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दिल्ली: वैवाहिक साइबर धोखाधड़ी रैकेट का खुलासा, पुलिस ने मास्टरमाइंड वकील समेत 10 दबोचे
Tue, 15 Sep 2026 11:56 AM IST
Vijay Singh Pundir
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Tue, 15 Sep 2026 11:56 AM IST
सार
उपनिरीक्षक गौरव शर्मा की टीम ने 4 सितंबर को आगरा में जया शाक्य को गिरफ्तार किया, जो कागजों में फर्म की मालिक थी। पूछताछ में अमित कुमार की भूमिका सामने आई, जिसने खुद को कानूनी सलाहकार बताकर धोखाधड़ी से दूरी बनाने की कोशिश की। पुलिस ने 8 सितंबर को अमित कुमार को आगरा से गिरफ्तार कर लिया।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
दिल्ली पुलिस की मध्य जिला पुलिस ने आगरा से संचालित एक बड़े वैवाहिक साइबर धोखाधड़ी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में मास्टरमाइंड वकील अमित कुमार, ऑन-बोर्ड मैनेजर जया शाक्य और आठ महिला टेली-कॉलर को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस का अनुमान है कि इस गिरोह ने देशभर में हजारों लोगों को ठगा है।
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पुलिस उपायुक्त रोहित राजबीर ने बताया कि अन्य गिरफ्तार महिला टेली-कॉलर में ज्योति कुमारी, रश्मि, मेघना पाराशर, पद्मा, आशिका और करिश्मा शर्मा शामिल हैं। जांच के दौरान सात डेस्कटॉप सीपीयू, 47 मोबाइल फोन, 50,000 रुपये नकद और एक एसयूवी बरामद की गई है। यह गिरोह ‘एमएस शादी पार्टनर कॉम’ नाम से एक नकली मैचमेकिंग सेवा चला रहा था। यह फर्म एमएसएमई और यूपी लेबर डिपार्टमेंट के तहत पंजीकृत थी, जिसके नाम पर बैंकिंग चैनल और सिम कार्ड खरीदे गए थे। एक पीड़ित की शिकायत के बाद जांच शुरू हुई, जिसे वेबसाइट के जरिये 15,000 रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया था।
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उपनिरीक्षक गौरव शर्मा की टीम ने 4 सितंबर को आगरा में जया शाक्य को गिरफ्तार किया, जो कागजों में फर्म की मालिक थी। पूछताछ में अमित कुमार की भूमिका सामने आई, जिसने खुद को कानूनी सलाहकार बताकर धोखाधड़ी से दूरी बनाने की कोशिश की।पुलिस ने 8 सितंबर को अमित कुमार को आगरा से गिरफ्तार कर लिया। यह गिरोह एक साल से सक्रिय था और विशेष रूप से दुल्हन ढूंढने वाले युवकों को निशाना बनाता था।
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शादी के इच्छुक लोगों के संपर्क नंबर लेता था गिरोह
गिरोह अपनी वेबसाइट और सोशल मीडिया से शादी के इच्छुक लोगों के संपर्क नंबर लेता था। महिला टेली-कॉलर पुरुषों से संपर्क कर उन्हें इंटरनेट से मिली महिलाओं की तस्वीरें दुल्हन के तौर पर भेजती थीं। रुचि दिखाने पर पंजीकरण, फाइल सक्रियण, सुरक्षा जमा और सदस्यता पैकेज के नाम पर 2,500 रुपये से 15,000 रुपये तक मांगे जाते थे। वास्तविक दिखाने के लिए वेबसाइट पर डमी प्रोफाइल बनाई जाती थीं। दूसरी महिला कर्मचारी कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान दुल्हन बन जाती थी। महिलाएं बाद में मांगलिक दोष या परिवार की नामंजूरी जैसे बहाने बनाकर बात खत्म करती थीं।
कर्मचारियों को प्रोत्साहन और शिकायत रोकने के प्रयास
कर्मचारियों को 6,000-7,000 रुपये का मूल वेतन और वसूली गई रकम पर 10 फीसदी प्रोत्साहन मिलता था। हर कॉलर को हर महीने कम से कम 15,000 रुपये की धोखाधड़ी से वसूली का लक्ष्य दिया जाता था। खराब प्रदर्शन पर वेतन कटौती या नौकरी से निकालने की धमकी मिलती थी। गिरोह उन पीड़ितों को पैसे वापस करके शिकायत दर्ज कराने से रोकता था।