Delhi: फर्जी कॉल सेंटर से देते थे सस्ते फोन मुहैया करने का झांसा, दो महीनों में 100 से ज्यादा लोगों को ठगा, तीन गिरफ्तार
आरोपी बुध विहार में फर्जी कॉल सेंटर खोलकर झारखंड और बिहार के लोगों को अपना शिकार बना रहे थे। शुरुआती जांच में पता चला कि गिरोह का सरगना दो माह से कॉल सेंटर चला रहा था और अब तक सौ से अधिक लोगों से ठगी कर चुका है।
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विजय विहार थाना पुलिस ने सस्ते दाम पर फोन मुहैया करवाने के नाम पर ठगी करने वाले एक गैंग का खुलासा किया है। पुलिस ने दो महिलाओं समेत तीन जालसाजों को गिरफ्तार किया है, जबकि वहां काम कर रही एक नाबालिग लड़की को पकड़ा है।
आरोपी बुध विहार में फर्जी कॉल सेंटर खोलकर झारखंड और बिहार के लोगों को अपना शिकार बना रहे थे। शुरुआती जांच में पता चला कि गिरोह का सरगना दो माह से कॉल सेंटर चला रहा था और अब तक सौ से अधिक लोगों से ठगी कर चुका है।
रोहिणी जिला पुलिस उपायुक्त प्रणव तायल ने बताया कि विजय विहार थाना पुलिस को बुध विहार में एक फर्जी कॉल सेंटर चलाने की जानकारी मिली थी। सूचना को पुख्ता करने के बाद पुलिस ने बृहस्पतिवार को बुध विहार फेज एक के सी ब्लॉक में स्थित एक इमारत पर छापा मारा। वहां एक नाबालिग लड़की सहित तीन महिलाएं एक पन्ने पर लिखे स्क्रिप्ट के जरिए लोगों से फोन पर बात कर रही थीं।
पुलिस ने वहां से दो महिलाओं समेत तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया जबकि नाबालिग लड़की को हिरासत में ले लिया। मौके से पुलिस को 9 रजिस्टर, एक नोट पैड, शॉपिंग फॉर विला लिखा हुआ स्टाम्प, एक पासबुक, डिलीवरी के लिए बार कोड के साथ तीन पार्सल, दो बंडल बार कोड, टेप, स्टेपलर, फेविकोल, ग्राहक विवरण सूची, 78 खाली बॉक्स, 60 पैक बॉक्स, एक लैपटॉप और 7 मोबाइल फोन मिले हैं।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बेगमपुर एक्सटेंशन निवासी अरुण कुमार, इंद्रा एन्क्लेव निवासी हेमा और निहाल विहार निवासी शीला के रूप में हुई है। नाबालिग लड़की से पूछताछ करने के बाद पुलिस ने उसे परिजनों के हवाले कर दिया है।
पुलिस अधिकारी ने बताया कि गैंग का सरगना अरुण कुमार है। वह कई कॉल सेंटर में काम कर चुका है। दो माह पहले उसने बुध विहार में अपना कॉल सेंटर खोला। उसने तीन टेलीकॉलर को आठ से दस हजार रुपये पर काम पर रखा था, जो उसकी लिखी स्क्रिप्ट को बोलकर ग्राहकों को ठगी का शिकार बनाती थीं।
लकी ड्रॉ में नाम आने की बात कहकर करते थे ठगी
आरोपी झारखंड और बिहार के लोगों को ठगी का शिकार बनाते थे। टेली कॉलर लोगों को बताती थीं कि वह एमआई कंपनी से बोल रही हैं। लकी ड्रॉ में उनका नाम आया है। कंपनी आपको 18 हजार का फोन 48 सौ में मुहैया करवा रहा है। इनकी बातों पर विश्वास कर हामी भरने वाले लोगों को बताया जाता था कि कंपनी की ओर से उन्हें पोस्टल के मार्फत फोन भेजे जाएंगे। उसके बाद आरोपी बॉक्स में साबून या फिर अन्य सामग्री डालकर लोगों को भेज देते थे। पोस्टमैन पैसे लेने के बाद उन्हें बॉक्स सौंपता था। बॉक्स खोलने पर लोगों को ठगी का एहसास होता था। लेकिन तब तक आरोपियों को पैसा मिल जाता था।