Delhi University: विश्वविद्यालय के छात्रों ने सीखी ओएस्टर मशरूम की खेती, उद्यमी बनकर कमा सकते हैं हजारों
डीयू के स्किल इन्हेंसमेंट कमेटी की चेयरपर्सन व शहीद राजगुरु कॉलेज ऑफ एप्लॉयड साइंस फॉर वूमेन की प्रिंसिपल प्रो. पायल मागो ने बताया कि विवि में छात्रों को कौशल विकास प्रोग्राम कराए जा रहे हैं। ऐसे ही एक प्रोग्राम के तहत छात्रों को पराली पर ओएस्टर मशरूम की खेती करना सिखाया गया है।
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दिल्ली एनसीआर की हवा को दमघोंटू बनानेे वाली पराली ओएस्टर मशरूम उगाने में मददगार बन रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों ने कौशल विकास प्रोग्राम के तहत यह साबित करते दिखाया है। ऐसा करके छात्रों ने न केवल उद्यमी बनने के गुर सीखे, बल्कि पराली को बाद में कैसे उपयोगी बनाया जा सकता है, यह भी सीखा है। इस किस्म के मशरूम की बाजारी कीमत 300 रुपये किलो से 700 रुपये किलो तक होती है।
डीयू के स्किल इन्हेंसमेंट कमेटी की चेयरपर्सन व शहीद राजगुरु कॉलेज ऑफ एप्लॉयड साइंस फॉर वूमेन की प्रिंसिपल प्रो. पायल मागो ने बताया कि विवि में छात्रों को कौशल विकास प्रोग्राम कराए जा रहे हैं। ऐसे ही एक प्रोग्राम के तहत छात्रों को पराली पर ओएस्टर मशरूम की खेती करना सिखाया गया है। इसकी खेती में किसी तरह की दवाई का प्रयोग नहीं किया गया और एक माह में बेहतरीन खेती हो गयी है।
खास बात यह है कि इसकी खेती के लिए जमीन नहीं चाहिए बल्कि पराली एक जगह एकत्र कर इसे उगाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह के कौशल विकास प्रोग्राम के माध्यम से हम छात्रों को उद्यमी बनाने का प्रयास कर रहे हैं, जिससे कि भविष्य में वह इसके माध्यम से रोजगार पाने के साथ-साथ रोजगार देने वाले भी बन सकें।
क्या होता है ओएस्टर मशरूम
ओएस्टर मशरूम को ढींगरी मशरूम के रूप में भी जाना जाता है। झारखंड और बिहार में काफी प्रसिद्ध यह मशरूम खाने में काफी स्वादिष्ट होता है। इसमें भरपूर मात्रा में प्रोटीन, विटामिन डी और माइक्रो पोषक तत्व होते हैं। महंगा होने के कारण इसे एक सीमित वर्ग ही खाना पसंद करता है।
03 लाख रुपये किलो वाला एंटी कैंसर मशरूम उगाने की तैयारी
प्रो. पायल मागो ने बताया कि अब ओएस्टर मशरूम की खेती करने के बाद तीन लाख रुपये किलो वाला मशरूम उगाने की तैयारी कर रहे हैं। इसकी खास बात यह होती है कि यह एंटी कैंसर मशरूम होता है। यह एक खास तरह का मशरूम होता है, जो कैंसर की रोकथाम में उपयोगी माना जाता है। इस तरह की खेती करने के गुर सीखने के बाद कोई भी इसे अपना व्यवसाय भी बना सकता है और किचन गार्डन में भी उगा सकता है।
पराली का समाधान भी मिला
खास बात यह है कि इस कार्यक्रम से पराली नहीं जलाने का समाधान भी इस तरह से मिल गया है। मशरूम उगाने के बाद पराली को बाद में खाद की तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिल सकती है और खुली हवा में सांस लिया जा सकता है। ओएस्टर मशरूम की खेती के विषय में जानकारी नहीं होने के कारण इसकी पैदावार कम होती है। इसी कारण से यह बाजारों में काफी महंगा भी मिलता है।