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दिल्ली दंगा: नताशा नरवाल को जेएनयू में पीएचडी के लिए प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन की मंजूरी मिली
Fri, 23 Jul 2021 12:27 PM IST
पूजा त्रिपाठी
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Fri, 23 Jul 2021 12:27 PM IST
सार
नरवाल की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अजीत पुजारी ने कहा कि जेएनयू ने अपने 18 मई के जवाबी हलफनामे में कहा था कि जेल से बाहर होने के बाद वह नरवाल के अनुरोध पर विचार करेगा।
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- फोटो : पीटीआई
विस्तार
दिल्ली दंगों की आरोपी और पिंजरा तोड़ संगठन की कार्यकर्ता नताशा नरवाल को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पीएचडी कार्यक्रम के लिए प्रोविजनल रजिस्ट्रेशन की मंजूरी दे दी गई है। जेएनयू प्रशासन ने हाईकोर्ट को यह जानकारी दी।
न्यायमूर्ति प्रतीक जालान के समक्ष जेएनयू की ओर से पेश अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने बताया कि नरवाल को मानसून और शीतकालीन सेमेस्टरों के लिए सेंटर फॉर हिस्टोरिक स्टडीज में प्रोविजनल रूप से पंजीकृत किया गया है।
अदालत नरवाल की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें उसने जेएनयू को उसे प्रवेश देने और विश्वविद्यालय में खुद को पंजीकृत करने के लिए लॉगिन आईडी और पासवर्ड जारी करने का निर्देश देने का आग्रह किया है।
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नरवाल की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अजीत पुजारी ने कहा कि जेएनयू ने अपने 18 मई के जवाबी हलफनामे में कहा था कि जेल से बाहर होने के बाद वह नरवाल के अनुरोध पर विचार करेगा।
नरवाल दंगों के सिलसिले में जेल में बंद है। इससे पहले हाई कोर्ट ने उसे 15 जून को जमानत प्रदान की थी। अदालत ने याचिका का निपटारा करतते हुए कहा कि याची की मांग को स्वीकार कर लिया गया है। ऐसे में कोई अन्य आदेश देने की जरूरत नहीं है।
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न्यायमूर्ति प्रतीक जालान के समक्ष जेएनयू की ओर से पेश अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा ने बताया कि नरवाल को मानसून और शीतकालीन सेमेस्टरों के लिए सेंटर फॉर हिस्टोरिक स्टडीज में प्रोविजनल रूप से पंजीकृत किया गया है।
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अदालत नरवाल की उस याचिका पर सुनवाई कर रही है जिसमें उसने जेएनयू को उसे प्रवेश देने और विश्वविद्यालय में खुद को पंजीकृत करने के लिए लॉगिन आईडी और पासवर्ड जारी करने का निर्देश देने का आग्रह किया है।
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नरवाल की ओर से पेश हुए अधिवक्ता अजीत पुजारी ने कहा कि जेएनयू ने अपने 18 मई के जवाबी हलफनामे में कहा था कि जेल से बाहर होने के बाद वह नरवाल के अनुरोध पर विचार करेगा।
नरवाल दंगों के सिलसिले में जेल में बंद है। इससे पहले हाई कोर्ट ने उसे 15 जून को जमानत प्रदान की थी। अदालत ने याचिका का निपटारा करतते हुए कहा कि याची की मांग को स्वीकार कर लिया गया है। ऐसे में कोई अन्य आदेश देने की जरूरत नहीं है।