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Delhi Earthquake: 1800 कॉलोनियों को भूकंप से अधिक खतरा, दिल्ली है संवेदनशील, इतनी तीव्रता होने पर होगा नुकसान!

Tue, 18 Feb 2025 12:40 PM IST
शाहरुख खान ललित कौशिक, अमर उजाला, नई दिल्ली
ललित कौशिक, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 18 Feb 2025 12:40 PM IST
सार

भू वैज्ञानिकों कहना है अमूमन भूकंप के बाद हल्के झटके आते हैं, लेकिन इस भूकंप के बाद अब तक एक भी झटके का न लगना इशारा कर रहा है कि संभव है समस्त संचित ऊर्जा निकल गई हो। लेकिन इसके बाद भी 24 घंटे इंतजार करना होगा। उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

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Delhi NCR Earthquake 1,800 Colonies at Higher Risk  Magnitude 5-6 Quakes Could Cause Severe Damage
Delhi NCR Earthquake - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बेहद घनी और अनियोजित बसावट वाली दिल्ली भूकंप के लिहाज बेहद संवेदनशील है। करीब 1800 से कॉलोनियों में रहने वाली 40 लाख की आबादी पर संकट ज्यादा है। यहां की ज्यादातर इमारतें भूकंपरोधी नहीं हैं। 
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विशेषज्ञ बताते हैं कि सोमवार को भूकंप की तीव्रता अगर तीन अंक ज्यादा होती तो जान-मान का भारी नुकसान हो सकता था। दरअसल, भूकंप के लिहाज से दिल्ली बेहद संवेदनशील है। इसका बड़ा इलाका सिस्मिक जोन-4 के अंतर्गत आता है। 
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इस जोन के इलाकों में भूकंप का खतरा ज्यादा रहता है। दिल्ली आपदा प्रबंधन अधिकरण के अनुसार, इस जोन में तेज भूकंप आने का खतरा रहता है और तीव्रता 5-6 तक हो सकती है। 
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इससे खतरे की आशंका बढ़ सकती है। वहीं, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के एक विश्लेषण में पाया गया है कि राष्ट्रीय राजधानी में भूकंपरोधी इमारतों की संख्या बेहद कम हैं। जनसंख्या घनत्व भी काफी ज्यादा है। दिल्ली में अगर तेज तीव्रता का भूकंप आता है तो भारी तबाही मचा सकता है।
 

योजना तथा वास्तुकला विद्यालय (एसपीए), दिल्ली के डीन प्रोफेसर पीएसएन राव बताते हैं कि दिल्ली में करीब 1800 ऐसी कॉलोनियां हैं, जहां कि इमारतों को भूकंप का सबसे अधिक खतरा है। 

 

ये कॉलोनी यमुनापार के इलाकों से लेकर द्वारका, नजफगढ़, दक्षिण दिल्ली सहित कई दूसरे इलाकों में आती हैं। यहां के ज्यादातर मकान भूकंपरोधी नहीं हैं।
 

पुरानी इमारतों की संरचना को मजबूत करने की जरूरत
2016 में नगर निगम की ओर से भूकंप को लेकर इमारत के निर्माण के लिए उपनियम तैयार किए गए थे। इसमें भूकंपरोधी इमारतें बनाने का प्रावधान है। विशेषज्ञों का कहना है कि संभव है कि नई इमारतें भूकंपरोधी हो, लेकिन उससे पहले की निर्मित ज्यादातर इमारतों में इस तरह को कोई इंतजाम नहीं हैं।

ऐसे में अगर इमारत बहुमंजिला है तो नुकसान ज्यादा होगा। एक-डेढ़ मंजिल के लिए खतरा कम है। भूकंप को लेकर पूरी दिल्ली के सर्वेक्षण की जरूरत है। पुरानी इमारतों की संरचना को मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

सिस्मिक जोन-4 में दिल्ली
दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीम राव अंबेडकर कॉलेज के भूगोल विभाग सहायक प्रोफेसर डॉ. विपिन चंद्र लाल ने बताया कि दिल्ली भूकंपीय क्षेत्र सिस्मिक जोन-4 में है। जो इसे भूकंप के प्रति संवेदनशील बनाता है। दिल्ली के आसपास कई सक्रिय फॉल्ट लाइन है। इसमें महेंद्रगढ़-देहरादून फॉल्ट, दिल्ली-हरिद्वार रिज और हिमालयन सिस्मिक बेल्ट जो भूकंप की संभावना को बढ़ाते हैं।

उन्होंने बताया कि हिमालयी प्रभाव के कारण भारतीय प्लेट लगातार यूरेशियन प्लेट से टकरा रही हैं। इससे जमीन के अंदर तनाव जमा होता रहता है। यह तनाव समय-समय पर भूकंप के रूप में निकलता है, जिससे दिल्ली भी प्रभावित होती है।

दिल्ली में 1720 में आया था सात तीव्रता का भूकंप
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के पूर्व सहायक महानिदेशक डॉ. प्रभास पांडेय ने देश भर के भूकंपों पर एक अध्ययन किया है। अध्ययन के मुताबिक, 1720 वाले भूकंप की तीव्रता का अंदाजा 1883 में प्रकाशित हुए ‘’द ओल्डहैम्स कैटालॉग ऑफ इंडियन अर्थक्वेक्स’’ से मिलता है और रिक्टर पैमाने पर इसकी तीव्रता 6.5-7.0 के बीच रही थी। इसने पुरानी दिल्ली और अब नई दिल्ली इलाके में भारी तबाही मचाई थी और भूकंप के पांच महीनों बाद तक हल्के झटके महसूस किए गए थे।

कुछ घंटे भूकंप के डर के साए में बीते
दोबारा से भूकंप आने की आशंका के डर से लोग घरों के अंदर नहीं घुसे। सोसाइटी के पार्कों और कॉलोनियों में लोगों का जमावड़ा देखने को मिला। बच्चों को लेकर लोग सर्द सुबह में अपने घरों के बाहर खड़े दिखाई दिए। हर किसी के जुबां पर सिर्फ भूकंप को लेकर चर्चा थी।

सभी एक-दूसरे से भूकंप आने के अनुभवों को बयां कर रहे थे। पलभर के लिए लोगों को ऐसा लगा कि आज कुछ बड़ा नुकसान हो गया। लोगों की माने तो उन्होंने पहली बार इतनी तेज तीव्रता के भूकंप के आने पर गड़गड़ाहट की आवाज महसूस की। ऐसा लगा कि किसी ने पलंग को तेजी से खींच दिया और कोई बेड को ऊपर-नीचे करके हिला रहा हो।

विभिन्न इलाकों में कंपन रही होगी अलग
दिल्ली विश्वविद्यालय के भूविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नरेश मीणा ने बताया कि दिल्ली में भूकंप की तीव्रता को विभिन्न इलाकों में अलग स्तर पर महसूस किया होगा। रिज क्षेत्र में कंपन का स्तर कम रहा होगा जबकि समतल इलाकों में कंपन तेज महसूस हुई होगी। इसकी वजह जहां मिट्टी की परत की गहराई अधिक होगी वहां तीव्रता ज्यादा महूसस हुई होगी।

समझ नहीं आया क्या हुआ
सुबह करीब साढ़े पांच बजे मेरी नींद खुल गई थी। अचानक हमारी अलमारी हिलने लगी।पहली बार भूकंप के इतनी जोर के झटके महसूस किए।-पूरन देवतल्ला, पूर्वी दिल्ली
 

मैं घर की तीसरी मंजिल पर रहता हूं। सोमवार सुबह लगा कि अचानक किसी ने पलंग को जोर-जोर से हिलाया हो। भूकंप के झटकों से नींद खुल गई।-सुनील कुमार, रोहिणी सेक्टर-9
 

कुछ सेकेंड तो समझ नहीं आया कि  हुआ क्या। टीवी देखा तो पता चला। एक घंटे तक बैठी रही और फिर पौने सात बजे के सो गई।-सुनीता शर्मा, न्यू सरस्वती सोसाइटी

मैंने जीवन में दूसरी बार भूकंप के तेज झटके महसूस किए। नींद खुली तो मैं डर गई थी। मुझे ऐसा लगा कि आज तो कुछ बड़ा नुकसान होने वाला है।-सोनिया गोयल, बवाना

उथली गहराई, अतीत की नदी से जुड़ा है भूकंप का कारण  
राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान केंद्र के मुताबिक उथली गहराई, स्रोत क्षेत्र यानी दिल्ली के धौला कुआं के झील पार्क क्षेत्र के नीचे अतीत की नदी और झील संरचनाओं से तरल पदार्थ और पानी के साथ स्रोत रॉक सामग्री का जुड़ाव भूकंप का कारण है।
 

वैज्ञानिकों ने कहा, इस क्षेत्र में गिली मिट्टी और गिट्टी लगातार जमीन को संवेदनशील बना रही है। जिसके सामान्य दोष के कारण सोमवार को झील पार्क-धौला कुआं में 4.0 तीव्रता वाला भूकंप आया।

भूकंपीय आंकड़ों के विश्लेषण से संकेत मिलता है कि घटनाओं का क्रम उत्तर पश्चिम और दक्षिण पूर्व की ट्रेंडिंग लिनियामेंट (भूकंप के लिहाज से कमजोर रेखांश) के साथ हुआ। इसके अलावा मथुरा फाल्ट और सोहना फाल्ट के नजदीक होना भी इसका एक मुख्य कारण हो सकता है। इसका सबसे अधिक असर लोधी गार्डन इलाके में पड़ा है। 

24 घंटे करना होगा इंतजार
भू वैज्ञानिकों कहना है अमूमन भूकंप के बाद हल्के झटके आते हैं, लेकिन इस भूकंप के बाद अब तक एक भी झटके का न लगना इशारा कर रहा है कि संभव है समस्त संचित ऊर्जा निकल गई हो। लेकिन इसके बाद भी 24 घंटे इंतजार करना होगा। उसके बाद ही कुछ कहा जा सकता है।

पार्क में उखड़ा 25 साल पुराना पेड़
दिल्ली में भूकंप का केंद्र रहे धौला कुआं स्थित झील पार्क में एक पुराना पेड़ कंपन से गिर गया। पार्क का रखरखाव करने वाले कर्मी महावीर ने बताया कि जब वह सुबह नौ बजे ड्यूटी के लिए पहुंचे थे तो उन्हें पेड़ जड़ से उखड़ा हुआ मिला। यह करीब 20-25 साल पुराना था।
 

उनका कहना है कि यह जरूर भूकंप की वजह से गिरा होगा, क्योंकि कोई तेज हवा तो चल नहीं रही थी।  पार्क की देखरेख करने वाली एक ओर कर्मी जानकी देवी ने बताया कि एक पेड़ को छोड़कर कोई दूसरा नुकसान पार्क में देखने को नहीं मिला। सुबह साढ़े पांच बजे के करीब भूकंप के तेज झटके महसूस किए थे।

भूकंप के कारण ही यह पुराना पेड़ गिरा होगा। बता दें कि इस संबंध में सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल है। हालांकि राहत भरी बात यह है कि दिल्ली के किसी ओर कोने में ऐसी घटना देखने को नहीं मिली।


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