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Delhi: तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों का ही पंजीकरण होने से प्रदूषण में आएगी कमी, बनाई जाएगी पराली प्रोटेक्शन फोर्स

Sat, 16 May 2026 06:14 AM IST
दुष्यंत शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 16 May 2026 06:14 AM IST
सार

नए तिपहिया वाहनों की बिक्री पूरी तरह इलेक्ट्रिक हो जाती है, तो हर साल लगभग 5.5 टन पीएम 2.5 उत्सर्जन को रोका जा सकेगा। इससे वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।

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Delhi: Only three-wheeler electric vehicles will be registered to reduce pollution
सांकेतिक, फाइल - फोटो : AI

विस्तार

वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में सीएनजी तिपहिया वाहनों की बिक्री बंद होने से प्रदूषण पर लगाम लगाने में मदद मिलेगी। नए तिपहिया वाहनों की बिक्री पूरी तरह इलेक्ट्रिक हो जाती है, तो हर साल लगभग 5.5 टन पीएम 2.5 उत्सर्जन को रोका जा सकेगा। इससे वायु गुणवत्ता में सुधार होगा।

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रिपोर्ट के मुताबिक, तिपहिया वाहन, कुल वाहन बिक्री में सिर्फ 2.2 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं लेकिन पीएम उत्सर्जन में इनकी करीब 19 प्रतिशत तक हिस्सेदारी है। सीएक्यूएम के सदस्य सचिव तरुण कुमार पिथौड़े ने बताया कि इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों की ओर तेजी से बदलाव पहले ही शुरू हो चुका है।
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दिल्ली-एनसीआर में बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक ऑटो और मालवाहक वाहन पंजीकृत हो रहे हैं। चूंकि ये वाहन मुख्य रूप से शहरों के भीतर कम दूरी तय करते हैं और बैटरी स्वैपिंग सुविधाएं तेजी से बढ़ रही हैं, इसलिए इस क्षेत्र में इलेक्ट्रिफिकेशन के लिए ज्यादा बाधाएं नहीं हैं। मेडिकल इमरजेंसी, कानून-व्यवस्था और आपदा प्रबंधन से जुड़े वाहनों को ही नियम से छूट मिलेगी। 
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बनाई जाएगी पराली प्रोटेक्शन फोर्स
सीएक्यूएम ने पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश सरकारों को वर्ष 2026 के दौरान पराली जलाने की घटनाओं को पूरी तरह समाप्त करने के लिए युद्धस्तर पर अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। इसके तहत जिला और ब्लॉक स्तर पर 'पराली प्रोटेक्शन फोर्स' का गठन किया जाएगा, जिसमें पुलिस और कृषि विभाग के अधिकारी शामिल होंगे।

आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि किसान अक्सर उपग्रह निगरानी से बचने के लिए देर शाम पराली जलाते हैं, इसलिए शाम के समय विशेष गश्त बढ़ाई जाएगी। हर 100 किसानों पर एक नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा, जबकि हॉटस्पॉट गांवों में यह अनुपात 50 किसानों पर एक अधिकारी का होगा।

छोटे और सीमांत किसानों को कस्टम हायरिंग सेंटर (सीएचसी) के माध्यम से मुफ्त मशीनें उपलब्ध कराई जाएंगी। नई मशीनों की खरीद अगस्त 2026 तक पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। पराली जलाने वालों से पर्यावरण मुआवजा (ईसी) सख्ती से वसूला जाएगा।  


सीएनजी वाहन भी छोड़ते हैं खतरनाक गैसें
सीएक्यूएम की ओर से शुक्रवार को यह निर्देश आयोग अधिनियम-2021 की धारा 12 के तहत जारी किए गए। अब शोध में सामने आया है कि सीएनजी ऑटो भी बड़ी मात्रा में नाइट्रोजन ऑक्साइड (नोक्स) उत्सर्जित करते हैं। एक अध्ययन के अनुसार, दिल्ली में सीएनजी ऑटो-रिक्शा वास्तविक परिस्थितियों में पेट्रोल वाहनों की तुलना में तीन से पांच गुना अधिक नोक्स उत्सर्जन करते हैं।

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