बारिश में क्यों न डूबे दिल्ली, पीडब्ल्यूडी ने नालों से 50 फीसदी सिल्ट की भी नहीं की सफाई
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शनिवार-रविवार रात की तीन घंटे की बारिश में ही दिल्ली के कई इलाके भारी जलभराव के कारण पानी में डूब गए। इनमें चार लोगों की दुखद मौत भी हो गई। दिल्ली में बाढ़ जैसी स्थिति के लिए यहां के नालों से सिल्ट (गाद) न निकालने को बड़ा जिम्मेदार माना गया। प्राप्त आंकड़ों से पुष्टि हुई है कि पीडब्ल्यूडी विभाग ने पूर्वी दिल्ली में सिल्ट निकालने के निर्धारित लक्ष्य का आधा काम भी पूरा नहीं किया जिसके कारण दिल्ली के अनेक इलाकों में बाढ़ का पानी सड़कों पर फैल गया। अन्य इलाकों में भी पीडब्ल्यूडी विभाग के काम पूरा न करने का आरोप है।
पूर्वी दिल्ली नगर निगम में पूर्व स्टैंडिंग कमेटी के अध्यक्ष संदीप कपूर ने बताया कि दिल्ली में 60 फुट से कम चौड़ी सड़कों के किनारे बने नालों की साफ-सफाई की जिम्मेदारी नगर निगमों की होती है। पूर्वी दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत 223 बड़े नाले आते हैं। इनकी कुल लंबाई 123.67 किमी है। इनमें निश्चित लक्ष्य से 117.22 फीसदी अधिक गाद निकाली गई है। निगम ने इस वर्ष 49,660 मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन 19 जुलाई तक निगम ने अपने लक्ष्य से आगे बढ़कर 58,209 मीट्रिक टन गाद निकालने का काम किया है।
लेकिन फेल रही पीडब्लयूडी, दिल्ली सरकार
अकेले पूर्वी दिल्ली क्षेत्र के लिए ही पीडब्ल्यूडी ने 75 हजार मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य निर्धारित किया था। लेकिन 19 जुलाई तक पीडब्ल्यूडी विभाग ने केवल 34,650 मीट्रिक टन सिल्ट निकालने का ही काम किया है। यह तय लक्ष्य से आधे से भी कम है।
वहीं, सिचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने भी अपने लक्ष्य के मुताबिक काम नहीं किया है। विभाग ने अपने लिए एक लाख 75 हजार मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य निर्धारित किया था, लेकिन अब तक वह केवल एक लाख 35 हजार 120 टन गाद निकालने में ही सफल हो सका है।
बाकी जगह भी अच्छा काम न होने का आरोप
उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर जय प्रकाश ने बताया कि उनके अधिकार क्षेत्र में आने वाले नालों में साफ-सफाई का काम पूरा कर लिया गया है। उनके अधिकार क्षेत्र में 192 बड़े नाले आते हैं। दक्षिणी दिल्ली नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में कुल 243 बड़े नाले आते हैं। यहां भी लगभग सौ बड़े नालों से गाद निकालने का काम पूरा कर लिया गया है।
जय प्रकाश का आरोप है कि नगर निगमों ने अपना काम पूरा किया है, लेकिन दिल्ली सरकार के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल केवल प्रचार के जरिए लोकप्रियता हासिल करना चाहते हैं, लेकिन काम नहीं करना चाहते। यही कारण है कि उनके अंतर्गत आने वाली पीडब्ल्यूडी ने काम नहीं किया जिसका खामियाजा दिल्ली वालों को भुगतना पड़ रहा है।
राजधानी में तीनों नगर निगमों को मिलाकर कुल 20,159 छोटे-बड़े नाले हैं। इनमें 721 बड़े (चार फीट से अधिक चौड़े) और 19,438 छोटे (चार फीट चौड़ाई से कम) नाले हैं।
दिल्ली जलबोर्ड ने किया बचाव
दिल्ली जल बोर्ड के उपाध्यक्ष राघव चड्ढा ने रविवार को कहा कि नालों की सफाई का काम किया गया है, लेकिन कोरोना की प्राथमिकता के कारण विभाग के कुछ कर्मचारियों को अन्य महत्त्वपूर्ण जगहों पर लगाना पड़ा। इसके कारण कुछ जगहों पर गाद निकालने का काम अपेक्षा के अनुरूप नहीं हो पाया है। इसे जल्दी ही पूरा किया जायेगा।
पीडब्ल्यूडी की जिम्मेदारी सबसे ज्यादा
अगर सड़कों की लंबाई के लिहाज से कहें तो नालों की साफ-सफाई के मामले में पीडब्ल्यूडी की भूमिका बेहद महत्त्वपूर्ण है। 60 फीट से अधिक चौड़ी सड़कों के दोनों ओर बने नालों की साफ़-सफाई का काम पीडब्ल्यूडी का है। आंकड़े बताते हैं कि पीडब्ल्यूडी अपने लक्ष्य का आधा काम भी पूरा नहीं कर सका है। शहर में पीडब्ल्यूडी के अधिकार क्षेत्र में 1259 किमी सड़कें हैं। इनके किनारे 2518 किमी लंबाई में बने नालों की साफ-सफाई की जिम्मेदारी पीडब्ल्यूडी विभाग की है।
दिल्ली के अंदर सबसे बड़े नालों की साफ-सफाई का काम बाढ़ एवं नियंत्रण विभाग का होता है। जानकारी के मुताबिक 45 सबसे बड़े नाले बाढ़ एवं सिंचाई विभाग के अंतर्गत आते हैं। इनमें यमुना पार इलाके में 11, पश्चिमी दिल्ली में 13, उत्तरी दिल्ली में 17 और दक्षिणी दिल्ली में चार नाले आते हैं। इनकी कुल लंबाई 295 किमी है।