दिल्ली हिंसाः हेट स्पीच में FIR वाली याचिका की सुनवाई टली, हर्ष मंदर से मांगा जवाब

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 04 Mar 2020 02:15 PM IST
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दिल्ली हिंसा (फाइल फोटो)
दिल्ली हिंसा (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

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सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हिंसा के पीड़ितों की याचिका पर सुनवाई करते हुए इसे शुक्रवार तक के लिए टाल दिया है। अदालत ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने इस केस को जिस तरह 13 अप्रैल तक के लिए टाल दिया यह उचित नहीं है। हमारी समझ से इस केस में इतनी देरी न्यायोचित नहीं है और इसकी सुनवाई शुक्रवार को होनी चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने उच्च न्यायालय से राष्ट्रीय राजधानी में दंगों से जुड़े मामलों पर अप्रैल से पहले सुनवाई करने के लिए कहा। याचिका में भाजपा नेता कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर व अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।
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हर्ष मंदर को अपने भाषणों पर दाखिल करना है जवाब
उच्चतम न्यायाल ने यहां संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान नफरत भरा भाषण देने के आरोपों पर कार्यकर्ता हर्ष मंदर से बुधवार को जवाब मांगा। मंदर के कथित नफरती भाषणों की जानकारी केंद्र ने प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे की अध्यक्षता वाली एक पीठ को दी। पीठ ने सॉलीसीटर जनरल तुषार मेहता से इस पहलु पर याचिका दाखिल करने और आरोपों पर मंदर के वकील से जवाब दायर करने को कहा।
गौरतलब है कि इस याचिका में आरोप लगाया गया है कि इन नेताओं के भड़काऊ भाषण देने के कारण ही दिल्ली में हिंसा भड़की। चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष सोमवार को याचिका को तत्काल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था, इस पर कोर्ट ने चार मार्च को सुनवाई करने पर सहमति जता दी थी। 

अदालत में क्या-क्या हुआ
  • सुनवाई शुरू हुई तो याचिकाकर्ता के वकील कोलिन गोंजाल्विस ने याचिका पेश की। तब सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत से कुछ आवश्यक तथ्य कोर्ट के सामने पेश करने की इजाजत मांगी।
  • तब न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि भाषणों का क्या हुआ? यह बेहद गंभीर भाषण हैं जो संसद में दिए गए।
  • इसके बाद एसजी ने हर्ष मंदर का एक वीडियो अदालत में चलाया जिसमें हर्ष कहते सुने गए कि, 'आप लोगों को बुलाया जा रहा है तो आप देश के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाइए। उन्होंने कहा कि हम अपनी इच्छा से भारतीय हैं तो सड़कों पर आइए।'
  • एसजी ने कहा कि यह रिकॉर्ड में है कि दोनों तरफ से भाषणबाजी हुई है। यह नहीं भूलना चाहिए ये लोग अदालत जैसे फोरम पर आरोप लगा रहे हैं।
  • इस पर सीजेआई ने पूछा कि क्या इस वक्त वो स्थिति नहीं है कि एफआईआर फाइल की जा सके। तब एसजी ने पूछा कि हमें इंतजार करना चाहिए क्योंकि भड़काऊ भाषण हर्ष मंदर ने भी दिए हैं।
  • सीजेआई ने मंदर द्वारा लगाए गए आरोपों पर कार्रवाई करने से इनकार कर दिया। 
  • इस पर एसजी ने कहा कि, हैरानी की बात है कि वे चाहते हैं कि हम उन भाषणों का संज्ञान लें जो वे आरोप लगा रहे हैं लेकिन मंदर की वीडियो क्लिप की सत्यता को स्वीकार करने से इनकार कर रहे हैं!
  • तब सीजेआई ने याचिकाकर्ता नंदी से कहा कि वह अपनी सीट पर बैठ जाएं। सीजेआई ने कहा कि हम तब तक आपको नहीं सुनेंगे जब तक आपका आरोप क्या है ये आप हमें नहीं बतातीं।
  • इस पर एसजी ने कहा कि अब इन लोगों ने एक नई याचिका दाखिल कर दी है, जब इन्हें एहसास हुआ कि इन लोगों ने खुद भड़काऊ भाषण दिया है। ये हिंसा पीड़ित लोग प्रायोजित हैं और मंदर ने इन्हें उकसाया है।
  • इस पर सीजेआई ने कहा कि आपका क्या मतलब है कि इन्हें यहां अपील करने का अधिकार नहीं है? आप जो शब्द इस्तेमाल कर रहे हैं उसका ध्यान रखिए। जिन भाषणों की बात आप कर रहे हैं उनका एफिडेविट फाइल करिए, क्या आप करेंगे? तब एसजी बोले कि आज दोपहर दो बजे तक फाइल कर दिया जाएगा।
  • इसके बाद याचिकाकर्ता के वकील कोलिन गोंजाल्विस ने बताया कि कैसे दिल्ली पुलिस की लापरवाही ने दिल्ली हिंसा को बढ़ाया। प्रवेश वर्मा ने जो 'गोली मारो...' वाला नारा दिया था उसने सैकड़ों लोगों को उकसाया। गोंजाल्विस आगे बोले कि हेट स्पीच के साथ ही लोगों को इकट्ठा भी किया जो सच में लोगों को हत्या करने के लिए उकसा रहा है। इन भाषणों के बाद लोग भड़के।
  • इसके बाद अदालत ने कहा कि हम आपको इसलिए सुन रहे हैं क्योंकि आपने कहा था कि दिल्ली हाईकोर्ट आपकी बात नहीं सुन रही। तो आप उस प्वाइंट पर आइए।
  • इस पर एसजी मेहता ने कहा कि गोंजाल्विस बेतुके बयान दे रहे हैं कि '10 लोग रोज मर रहे हैं।' यह बहुत गलत है पूरी तरह से झूठ है। इसके बाद गोंजाल्विस ने सुप्रीम कोर्ट की बेंच को कपिल मिश्रा, अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा की वीडियो दिखाई।
  • गोंजाल्विस ने अदालत में हाईकोर्ट के जस्टिस मुरलीधर और जस्टिस तलवंत सिंह का आदेश भी पढ़ा। इस पर एसजी ने कहा कि यह आदेश पास नहीं होना चाहिए था। यह गलत था।
  • गोंजाल्विस ने आगे कहा कि अगर यह भाषण नहीं दिए जाते तो यह हिंसा नहीं होती। तब सीजेआई बोले कि हमें भी दंगों का अनुभव है। कई बार अगर आप नेताओं को जेल में बंद करते हैं तो दंगे और भड़क जाते  हैं।
  • सीजेआई ने गोंजाल्विस से पूछा क्या आपको मुंबई दंगे याद नहीं हैं? जब नेताओं को जेल में बंद कर दिया गया तो दंगों की हालत और बुरी हो गई थी। आपको हमें बताने की जरूरत नहीं है कि इन भाषणों का क्या प्रभाव था। वह भड़काऊ थे, ये हमें पता चल गया।
  • इस पर गोंजाल्विस बोले कि मेरी परेशानी ये है कि ये नेता आजाद घूम रहे हैं। वह बोले कि अब तक जो कुछ हुआ है वह उससे दुखी हैं। इस पर सीजेआई बीच में बोले, मैं और अधिक निराश हूं! इस आदेश को पारित नहीं किया जाना चाहिए। मुझे हैरानी हुई।
  • एसजी ने कहा कि मैं इस आदेश को चुनौती नहीं दे रहा हूं क्योंकि मैं नहीं चाहता कि चीजें आगे बढ़ें। कहते हैं कि अदालत में “शर्म करो” के नारे लगे! शर्म की बात है, कोर्ट के अंदर ऐसे नारे लगे।
  • एसजी ने इसके बाद बेंच को एक राजनीतिक पार्टी की फोटो दिखाई जो नाजी चिन्ह के साथ थी और कहा कि ऐसा बिल्कुल नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि कोर्ट को इनका संज्ञान लेना चाहिए।
  • तब सीजेआई ने कहा कि हम इस केस के मेरिट पर चर्चा नहीं करेंगे। हमें लगता है कि दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा इतने लंबे समय तक इस केस को टालना न्यायोचित नहीं है। हमें लगता है कि इस केस की सुनवाई शुक्रवार को होनी चाहिए।
  • यद्यपि अदालत एक निषेधाज्ञा आदेश पारित नहीं कर सकती और चीजों की सामान्य योजना की तरह दंगों पर अंकुश नहीं लगा सकती।  
  • सीजेआई ने कहा कि हम दिल्ली हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से अनुरोध करेंगे कि वो इस मामले को शुक्रवार को सुनें। दंगे एक या दो भाषणों से नहीं होते। यह विश्वास करना कठिन है।
  • एसजी ने कहा कि उन्हें रिपोर्ट फाइल करने का समय दिया जाए और सोमवार को इस मामले की सुनवाई हो। हालांकि सीजेआई ने कहा कि दिल्ली दंगा और इससे जुड़े केसों को शुक्रवार को हाईकोर्ट में सुना जाए।
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