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Delhi Pollution: प्रदूषण के साथ बढ़ी सांस की तकलीफ, दिल भी हो रहा कमजोर, अस्पतालों में बढ़े मरीज

Sun, 30 Oct 2022 10:55 PM IST
अनुराग सक्सेना अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: अनुराग सक्सेना Updated Sun, 30 Oct 2022 10:55 PM IST
सार

एम्स दिल्ली में पल्मोनोलॉजी के पूर्व विभागप्रमुख प्रोफेसर डॉ. जीसी खिलनानी ने बताया कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के साथ ही मरीजों में कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इनमें एंटीबायोटिक्स और कफ सिरप से भी सुधार नहीं आ रहा है।

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Delhi Pollution: Breathlessness increases with pollution patients increase in hospitals
दिल्ली में प्रदूषण - फोटो : ANI-फाइल फोटो

विस्तार

दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के साथ सांस के साथ दिल के मरीजों की समस्याएं बढ़ने लगी हैं। ज्यादातर मरीज लगातार खांस रहे हैं। इसके अलावा सांस में तकलीफ, बिना इंफेक्शन और बुखार के बावजूद कमजोरी महसूस हो रही हैं।

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कुछ ऐसे मरीज भी हैं, जिन्हें पहले कभी कोई सांस की बीमारी नहीं थी और वे गले में खराश, नाक बहना, सीने में जकड़न, सांस लेने में कठिनाई और घरघराहट (अस्थमा के रोगी की तरह) की शिकायत कर रहे हैं। एंटीबायोटिक्स और कफ सिरप लेने के बाद भी इन रोगियों में सुधार नहीं हो रहा। इस कारण अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
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इस संबंध में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली में पल्मोनोलॉजी के पूर्व विभागप्रमुख प्रोफेसर डॉ. जीसी खिलनानी ने बताया कि दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के साथ ही मरीजों में कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इनमें एंटीबायोटिक्स और कफ सिरप से भी सुधार नहीं आ रहा और इनहेलर और कभी-कभी नेबुलाइजेशन तक देना पड़ रहा है।
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उन्होंने बताया कि वायु प्रदूषण मुख्य रूप से फेफड़ों को प्रभावित करता है। साथ ये दिल के दौरे, स्ट्रोक (लकवा) और कैंसर के लिए भी कारण बनता है। प्रदूषण के कारण नाक, गले, आंख या त्वचा में जलन जैसी परेशानी होती है। साथ ही सिर दर्द, चक्कर आना और जी मिचलाना जैसे कारण बनते हैं। इसके अलावा सांस की बीमारी, अस्थमा का बढ़ना, न्यूमोनिया, फेफड़ों का कैंसर, हर्ड अटैक व ब्रेन स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देते हैं। इससे बचने के लिए कोशिश करनी चाहिए कि प्रदूषण वाले क्षेत्र में न जाएं। मास्क का प्रयोग करें।

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