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दिल्ली : सीजन में सबसे ज्यादा जली पराली, फिर भी सुधरी हवा की गुणवता
Tue, 27 Oct 2020 08:44 PM IST
Mohit Mudgal
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: Mohit Mudgal
Updated Tue, 27 Oct 2020 08:44 PM IST
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दिल्ली में प्रदूषण
- फोटो : एएनआई
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इस सीजन में पहली बार पराली के धुएं का हिस्सा बीस फीसदी से ऊपर जाने के बावजूद दिल्ली की हवा की गुणवता में मंगलवार को मामूली सुधार दिखा है। सतह पर चलने वाली हवाओं की चाल तेज होने से 24 घंटों में 41 अंकों की कमी के साथ हवा की गुणवता 312 पर पहुंच गई है। हालांकि, अभी भी यह बेहद खराब स्तर पर बनी हुई है। सफर का पूर्वानुमान है कि बुधवार को हवा की गुणवता कमोवेश स्थिर रहेगी। गुरुवार को एक बार फिर इसमें खराबी आने का अंदेशा है।
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सफर के मुताबिक, सोमवार को पंजाब, हरियाणा व पड़ोसी इलाकों में पराली जलाने के 1943 मामले दर्ज किए गए। पराली जलाने का आंकड़ा इस सीजन का सबसे ज्यादा है। वहीं, ऊपरी सतह पर चलने वाली हवाओं की दिशा दिल्ली की तरफ होने और उसकी चाल तेज होने से पराली जलने से पैदा होने वाले प्रदूषक भी यहां पहुंचे। इससे सीजन में पहली बार पराली के धुएं का हिस्सा 23 फीसदी पहुंच गया है।
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सफर का कहना है कि पराली के धुएं का हिस्सा तेजी से बढ़ने के बावजूद मंगलवार को दिल्ली के प्रदूषण में मामूली सुधार दर्ज किया। सोमवार के वायु गुणवता सूचकांक 353 की तुलना में मंगलवार को यह 312 पर पहुंच गया। इसकी बड़ी वजह सतह पर चलने वाली हवाओं की चाल का तेज होना है। इससे दिल्ली की हवा में फैले प्रदूषक दूर तक चले गए और दिल्ली की हवा तुलनात्मक रूप से साफ हो गई।
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सफर का पूर्वानुमान है कि बुधवार को हवा की गुणवता कमोवेश मंगलवार जैसी ही रहेगी। लेकिन गुरुवार को एक बार फिर सतह पर चलने वाली हवाओं के कमजोर होने से प्रदूषण का स्तर बढ़ेगा और यह बेहद खराब के उच्चतम स्तर में पहुंच जाएगा। इस महीने गुणवता के बेहतर होने की उम्मीद अभी नहीं दिख रही है।
दिल्ली के प्रदूषण में पराली के धुएं से नहीं दिख रहा सीधा संबंध
इस सीजन में अभी तक पराली के धुएं का सीधा संबंध दिल्ली के प्रदूषण में नहीं दिख रहा है। पराली के धुएं का हिस्सा बढ़ने के बावजूद मंगलवार को वायु गुणवता सूचकांक में सुधार दर्ज किया गया। इससे पहले भी यह प्रवृति देखी गई है। बीते शुक्रवार को धुएं का हिस्सा 15 फीसदी होने के बावजूद सूचकांक 366 पर पहुंच गया था। जबकि सोमवार को 16 फीसदी हिस्सा होने पर सूचकांक 353 दर्ज किया। विशेषज्ञों का कहना है कि पराली के धुएं की तुलना में स्थानीय मौसमी दशाएं ज्यादा प्रभावी रही हैं। इसमें सतह पर चलने वाली हवाओं की चाल, मिक्सिंग हाइट, वेंटिलेशन इडेक्स जैसे कारक प्रदूषण को घटाने या बढ़ाने में बड़ी भूमिका अदा करते हैं।