Delhi: पांच साल में विश्वस्तरीय होंगे दिल्ली नगर निगम स्कूल, बुनियादी ढांचे में होगा सुधार
स्कूल में बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने के लिए बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शिक्षा मंत्री आतिशी, शहरी विकास मंत्री सौरभ भारद्वाज, एमसीडी मेयर डॉ. शैली ओबेरॉय, एमसीडी आयुक्त समेत सहित अन्य के साथ समीक्षा बैठक कर निर्देश दिए।
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दिल्ली नगर निगम के स्कूल आगामी पांच साल में विश्व स्तरीय बनेंगे। स्कूल में बुनियादी ढांचे को विश्वस्तरीय बनाने के लिए बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शिक्षा मंत्री आतिशी, शहरी विकास मंत्री सौरभ भारद्वाज, एमसीडी मेयर डॉ. शैली ओबेरॉय, एमसीडी आयुक्त समेत सहित अन्य के साथ समीक्षा बैठक कर निर्देश दिए।
बैठक में मुख्यमंत्री ने निगम के सभी स्कूलों की बिल्डिंग शानदार बनाने के साथ ही हर स्कूल में एक एस्टेट मैनेजर, आईटी सहायक और सुरक्षा गार्ड तैनात करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने निगम अधिकारियों से 15 दिन में लैंडफिल प्रबंधन पर कार्ययोजना देने को कहा। निगम सितंबर तक सभी छोटे पार्कों और मार्च-24 तक बड़े पार्कों का पुनर्विकास करेगी।
सीएम ने कहा कि हमारे बच्चों के अंदर प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। अगर एमसीडी से इन बच्चों को पर्याप्त सहयोग दें तो ये बच्चे अपनी प्रतिभा को साबित कर पूरे देश का नाम ऊंचा करेंगे। मुख्यमंत्री ने एमसीडी के शिक्षकों और प्रधानाध्यापकों को प्रेरित करने और उन्हें दिल्ली के सरकारी स्कूलों के शिक्षकों की तरह ही अच्छी ट्रेनिंग देने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने नए माध्यमिक विद्यालयों के निर्माण के लिए एमसीडी के स्कूलों में खाली जमीन की तलाश करने का भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि एमसीडी के अच्छे स्कूल भी दिल्ली सरकार के स्कूलों के स्तर से मेल नहीं खाते हैं। एमसीडी और दिल्ली सरकार के स्कूलों के प्रधानाचार्यों का एक संयुक्त प्रशिक्षण जल्द ही तय किया जाना चाहिए।
दिल्ली नगर निगम के स्कूलों में पढ़ते हैं आठ लाख बच्चे
अधिकारियों ने सीएम को बताया कि एमसीडी के 1185 साइटों पर 1,578 स्कूलों में करीब 8.76 लाख बच्चे पढ़ते हैं। इनमें 342 स्कूल दो शिफ्टों में चलते हैं। इनमें से 126 स्कूलों में पक्की इमारत नहीं है और करीब 200 स्कूलों की बिल्डिंग की मरम्मत की आवश्यकता है। बैठक में इन स्कूलों में सुरक्षा गार्डों की अनुपस्थिति, शौचालयों की खराब हालत, साफ-सफाई की कमी, शिक्षकों व प्रधानाचार्यों पर काम के बोझ और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की कमी पर भी चर्चा की गई।