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पुलिस बोली, बल प्रयोग के लिए मजबूर किया गया, दिल्ली पुलिस ने बस में आग नहीं लगाई
Mon, 16 Dec 2019 10:19 PM IST
Avdhesh Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Mon, 16 Dec 2019 10:19 PM IST
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फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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जामिया नगर इलाके में हुई हिंसा के बाद दिल्ली पुलिस ने सोमवार दोपहर सफाई दी कि पुलिस को बल प्रयोग के लिए मजबूर किया गया। भीड़ पुलिस को उकसा रही थी। इसके प्रदर्शन में जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के छात्रों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी शामिल थे।
पुलिस का कहना है कि उनके जवान कैंपस में नहीं घुसे थे। हां, उपद्रवियों का पीछा करते हुए जरूर उनको पकड़ने गई थी, लेकिन कोई तोड़ फोड़ नहीं की। हिंसा की वजह से किसी की जान नहीं गई है। पुलिस ने छात्रों से कहा कि वे किसी के बहकावे में न आएं।
दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता मंदीप सिंह रंधावा ने कहा कि जामिया मिल्लिया में 13 दिसंबर से प्रदर्शन शुरू हुआ था। 13 व 14 दिसंबर को छात्रों पर हल्काबल प्रयोग कर पीछे धकेल दिया था, लेकिन रविवार दोपहर प्रदर्शन कर छात्र सराय जुलैना तक आ गए थे। शाम साढ़े चार बजे प्रदर्शनकारियों ने रूट बदला और माता मंदिर चौक रोड पर पहुंच गए। यहां बसों में आग लगा दी गई और तोड़फोड़ की गई।
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प्रदर्शनकारियों ने माता मंदिर चौक के अलावा मथुरा रोड पर आगजनी की और पथराव किया। ट्यूब लाइट व पेट्रोल बम फेंके गए। सराय जुलैना के पास अस्पताल पर पथराव किया गया। प्रदर्शनकारियों ने डीटीसी की चार बसों में आग लगा दी। पुलिस की मोटरसाइकिलों समेत 100 ज्यादा प्राइवेट वाहनों में तोड़फोड़ व आगजनी की।
डीसीपी, एसीपी व थानाध्यक्ष समेत 30 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। एक पुलिसकर्मी आईसीयू में है। 39 प्रदर्शनकारी छात्रों की एमएलसी बनी है, जिन छात्रों व प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था उन्हें रात में छोड़ दिया गया था। आरोपियों की पहचान की जा रही है, उनको बख्शा नहीं जाएगा। बच्चों को डर व चिंता करने की जरूरत नहीं है।
पुलिस ने बस में आग नहीं लगाई
पुलिसकर्मियों द्वारा बस में खुद आग लगाने के आरोपों पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने बस में आग नहीं लगाई। पुलिस ने आग को बुझाया था। उन्होंने कहा कि जिस बस में पुलिसकर्मियों द्वारा आग लगाने की बात कही जा रही है उस बस में आग लगी ही नहीं।
जामिया नगर में माहौल को शांत करने के लिए स्थानीय नेताओं व प्रतिष्ठित लोगों से बात की जा रही है। सीनियर पुलिस अधिकारियों की एनएफसी थाने में बातचीत हुई है।
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पुलिस का कहना है कि उनके जवान कैंपस में नहीं घुसे थे। हां, उपद्रवियों का पीछा करते हुए जरूर उनको पकड़ने गई थी, लेकिन कोई तोड़ फोड़ नहीं की। हिंसा की वजह से किसी की जान नहीं गई है। पुलिस ने छात्रों से कहा कि वे किसी के बहकावे में न आएं।
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दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता मंदीप सिंह रंधावा ने कहा कि जामिया मिल्लिया में 13 दिसंबर से प्रदर्शन शुरू हुआ था। 13 व 14 दिसंबर को छात्रों पर हल्काबल प्रयोग कर पीछे धकेल दिया था, लेकिन रविवार दोपहर प्रदर्शन कर छात्र सराय जुलैना तक आ गए थे। शाम साढ़े चार बजे प्रदर्शनकारियों ने रूट बदला और माता मंदिर चौक रोड पर पहुंच गए। यहां बसों में आग लगा दी गई और तोड़फोड़ की गई।
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प्रदर्शनकारियों ने माता मंदिर चौक के अलावा मथुरा रोड पर आगजनी की और पथराव किया। ट्यूब लाइट व पेट्रोल बम फेंके गए। सराय जुलैना के पास अस्पताल पर पथराव किया गया। प्रदर्शनकारियों ने डीटीसी की चार बसों में आग लगा दी। पुलिस की मोटरसाइकिलों समेत 100 ज्यादा प्राइवेट वाहनों में तोड़फोड़ व आगजनी की।
डीसीपी, एसीपी व थानाध्यक्ष समेत 30 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। एक पुलिसकर्मी आईसीयू में है। 39 प्रदर्शनकारी छात्रों की एमएलसी बनी है, जिन छात्रों व प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था उन्हें रात में छोड़ दिया गया था। आरोपियों की पहचान की जा रही है, उनको बख्शा नहीं जाएगा। बच्चों को डर व चिंता करने की जरूरत नहीं है।
पुलिस ने बस में आग नहीं लगाई
पुलिसकर्मियों द्वारा बस में खुद आग लगाने के आरोपों पर दिल्ली पुलिस ने कहा कि दिल्ली पुलिस ने बस में आग नहीं लगाई। पुलिस ने आग को बुझाया था। उन्होंने कहा कि जिस बस में पुलिसकर्मियों द्वारा आग लगाने की बात कही जा रही है उस बस में आग लगी ही नहीं।
जामिया नगर में माहौल को शांत करने के लिए स्थानीय नेताओं व प्रतिष्ठित लोगों से बात की जा रही है। सीनियर पुलिस अधिकारियों की एनएफसी थाने में बातचीत हुई है।