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दिल्ली दंगा: पुलिस का दावा, लोगों को लामबंद करने और हिंसा के लिए चुनी थी खास जगह

Wed, 23 Sep 2020 05:16 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 23 Sep 2020 05:16 AM IST
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Delhi Police claim rioters chosen special place to mobilize people and violence
delhi violence - फोटो : जी पॉल

दिल्ली दंगों के मुख्य साजिशकर्ताओं ने खास आर्थिक, सामाजिक तथा घनी आबादी को ध्यान में रखते हुए लोगों की लामबंद व हिंसा के लिए उत्तर पूर्वी दिल्ली को चुना था। यह दावा दिल्ली दंगों के सिलसिले में दाखिल आरोप पत्र में दिल्ली पुलिस की ओर से किया गया है।

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दिल्ली पुलिस का दावा है कि इस इलाके को इसलिए चुना गया क्योंकि यह दक्षिण पूर्वी दिल्ली के मुकाबले कहीं ज्यादा संवेदनशील है जबकि साजिशकर्ता पॉश कालोनियों के आलीशन घरों में टीवी सैट के सामने सुरक्षित बैठे रहे और दंगों की आंच रोज मेहनत कर रोजी रोटी कमाने वालों पर आई। 
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दिल्ली पुलिस की ओर से 16 सितंबर को दाखिल आरोपपत्र में कई गवाहों के बयानों का हवाला देते हुए यह भी कहा गया कि स्थानीय निवासियों के विरोध के बावजूद उत्तर पूर्वी दिल्ली को लोगों को जमा करने के लिए चुना गया।
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धरनों के लिए मुस्लिम बहुल इलाकों को चुनना, दूसरे समुदाय की कालोनियों की ओर जाने वाली सड़कों से उन स्थानों की नजदीकी तथा कोर सदस्यों द्वारा निगरानी रखे जाने से इस बात में कोई शक नहीं है कि इस सब का मकसद अधिकतम मजहबी तनाव, तोड़फोड़ तथा नुकसान करना था, इसकी शुरुआत डिजीटल मीडिया के खास गुट द्वारा पहले इसे हवा दिया जाना था।

पुलिस का कहना है कि साजिशकर्ता इन स्थानों से दूर अपने आलीशन घरों में बैठ कर जनसंचार के माध्यमों का प्रयोग कर रहे थे ताकि उन्हें घटनास्थल पर मौजूद न होने का कानूनी लाभ मिले और उन पर कोई बात भी न आए।

इसके अलावा पुलिस का यह भी अनुमान है कि दिसंबर 2019 हिंसा के हॉटस्पॉट को फरवरी 2020 में दोहराया गया था। इन दोनों स्थानों पर अपराधियों ने पहले भड़काऊ भाषण से लोगों को भड़काना तथा उसके बाद चक्का जाम तथा हिंसा का हथकंडा अपनाया था। जिनकी भूमिका फरवरी 2020 के दंगों में रही, उनमें से ज्यादातर लोग दिसंबर 2019 की हिंसा में भी नजर आए थे। 

हालांकि इन दोनों मामलों में यह फर्क था कि दिसंबर 2019 में जामिया तथा शाहीन बाग में भारी हिंसा हुई थी जबकि फरवरी 2020 में इस इलाके को नहीं छुआ गया था। इसके अलावा दिसंबर 2019 की घटनाओं के विरोध के लिए स्थानीय तथा बाहरी महिलाओं तथा बच्चों का प्रयोग फरवरी 2020 में प्रदर्शनों में किया गया। दिसंबर 2019 की हिंसा से साजिशकर्ताओं ने काफी कुछ सीखा था। यह कहा जा सकता है कि फरवरी 2020 के दंगे एक तरह से दिसंबर 2019 की पुनरावृत्ति थे।
 

विरोध को सेक्युलर चेहरा देने के लिए बनाया गया था व्हाट्सएप ग्रुप

दंगों की साजिश से जुड़े एक शख्स ने विरोध प्रदर्शन को सेक्युलर चेहरा देने के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाने का काम किया था ताकि इसमें सिविल सोसाइटी के अधिक से अधिक लोग शामिल हों। यह दावा दिल्ली पुलिस ने दंगों की साजिश के सिलसिले में दाखिल आरोप पत्र में किया है। 

उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगे सुनियोजित थे और 24 फरवरी की शाम से जामिया कॉर्डीनेशन कमेटी (जेसीसी) के सदस्यों की ओर से होने वाली संचार के तेवर बदल गए थे। वह एक ओर पीड़ितों के पुनर्वास तथा राहत की बात कर रहे थे तो वहीं दूसरी ओर सरकार, पुलिस तथा भाजपा को जान माल के नुकसान का जिम्मेदार बताते हुए भ्रामक संदेश फैला रहे थे। 

दिल्ली पुलिस का दावा है कि साजिशकर्ताओं ने भड़काऊ भाषणों की असलियत छिपाने के लिए राष्ट्रवाद की लुभावनी बातों का इस्तेमाल किया था जबकि उनका मुख्य मकसद खास समुदाय को भड़काना तथा उसका दबदबा कायम करना था। इसके लिए दिल्ली प्रोटेस्ट सपोर्ट ग्रुप नाम से व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया था।

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