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दिल्ली: यासीन मलिक समेत सात को मिली थी पाकिस्तान से फंडिंग, अदालत से मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश

Fri, 02 Oct 2026 02:05 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Fri, 02 Oct 2026 02:05 AM IST
सार

आरोपी पाकिस्तान से हवाला चैनलों के जरिए 8.9 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त कर अलगाववादी गतिविधियों और हिंसा को बढ़ावा देने में लगे थे। 

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Delhi: Seven individuals, including Yasin Malik, received funding from Pakistan
यासीन मलिक। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पटियाला हाउस कोर्ट ने प्रतिबंधित जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ) के जेल में बंद प्रमुख यासीन मलिक और छह अन्य आरोपियों पर मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप तय करने का आदेश दिया है। विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने 9 सितंबर को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) की धारा 3 (मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध) और धारा 4 (मनी लॉन्ड्रिंग की सजा) के तहत यासीन मलिक समेत सात आरोपियों पर आरोप तय करने का आदेश दिया। अदालत ने कहा कि आरोपियों के खिलाफ प्रथम दृष्टया मजबूत संदेह मौजूद है।

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अन्य आरोपियों में जहूर अहमद शाह वटाली, अब्दुल रशीद शेख (लोकसभा सांसद इंजीनियर रशीद), शबीर अहमद शाह, नवल किशोर कपूर, मसरत आलम भट और ट्रिसन फ्रम्स एंड कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड शामिल हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का आरोप है कि आरोपी पाकिस्तान से हवाला चैनलों के जरिए 8.9 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्राप्त कर अलगाववादी गतिविधियों और हिंसा को बढ़ावा देने में लगे थे। 
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एजेंसी का दावा है कि आरोपियों ने पाकिस्तानी प्रतिष्ठानों से धन लेकर अपना अलगाववादी एजेंडा फैलाने और विध्वंसक गतिविधियों में लिप्त होने का काम किया। अदालत सूत्रों के अनुसार, 30 सितंबर को आरोपियों को शारीरिक रूप से अदालत में पेश नहीं किया जा सका। इसके बाद न्यायाधीश ने ईडी को निर्देश दिया कि आरोपियों से जेल में ही आरोप पत्र पर हस्ताक्षर करवाए जाएं। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को तय की है।
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यह मामला 2017 के एनआईए के एक मामले से जुड़ा है, जिसमें आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत आपराधिक साजिश समेत कई धाराएं लगाई गई थीं।

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