में यह व्यवस्था विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
तेंदुए समेत कई प्रजातियों का है बसेरा
कैमरा ट्रैप और मैदानी निगरानी के दौरान अभयारण्य में तेंदुआ, धारीदार लकड़बग्घा, चीतल, नीलगाय, साही, विभिन्न सरीसृप और अनेक पक्षी प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। वन विभाग की ओर से पक्षी अवलोकन मार्ग विकसित करने, प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और व्यापक पौधरोपण का काम भी जारी है।
6 लाख पौधे तैयार, नागरिकों को भी दिए जाएंगे
वन विभाग की भारत नर्सरी में करीब छह लाख देसी प्रजातियों के पौधे तैयार किए गए हैं। इनका उपयोग वन क्षेत्र की बहाली, शहरी हरियाली बढ़ाने और नागरिकों को निशुल्क वितरण के लिए किया जाएगा। हाल ही में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अभयारण्य का दौरा कर संरक्षण कार्यों की सराहना की थी। उन्होंने कहा कि प्रकृति और स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़े हैं। इसी कड़ी में दिल्ली सरकार जुलाई से ‘क्लीन दिल्ली, ग्रीन दिल्ली’ अभियान शुरू करेगी, जिसके तहत राजधानी में 70 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।दिल्ली की हवा को बेहतर बनाने और अरावली क्षेत्र के प्राकृतिक स्वरूप को पुनर्जीवित करने के लिए असोला भट्टी वन्यजीव अभयारण्य में बड़े स्तर पर ईको-रिस्टोरेशन अभियान शुरू किया गया है। दक्षिणी रिज क्षेत्र में 10 लाख से अधिक देसी प्रजातियों के पेड़ तैयार किए जाएंगे। इस पहल का उद्देश्य राजधानी के हरित क्षेत्र को मजबूत करना, जैव विविधता बढ़ाना और पर्यावरणीय संतुलन को बेहतर बनाना है।
वन एवं वन्यजीव विभाग ने बताया कि अभयारण्य के उन हिस्सों को वैज्ञानिक तरीके से विकसित किया जा रहा है, जो पहले खनन और अन्य मानवीय गतिविधियों से प्रभावित रहे हैं। इसके तहत स्थानीय परिस्थितियों के अनुकूल पौधों का चयन, नियमित निगरानी और दीर्घकालिक संरक्षण की व्यवस्था की गई है।
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पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने अभियान के तहत पौधरोपण किया। उन्होंने कहा कि असोला भट्टी केवल वन क्षेत्र नहीं, बल्कि दिल्ली की महत्वपूर्ण प्राकृतिक धरोहर है। सरकार का लक्ष्य केवल पौधे लगाना नहीं, बल्कि ऐसे आत्मनिर्भर जंगल विकसित करना है जो लंबे समय तक टिके रहें और वन्यजीवों को सुरक्षित आवास उपलब्ध कराएं।
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वन्यजीवों के लिए बनाए गए पानी के 218 कृत्रिम स्रोत
अभयारण्य में वन्यजीवों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 218 वाटर होल (पानी के कृत्रिम स्रोत) विकसित किए गए हैं। इन्हें वन्यजीवों के आवाजाही वाले मार्गों के आसपास बनाया गया है, जहां नियमित रूप से पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि गर्मियों में पानी की कमी वन्यजीवों के लिए बड़ी चुनौती होती है। ऐसे में यह व्यवस्था विभिन्न प्रजातियों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
तेंदुए समेत कई प्रजातियों का है बसेरा
कैमरा ट्रैप और मैदानी निगरानी के दौरान अभयारण्य में तेंदुआ, धारीदार लकड़बग्घा, चीतल, नीलगाय, साही, विभिन्न सरीसृप और अनेक पक्षी प्रजातियों की मौजूदगी दर्ज की गई है। वन विभाग की ओर से पक्षी अवलोकन मार्ग विकसित करने, प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और व्यापक पौधरोपण का काम भी जारी है।
6 लाख पौधे तैयार, नागरिकों को भी दिए जाएंगे
वन विभाग की भारत नर्सरी में करीब छह लाख देसी प्रजातियों के पौधे तैयार किए गए हैं। इनका उपयोग वन क्षेत्र की बहाली, शहरी हरियाली बढ़ाने और नागरिकों को निशुल्क वितरण के लिए किया जाएगा। हाल ही में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अभयारण्य का दौरा कर संरक्षण कार्यों की सराहना की थी। उन्होंने कहा कि प्रकृति और स्वास्थ्य एक-दूसरे से जुड़े हैं। इसी कड़ी में दिल्ली सरकार जुलाई से ‘क्लीन दिल्ली, ग्रीन दिल्ली’ अभियान शुरू करेगी, जिसके तहत राजधानी में 70 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है।