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Lok Sabha Election: नौ लोकसभा चुनावों में दिल्ली का मतदान राष्ट्रीय औसत से रहा कम, 1989 से गिरावट आनी हुई शुरू

Wed, 27 Mar 2024 04:29 AM IST
विजय पुंडीर धनंजय मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली
धनंजय मिश्रा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: विजय पुंडीर Updated Wed, 27 Mar 2024 04:29 AM IST
सार

जानकारों का कहना है कि दिल्ली में लोग मतदान के लिए कम ही निकलते हैं। आंकड़ों पर अगर नजर डाले तो दिल्ली में ज्यादा गर्मी या बरसात के कारण मतदान पर मौसम के मिजाज का खासा असर पड़ता है। मई में जब भी दिल्ली में चुनाव हुए हैं तो मतदान कम हुआ।

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Delhi's turnout was less than the national average in nine Lok Sabha elections
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Social Media

विस्तार

दिल्ली में मतदान फीसदी बीते नौ लोकसभा चुनावों में राष्ट्रीय मतदान के औसत से कम रहा है। 1989 के लोकसभा चुनाव से मतदान औसत में शुरू हुई गिरावट 2019 के लोकसभा तक बनी रही। इस बार के चुनाव में दिल्ली में मतदान बढ़ा पाना सीईओ कार्यालय के लिए किसी चुनौती से कम नहीं है, क्योंकि मतदान के दौरान एक तो भीषण गर्मी होने की संभावना है। साथ ही, स्कूलों की छुट्टियां भी होंगी। गर्मी की छुट्टियों में काफी संख्या में लोग दिल्ली से बाहर चले जाते हैं। ऐसे में मतदान बढ़ाने के लिए सीईओ कार्यालय को पहले से अधिक प्रयास करने पड़ेंगे।

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जानकारों का कहना है कि दिल्ली में लोग मतदान के लिए कम ही निकलते हैं। आंकड़ों पर अगर नजर डाले तो दिल्ली में ज्यादा गर्मी या बरसात के कारण मतदान पर मौसम के मिजाज का खासा असर पड़ता है। मई में जब भी दिल्ली में चुनाव हुए हैं तो मतदान कम हुआ। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में 10 अप्रैल को मतदान हुआ था तब 65.10 प्रतिशत मतदान हुआ था। वर्ष 2019 में 12 मई को मतदान हुआ था तब 60.6 फीसदी मतदान हुआ था। 2009 में सात मई को मतदान हुआ तब 51.85 फीसदी मतदान हुआ। इस बार दिल्ली में 25 मई को मतदान होगा। तब तक तपिश शुरू हो जाएगी। ऐसे में चुनाव आयोग को मतदान फीसदी बढ़ा पाना आसान नहीं होगा। हालांकि, दिल्ली में अभी मतदान होने में दो माह से अधिक समय है। ऐसे में सीईओ कार्यालय के पास मतदाताओं को जागरूक करने के लिए पर्याप्त समय है।
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मतदान प्रक्रिया को किया गया है आसान
चुनाव आयोग से जुड़े अधिकारी ने बताया कि आयोग ने मतदान बढ़ाने के लिए चुनाव प्रक्रिया को काफी आसान किया है। मतदाताओं को चुनाव से संबंधित सभी सेवाएं मोबाइल पर उपलब्ध हैं। मतदान से पहले बीएलओ पर्ची घर पहुंचा देते हैं, ताकि मतदान केंद्र पर पहुंचकर पर्ची के लिए मतदाताओं को किसी तरह की परेशानी न हो। वोटर हेल्पलाइन एप से पर्ची डाउनलोड करने की सुविधा है। फिर भी मतदान केंद्र पर हेल्प डेस्क होती है, जहां पर्ची उपलब्ध कराई जाती है। बुजुर्ग मतदाताओं को घर से मतदान की सुविधा है। मतदाता पहचान पत्र से पंजीकृत मोबाइल नंबर पर मैसेज भेजकर मतदान के लिए प्रेरित किया जाता है। मतदान के दिन भी रिमाइंडर भेजा जाता है। तमाम माध्यम अपनाए जा रहे हैं।
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मतदान प्रतिशत बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत
जानकारों का कहना है कि राष्ट्रीय राजधानी में मतदान फीसदी कम होने में सिर्फ मौसम का मिजाज नहीं प्रभावित करता, बल्कि अन्य कई कारण भी हो सकते हैं। कई मामलों में देखा गया है कि वीवीआईपी इलाकों में मतदान बेहद कम हाेता है। ऐसे में यह जरूरी है कि चुनाव के समय ही नहीं, बल्कि लगातार मतदाता जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया जाएं। स्कूलों, कॉलेज और आरडब्ल्यूए से संवाद करें। उन्हें लोकतंत्र में मतदान कितना महत्वपूर्ण विषय है, उसके बारे में बताया जाए। चुनाव आने से कुछ महीने पहले जागरूकता कार्यक्रम पर जोर दिया जाता है जो ठीक नहीं है।

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