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Cyber Crime: अंतरराज्यीय म्यूल खाता गिरोह का खुलासा, पुलिस ने चार को हाड़गंज के होटल से दबोचा
Mon, 22 Jun 2026 10:05 PM IST
Vijay Singh Pundir
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Vijay Singh Pundir
Updated Mon, 22 Jun 2026 10:05 PM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : amar ujala
मध्य जिले की साइबर थाना पुलिस ने साइबर ठगों को म्यूल बैंक खाते (कमीशन पर मिलने वाले), शेल अकाउंट, बैंकिंग किट और पीओएस टर्मिनल सप्लाई करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। पुलिस ने पहाड़गंज के एक होटल से चार आरोपियों को दबोचा है। इनके नाम संजय (30), कुलदीप गोले (32), निर्दोष बिड़लान (24) और दीपक बिश्नोई (20) है।
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मध्य दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) रोहित राजबीर सिंह ने बताया कि इस गिरोह ने म्यूल खातों का इंतजाम करने के लिए बैंक खाते फर्जी कंपनियों या भर्ती के नाम पर लोगों के नाम से खोले गए थे। अपराधियों ने साइबर ठगी से आई रकम इन खातों में ट्रांसफर की और बाद में यह रकम अलग-अलग खातों के जरिये निकाल ली गई। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि पुलिस ने बीएनएस की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर ली है।
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संजय और कुलदीप दिल्ली के रहने वाले हैं जबकि निर्दोष हरियाणा के सोनीपत और दीपक राजस्थान निवासी है पूछताछ में पता चला कि गिरोह व्यवस्थित तरीके से चलाया जा रहा था, जिसमें बाहरी संचालक, स्थानीय समन्वयक और अंतिम उपयोगकर्ताओं का नेटवर्क शामिल है। बाहरी संचालकों ने जाली समझौतों के जरिये फर्जी साझेदारी में कंपनियां बनाईं और उनके नाम पर करंट अकाउंट खोले। चेकबुक, पासबुक और डेबिट कार्ड सहित ये बैंकिंग किट दिल्ली भेजी जाती थीं, जहां स्थानीय संचालक उनकी व्यवस्था संभालते थे तथा पॉइंट-ऑफ-सेल (पीओएस) मशीनों और मर्चेंट यूपीआई क्यूआर कोड का इस्तेमाल करके अवैध रूप से प्राप्त धन को वैध व्यावसायिक लेन-देन के रूप में दिखाते थे।
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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि खाता धारक को लगभग आठ प्रतिशत कमीशन के रूप से दिया गया जबकि बिचौलियों ने अतिरिक्त दो से चार प्रतिशत का कमीशन लिया। पुलिस ने मौके से एक बैंक पीओएस मशीन, मर्चेंट यूपीआई क्यूआर कोड स्कैनर, व्यावसायिक चालू खाते से जुड़ी पांच चेक बुक और पासबुक, छह डेबिट कार्ड, तीन मूल साझेदार समझौते, कॉर्पोरेट स्टैम्प, पैन कार्ड, संपत्ति को किराए पर देने से जुड़े व्यावसायिक किराए समझौते और चार मोबाइल फोन बरामद किए जिनमें बैंकिंग से जुड़े रिकॉर्ड मिले हैं। पुलिस उपायुक्त ने बताया कि तकनीकी विश्लेषण से पता चला कि जब्त किए गए बैंक खाते राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज साइबर धोखाधड़ी की कई शिकायतों से जुड़े हैं। इनमें कर्नाटक और महाराष्ट्र से रिपोर्ट किए गए मामले भी शामिल हैं।
गिरोह नेटवर्क के जरिये करता था काम
संजय लोकल कोऑर्डिनेटर और नोडल व्यक्ति जो बाहर के सप्लायर्स के साथ संपर्क बनाए रखता था। कुलदीप गोले स्थानीय मॉड्यूल का सदस्य था। निर्दोष बिडलान अंतर-राज्यीय सप्लायर था, जो शेल फर्म बनाने और बैंकिंग किट हासिल करने में शामिल था। दीपक अंतर-राज्यीय सप्लायर था, जिसने एक्टिव म्यूल-अकाउंट किट हासिल किए। पता चला कि यह सिंडिकेट एक व्यवस्थित नेटवर्क के जरिये काम करता था, जिसमें बाहरी सप्लायर, स्थानीय कोऑर्डिनेटर और एंड-यूजर शामिल थे।