दिल्ली स्पेशल सेल ने मुठभेड़ के बाद तीन शार्प शूटरों को दबोचा, बाल-बाल बचा इंस्पक्टर
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दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने बुधवार तड़के हुई मुठभेड़ के बाद गैंगस्टर संदीप उर्फ ढिलू गिरोह के तीन शार्प शूटरों को गिरफ्तार किया है। दो बदमाशों को गोली लगी है। दिल्ली पुलिस का इंस्पेक्टर बाल-बाल बच गया। बदमाशों की गोली इंस्पेक्टर की छाती में लगी, मगर बुलेट प्रूफ जैकेट पहने होने के कारण वह बच गए। मौके पर दोनों तरफ से चार-चार गोलियां चली थीं। संदीप उर्फ ढिलू कारोबारियों से जबरन उगाही करता है।
स्पेशल सेल के डीसीपी संजीव कुमार यादव के अनुसार, 19 फरवरी, 2018 को संदीप उर्फ ढिलू को उसके साथी मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से पुलिस कस्टडी से छुड़ाकर ले गए थे। आरोपियों ने पुलिसकर्मियों की आंख में लाल मिर्च का पाउडर डाल दिया था। संदीप को यहां इलाज के लिए लाया गया था।
संदीप को पकड़ने के लिए एसीपी संजय दत्त की टीम को जिम्मेदारी दी गई। टीम को सूचना मिली कि गिरोह के सुरजीत उर्फ पोलू और प्रमोद उर्फ सोनू संदीप से मिलेंगे। इसके बाद फिर सूचना मिली कि सुरजीत और प्रमोद ने अन्य बदमाशों के साथ दक्षिण दिल्ली में अपने ठिकाने बनाए हुए हैं और वह होंडा एकोर्ड कार से झज्जर जाएंगे।
संदीप उर्फ ढिलू उनके साथ हो सकता है। ये वापस डासना-नजफगढ़ रोड से आएंगे। एसीपी संजय दत्त के नेतृत्व में टीम ने यहां घेराबंदी की। पुलिस टीम ने कार को रुकने का इशारा किया तो कार सवार बदमाशों ने पुलिस टीम पर गोली चला दी।
एक गोली इंस्पेक्टर तिलकचंद बिष्ट की छाती में लगी। बुलेट प्रूफ जैकेट के चलते वे बाल-बाल बच गए। जवाबी कार्रवाई में पुलिस टीम ने भी गोली चलाई। रामगोपाल कॉलोनी, रोहतक (हरियाणा) निवासी सुरजीत उर्फ पोलू को हाथ में और बवाना निवासी प्रमोद उर्फ सोनू को पैर में गोली लगी। दोनों को पकड़ लिया गया।
दोनों को जाफरपुर कलां स्थित अस्पताल में भर्ती कराया गया। तीसरे बदमाश बवाना निवासी निशांत उर्फ निशू ने सरेंडर कर दिया। इनके कब्जे से .32 बोर की पिस्टल, 9 एमएम की पिस्टल, .315 बोर का कट्टा और दस कारतूस बरामद किए गए हैं।
गिरोह में सरदार के रूप में जाना जाता था
सुरजीत गिरोह में सरदार के रूप में जाना जाता था। वह संदीप का 20 वर्ष से दोस्त है। ये हत्या के प्रयास में वर्ष 2000 में गिरफ्तार हुआ था। जेल में उसकी संदीप से मुलाकात हुई। संदीप ने जेल में उसकी सहायता की थी। इससे दोनों दोस्त बन गए। ये संदीप के कहने पर दिल्ली और हरियाणा में कारोबारियों से उगाही करता था और नए लड़कों को गिरोह में शामिल होने के लिए प्रेरित करता था।
सुरजीत संदीप से आगे की रणनीति के लिए महीने में एक बार जरूर मिलता था। प्रमोद दीपक उर्फ भांजा और संजय कैरा के जरिये संदीप के संपर्क में आया था। प्रमोद ने मौलाना आजाद कॉलेज से संदीप को छुड़ाने में सहायता की थी। इसने 18 जुलाई, 2019 को बवाना के एक व्यवसायी से 50 लाख रुपये की रंगादारी मांगी थी।