जानिए कैसे सुरक्षित होगी बिना ड्राइवर वाली मेट्रो, डीएमआरसी ने किया ये बड़ा ऐलान
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दिल्ली की लाइफ लाइन बन चुकी मेट्रो अपने तीसरे चरण में है। इस चरण में चालक रहित मेट्रो चलाई जाएगी। इसके लिए फेज- तीन में बन रही लाइन 7 और 8 के लिए 504 ड्राइवर रहित कोच का ऑर्डर देने के साथ नई मेट्रो लाइनों के कुछ सेक्शन पर ट्रायल भी शुरू हो चुका है। इसी बीच शुक्रवार को कालिंदी कुंज डिपो में दो ट्रेनों के बीच हुई टक्कर से इसकी सुरक्षा को लेकर सवाल हो रहे हैं। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन का कहना है कि हम लोगों की आशंकाओं से वाकिफ हैं, इसके लिए हमने पुख्ता इंतजाम किए हैं।
ट्रैक की सीसीटीवी से होगी निगरानी
चालक रहित मेट्रो ट्रेन चलाने से पहले डीएमआरसी सभी ट्रैक पर सीसीटीवी कैमरे लगाएगी। इससे ट्रैक की निगरानी करेगी, यानी अगर कहीं ट्रैक टूटा होगा या माइनर क्रैक भी होगा, तो पता चल जाएगा। वर्तमान में यह जिम्मेदारी चालक की होती है, मगर ड्राइवर रहित मेट्रो में यह काम कैमरा करेगा।
यात्री सीधे कंट्रोल रूम से जुड़ेंगे
अगर यात्री को लगता है कि कोई दिक्कत है तो वह सीधे मेट्रो ट्रेन ऑपरेशन कंट्रोल सेंटर से संपर्क कर सकेंगे। यह सिर्फ वॉयस मैसेज नहीं होगा, बल्कि ट्रेन में स्क्रीन भी होगी। यात्री वाई-फाई के जरिये सीधे वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये कंट्रोल रूम से जुड़ पाएगा। यात्री कंट्रोल रूम को देख पाएगा, तो कंट्रोलर यात्री को सीधे अपनी स्क्रीन पर देख पाएगा।
ट्रेन दूर से ही भांप लेगी खतरा
आग और ट्रैक पर किसी भी तरह की वस्तु होने के खतरे को ट्रेन दूर से भांप लेगी। इसके लिए इसमें डिटेक्टर डिवाइस लगाया गया है। इसकी सूचना ऑपरेशन कंट्रोल रूप में पहुंच जाएगी। ट्रेन को पहले ही रोक दिया जाएगा।
प्रत्येक ट्रेन में एक सहायक
डीएमआरसी के मुताबिक, चालक रहित मेट्रो को ऑपरेशनल लाइन पर लाने से पहले कम से कम एक साल तक चालक की मौजूदगी में चलाया जाएगा। चालकों को हटाए जाने के बाद भी प्रत्येक ट्रेन में एक सहायक तैनात होगा। वह इमरजेंसी या किसी भी यात्री को असुरक्षा की भावना में मदद करेगा।
वायरलेस होगी सिग्नलिंग
इस मेट्रो ट्रेन में नियंत्रण कम्युनिकेशन बेस्ड होगा। वायरलेस सिग्नलिंग होगी। मसलन सिग्नल नहीं होने जैसी दिक्कत नहीं होगी। वर्तमान में यह केबल बेस्ड है। कई बार दिक्कत होने पर मैनुअली चलाना पड़ता है, जिससे फ्रीक्वेंसी पर असर पड़ता है।
बगैर चालक के मेट्रो ट्रेन एक नई तकनीक है। इसे लेकर यात्रियों के मन में सवालों से हम वाकिफ हैं, इसलिए हम उन तमाम सवालों व सुरक्षा बिंदुओं को ध्यान में रखकर तैयारी की है। जब तक हम खुद श्योर नहीं हो जाते और यात्रियों को भरोसा नहीं दिला पाते कि यह ट्रेन बगैर चालक के सुरक्षित है, तो ट्रेन को एक चालक की मौजूदगी में चलाएंगे। चरणबद्ध तरीके से इसे लागू करेंगे। इसके लिए हमने तैयारी शुरू कर दी है। फिलहाल हम ट्रायल स्टेज पर हैं। -अनुज दयाल, प्रवक्ता, डीएमआरसी
मेक इन इंडिया कॉनसेप्ट पर काम
दिल्ली मेट्रो भारत सरकार के मेक इन इंडिया कॉनसेप्ट पर शुरू से काम कर रही है। यही असर है कि मेट्रो की जब दिल्ली में शुरुआत हुई थी, तो 70 फीसदी तकनीक व अन्य काम विदेशी एजेंसियों व कंपनियों के भरोसे था, महज 30 फीसदी काम ही हम भारत में करते थे। अब स्थितियां इसके उलट हैं। महज 30 फीसदी काम विदेशी कंपनियों के भरोसे है और 70 फीसदी काम भारत में ही किया जा रहा है। मेट्रो कोच तक भारत की कंपनियां सबसे ज्यादा बना रही हैं। भारत में अगर आज 100 मेट्रो कोच बन रहे हैं, तो उसमें 46 कोच भारत सरकार के उपक्रम भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (बीईएमएल) बना रही है। मेट्रो फेज-तीन के लिए जरूरी 504 कोच में से महज 120 बाहर की कंपनी, जबकि बाकी 384 बीईएमएल बना रही है। बीईएमएल के बंगलूरू प्लांट में यह कोच बन रहे हैं। यहां हर माह 18 कोच तैयार किए जा रहे हैं।