पहली बार मेट्रो हुआ फेल, डेडलाइन से चूक जाने की ये है वजहें
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अपनी गति, गुणवत्ता, टाइमिंग और समय से किसी भी प्रोजेक्ट को पूरा करने की खसियत के चलते दिल्ली मेट्रो देश ही नहीं दुनिया में अपनी अलग पहचान बना चुका है।
दिल्ली मेट्रो के 12 साल के इतिहास में ऐसा पहली बार होने जा रहा है कि डीएमआरसी अपने प्रोजक्ट को तय समय सीमा पर पूरा नहीं कर पाएगा। इस बारे में डीएमआरसी के प्रबंध निदेशक मंगू सिंह के अनुसार मेट्रो के फेज-3 प्रोजेक्ट में भूमि अधिग्रहण के मुद्दों के चलते मेट्रो लाइन के निर्माण में देरी हो रही है।
आगे वो ये भी कहते हैं कि साल के अंत तक हम नए लाइन पर परीक्षण शुरु कर देंगे लेकिन, 2016 में इस लाइन पर मेट्रो का संचालन संभव नहीं हो पाएगा।
भूमि अधिग्रहण बनी परेशानी का सबब
सिंह ने मजलिस पार्क से शिव विहार, जनकपुरी (पश्चिम) से कालिंदी कुंज तक की लाइनों पर मेट्रो के शुरु होने की संभावना 2017 के शुरूआती तीन महिनों में जताई है।
सिंह ने बताया कि कालिंदी कुंज से कालका जी तक की मेट्रो लाइन का परीक्षण अगस्त में किया जाएगा। फेज-3 की दूसरी लाइन जो कि केंद्रीय सचिवालय से कश्मीरी गेट तक है उसका परीक्षण भी अगस्त में ही किया जाएगा।
लाईन 7 और 8 पर काम शुरु न हो पाने की वजह भूमि अधिग्रहण है। सिंह ने बताया कि पंजाबी बाग और मायापुरी (लाइन 8) की जमीनों पर से अतिक्रमण पिछले सप्ताह ही हटाया गया है।
पहली बार मेट्रो में होगा नई तकनीकी का प्रयोग
जमीन के ऐसे बहुत से हिस्से हैं जो अभी भी डीएमआरसी के कब्जे में नहीं हैं जिसके परिणामस्वरुप फेज-3 पर लाइनों के बनने में देरी हो रही है। इसमें त्रिलोकपुरी की जमीन भी है जो कुछ महीनों तक कानूनी पचड़े में फंसी हुई थी।
मेट्रो के कार्य में हो रही देरी की दूसरी मुख्य वजह बताते हुए सिंह का कहना है कि इसमें सिग्नल की नई प्रणाली का इस्तेमाल किया जाना है। ये सीबीटीसी (कम्यूनिकेसन बेस्ड ट्रेन कंट्रोल ) एक ऐसा सिस्टम है जिसके जरिए एक ट्रेन दुसरे ट्रेन की लोकेशन रेडियो सिग्नल के द्वारा जान सकती है।
पहली बार इसे फेज-3 के मेट्रो में लागू किया जाएगा। यहां आपको बता दें कि इस नए सिस्टम में ट्रेन चलाने के लिए ड्राइवर की जरुरत नही पड़ेगी।