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राजनीतिक 'स्टंटबाजी' का सच: दिल्ली के 40 गांवों का नाम बदलने का प्रस्ताव, कैसे पूरा होगा भाजपा का ये सपना?

Thu, 28 Apr 2022 06:46 PM IST
Harendra Chaudhary डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Thu, 28 Apr 2022 06:46 PM IST
सार

दिल्ली के एकीकृत नगर निगम के निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे जगदीश ममगाईं ने अमर उजाला को बताया कि नगर निगम केवल उन सड़कों, गलियों, भवनों के नाम रख या बदल सकते हैं, जो उसकी निजी संपत्ति हैं, या उनके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। लेकिन दिल्ली के ये गांव निगमों की संपत्ति नहीं हैं...

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Delhi Mohammadpur village to Madhavpuram: Municipal Corporation Of Delhi can change the name only those streets, streets, buildings which are its private property, or come under its jurisdiction
मोहम्मदपुर बना माधवपुरम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

भाजपा ने दिल्ली के मुहम्मदपुर गांव का नाम बदलकर माधवपुरम कर दिया है। इसके साथ ही दिल्ली के 39 अन्य गांवों के नाम बदलकर प्रतिष्ठित स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों, वैज्ञानिकों, खिलाड़ियों, धर्मगुरुओं या सामाजिक हस्तियों के नाम पर ऱखने का प्रस्ताव किया जा चुका है। गांवों के नाम बदलने की ये सियासत तब की जा रही है, जब दिल्ली के नगर निगमों के पास गांवों के नाम बदलने का कोई अधिकार नहीं है।

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दिल्ली सरकार यदि उपराज्यपाल के पास प्रस्ताव भेजें, तो उपराज्यपाल के जरिए नाम बदलने की एक कोशिश अवश्य की जा सकती है। दिल्ली सरकार में उपराज्यपाल के अधीन नामकरण समिति की एक इकाई होती है, जो नाम बदलने के प्रस्तावों का अध्ययन कर नाम बदलने पर अपनी सहमति देती है। लेकिन दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के रिश्ते देखते हुए फिलहाल इसकी कोई संभावना दिखाई नहीं देती।
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लिहाजा नाम बदलने का अभियान केवल तभी सिरे चढ़ सकता है, जब भाजपा उपराज्यपाल के जरिए नाम परिवर्तन कराने की कोशिश करे। हालांकि, इसमें भी आर्कियोलॉजिकल विभाग का अड़ंगा सामने आ सकता है। इस प्रकार नाम बदलने की इस पूरी कवायद को एक राजनीतिक स्टंट की तरह देखा जा रहा है।

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निगम को अधिकार नहीं

दिल्ली के एकीकृत नगर निगम के निर्माण समिति के अध्यक्ष रहे जगदीश ममगाईं ने अमर उजाला को बताया कि नगर निगम केवल उन सड़कों, गलियों, भवनों के नाम रख या बदल सकते हैं, जो उसकी निजी संपत्ति हैं, या उनके अधिकार क्षेत्र में आते हैं। लेकिन दिल्ली के ये गांव निगमों की संपत्ति नहीं हैं। वह केवल वहां सफाई जैसी मूलभूत सेवाएं देती है, लिहाजा उसके पास नाम बदलने का कोई अधिकार नहीं है। इस प्रकार नाम बदलने की ये कोशिश राजनीतिक लाभ पाने की कोशिश से ज्यादा कुछ नहीं है।


चूंकि, 28 अप्रैल से दिल्ली के तीनों नगर निगमों को एक करने का कानून अस्तित्व में आ चुका है, लिहाजा अब पूर्व के तीनों निगमों के पास इस तरह की कोई कार्रवाई करने का भी अधिकार नहीं है। नए प्रस्ताव में कहा गया है कि एक कमिश्नर की नियुक्ति की जाएगी जिसके पास कुछ समय के लिए सदन की शक्तियां रहेंगी। लेकिन चूंकि अभी तक कमिश्नर की नियुक्ति नहीं की गई है, लिहाजा इस तरह की कोई कार्रवाई किसी अन्य अधिकारी के द्वारा शुरू नहीं की जा सकती।

एतिहासिक महत्त्व के नाम बदलना आसान नहीं

दिल्ली के कई गांव/इलाके एतिहासिक महत्व के हैं। इनके नाम भी एतिहासिक महत्त्व के माने जाते हैं और विश्व इतिहास धरोहर के रूप में देखे जाते हैं। इनमें किसी तरह के परिवर्तन के लिए पुरातत्व विभाग की सहमति की आवश्यकता होती है। इसके लिए एक निर्धारित प्रक्रिया है जो आसान नहीं है। जिन गांवों का नाम बदलने की सियासत की जा रही है, उनमें से कई गांव एतिहासिक महत्त्व के हैं। ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा की यह राह आसान नहीं होगी।  

भाजपा की घटिया राजनीति

आम आदमी पार्टी के नेता दुर्गेश पाठक ने कहा कि भाजपा लोगों के हितों का काम करने की बजाय इसी तरह की सियासत करती है जिससे लोगों को बांटा जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह नाम बदलने की कोशिश कर भी केवल लोगों को बांटने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा रिश्वतखोरों की पार्टी है। वे दिल्ली की जनता से अपील करते हैं कि वे उन्हें पूर्ण बहुमत से नगर निगम में अवसर दें। वे दिल्ली की सभी समस्याओं का समाधान पेश करेंगे।

इन गांवों का नाम बदलने की हो रही बात

दिल्ली भाजपा ने जिन 40 गांवों का नाम बदलने की बात कही है, उनके नाम इस प्रकार हैं- मोहम्मदपुर, हुमायूंपुर गांव, यूसुफसराय गांव, मस्जिद मोठ, बेर सराय, मसूदपुर, जमरूदपुर, बेगमपुर, सदैला जॉब, फतेहपुर बेरी, हौज खास, शेख सराय, जिया सराय, नेब सराय, अधचिनी, जाफरपुर कला, काजीपुर, नसीरपुर, मिर्जापुर, हसनपुर, गालिब पुर, ताजपुर खुर्द, नजफगढ़, सुल्तानपुर, अलीपुर गांव, मुखमेलपुर, रमजानपुर, निजामपुर, मोहम्मदपुर (नरेला जोन में), हमीदपुर, खानपुर, सुलतानपुर डबास, इब्राहिमपुर, रसूलपुर, साहिबाबाद दौलतपुर, बेगमपुर नरेला जोन, कुतुबगढ़, मोहम्मदपुर मंजरी, लाडो सराय, कटवरिया सराय और मुबारकपुर।

ये नए नाम रखने की सिफारिश

इन गांवों का नाम बदलकर उन शहीदों या गणमान्य व्यक्तियों के नाम पर रखने का प्रस्ताव किया गया है, जो उस गांव से किसी प्रकार जुड़े रहे हैं, या उन्होंने देश सेवा या समाज सेवा में उल्लेखनीय कार्य किया हो। इसमें कैप्टन बत्रा गांव, लता मंगेशकर, मिल्खा सिंह, यशपाल शर्मा, रामनाथ गोयनका, लक्ष्मीबाई, सर छोटूराम, परशुराम, रविदास, मोहम्मद रफी, गुरू गोविंद सिंह और दिलवर नेगी प्रमुख हैं।

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