Delhi: पत्रकार को साइबर अपराधी समझ पुलिस ने रोका, आईडी दिखाने के बाद भी जबरन कार से निकाला बाहर; अब मांगी माफी
दिल्ली पुलिस ने नोएडा के पत्रकार राहुल शाह को साइबर अपराधी समझकर गलत तरीके से रोका, जिसके बाद वायरल वीडियो और विवाद के बीच पुलिस ने माफी मांगी। पत्रकार ने पुलिस के दावों का खंडन करते हुए कहा कि उन्होंने सभी पहचान पत्र दिखाए थे।
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विस्तार
दिल्ली पुलिस ने नोएडा के एक पत्रकार राहुल शाह को गलत पहचान के आधार पर आपराधिक मामले में संदिग्ध समझकर रोका, जिसके बाद पुलिस ने माफी मांगी। यह घटना 19 जून को नोएडा के सेक्टर 38 में एक पेट्रोल पंप पर हुई, जहां पुलिस ने पत्रकार को साइबर अपराधी समझकर उनकी कार से बाहर निकाला। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने औपचारिक माफी जारी की।
पुलिस की कार्रवाई और गलत पहचान
दिल्ली पुलिस के बयान के अनुसार, बाहरी दिल्ली के प्रेम नगर पुलिस स्टेशन की एक टीम भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) (मूल्यवान सुरक्षा से जुड़ी धोखाधड़ी) और 61(2) (आपराधिक साजिश) के तहत दर्ज एक मामले की जांच कर रही थी। पुलिस उपायुक्त (शाहदरा) प्रशांत गौतम ने बताया कि टीम बहादुरगढ़ निवासी एक संदिग्ध राहुल की मोबाइल लोकेशन ट्रैक कर रही थी। सिग्नल के आधार पर टीम नोएडा के सेक्टर-38 में एक पेट्रोल पंप पर पहुंची, जहां उन्हें पत्रकार राहुल शाह अपनी पत्नी के साथ कार में मिले।
पुलिस और राहुल में हुई बहस
डीसीपी गौतम ने कहा, 'चेहरे की विशेषताओं और नाम में समानता के कारण भ्रम की स्थिति पैदा हुई। जब पुलिस ने पहचान पत्र मांगा तो व्यक्ति ने कथित तौर पर इसे दिखाने से इनकार कर दिया और बहस शुरू हो गई।' हालांकि, बाद में व्यक्ति ने खुद को नोएडा के पत्रकार राहुल शाह के रूप में बताया। पुलिस ने गलती का एहसास होने पर माफी मांगी और जांच को आगे बढ़ाया।
पुलिस ने जबरन कार से बाहर निकाला
पत्रकार राहुल शाह ने पुलिस के दावे का खंडन करते हुए कहा कि उन्होंने और उनकी पत्नी ने आधार कार्ड, पैन कार्ड और प्रेस आईडी सहित सभी पहचान पत्र दिखाए थे। शाह ने पीटीआई से कहा, 'पुलिस ने हमारी कोई दलील नहीं सुनी और मुझे मेरी बेल्ट से पकड़कर जबरन कार से बाहर निकाला। मेरी पत्नी, जो एक पत्रकार हैं उन्होंने घटना का वीडियो बनाया, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।'
पुलिस ने बिना उचित सत्यापन के कार्रवाई की
शाह ने अपने बयान में कहा, '19 जून को सेक्टर-38 के पेट्रोल पंप पर ईंधन भरते समय, दिल्ली पुलिस के तीन अधिकारियों ने मुझे गलत तरीके से पकड़ लिया। वे 'राहुल' नामक एक साइबर अपराधी की तलाश कर रहे थे और सिर्फ नाम के मिलान के आधार पर मुझे कार से बाहर खींचकर एक निजी गाड़ी में जबरन डालने की कोशिश की।' उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी ने भी अपना आधिकारिक पहचान पत्र दिखाया, लेकिन पुलिस ने बिना उचित सत्यापन के कार्रवाई की।
पुलिस का माफीनामा
पुलिस ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए कहा कि कोई दुर्व्यवहार या बल प्रयोग नहीं किया गया। डीसीपी गौतम ने बताया, 'जैसे ही पुष्टि हुई कि व्यक्ति संदिग्ध नहीं है, टीम ने खेद व्यक्त किया और बातचीत से हट गई।' इस घटना का एक आंतरिक नोट बनाया गया है और कोई आगे की कार्रवाई नहीं की जा रही है।
सोशल मीडिया पर हंगामा
घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ा। वीडियो में पत्रकार और उनकी पत्नी को पुलिस से बहस करते और अपनी पहचान साबित करने की कोशिश करते देखा जा सकता है। इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, खासकर संदिग्धों की पहचान और सत्यापन की प्रक्रिया को लेकर।
पुलिस ने कहा कि वे मूल मामले की जांच जारी रखेंगे, लेकिन पत्रकार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस घटना ने एक बार फिर पुलिस और जनता के बीच विश्वास की कमी को उजागर किया है। पत्रकार राहुल शाह ने इस मामले में उचित कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।