{"_id":"5d6e393d8ebc3e93d84469cf","slug":"delhi-no-entry-zones-where-heavy-and-commercial-vehicles-are-not-allowed-24-hours","type":"story","status":"publish","title_hn":"दिल्ली: जब भारी वाहनों की 24 घंटे नो एंट्री, तो कैसे डंपर ने पिता-पुत्री को कुचल डाला","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
दिल्ली: जब भारी वाहनों की 24 घंटे नो एंट्री, तो कैसे डंपर ने पिता-पुत्री को कुचल डाला
Tue, 03 Sep 2019 04:05 PM IST
पूजा त्रिपाठी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: पूजा त्रिपाठी
Updated Tue, 03 Sep 2019 04:05 PM IST
विज्ञापन
देर रात इंडिया के पास हुआ सड़क हादसा
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इंडिया गेट के पास मान सिंह रोड पर देर रात एक डंपर ने तीन ऑटो-रिक्शा और पैदल चल रहे लोगों को टक्कर मार दी। इस दर्दनाक हादसे में एक स्कूटी सवार पिता-पुत्री की मौत हो गई।
विज्ञापन
जानकारी के अनुसार यह हादसा दिल्ली के उस इलाके में हुआ जहां 24 घंटे नो एंट्री रहती है। मतलब ये कि कोई भी भारी वाहन या कमर्शियल वाहन नो एंट्री जोन में दाखिल नहीं हो सकता। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर सोमवार देर रात जिस डंपर ने एक पिता-पुत्री की जान लेने के साथ ही कई ऑटो को अपना शिकार बनाया वह नो एंट्री जोन में कैसे घुसा।
विज्ञापन
नई दिल्ली ट्रैफिक सर्कल में ऐसे कुल छह क्षेत्र आते हैं, जहां पर 24 घंटे कमर्शियल वाहन की एंट्री पर पाबंदी है। इनमें चाणक्यपुरी, पार्लियामेंट हाउस, पार्लियामेंट स्ट्रीट, तिलक मार्ग, बाराखंबा रोड और तुगलक रोड शामिल हैं।
विज्ञापन
घटना के बाद परिजनों का आरोप है कि नो एंट्री जोन में डंपर की एंट्री हुई जिसमें परिवार के दो सदस्यों की मौत हो गई। उनका आरोप है कि अब मामले में पुलिस कार्रवाई करने से बच रही है।
मृतक के साले ने बताया कि उनके जीजा की तो मौके पर ही मौत हो गई जबकि बच्ची की सांसें चल रही थीं लेकिन पुलिस ने उसे अस्पताल ले जाने के बजाय हमें फोन किया। फिर हम वहां पहुंचे और दोनों को अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया।
उनका आरोप है कि अगर पुलिस हमें कॉल न करके पहले उन दोनों को अस्पताल पहुंचाती तो शायद उनकी जान बच सकती थी।