MCD Mayor Election: मेयर चुनाव अक्तूबर में संभव, पांच के बाद शुरू होगी प्रक्रिया; अप्रैल माह से लंबित है चुनाव
एमसीडी के अनुसार, वह पांच अक्तूबर के बाद मेयर चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगी। वह सदन की बैठक की कार्यसूची में मेयर चुनाव कराने का प्रस्ताव शामिल करने के लिए वर्तमान मेयर के पास भेजेगी और बैठक की तिथि निर्धारित करने का आग्रह भी किया जाएगा।
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मेयर का चुनाव एमसीडी सदन की अक्तूबर माह की नियमित बैठक में होगा। इस संबंध में एमसीडी की ओर से पांच अक्तूबर सितंबर माह की स्थगित बैठक होने के बाद पहल शुरू की जाएगी। मेयर चुनाव अप्रैल माह से लंबित है।
दरअसल तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के जेल में बंद होने के कारण मेयर चुनाव कराने के लिए पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने का मामला लटक गया था। मगर उनके त्यागपत्र के बाद आतिशी के मुख्यमंत्री बनने पर अब एक बार फिर एमसीडी ने मेयर चुनाव कराने का निर्णय लिया है।
एमसीडी के अनुसार, वह पांच अक्तूबर के बाद मेयर चुनाव की प्रक्रिया शुरू करेगी। वह सदन की बैठक की कार्यसूची में मेयर चुनाव कराने का प्रस्ताव शामिल करने के लिए वर्तमान मेयर के पास भेजेगी और बैठक की तिथि निर्धारित करने का आग्रह भी किया जाएगा। बताया जाता है कि मेयर की ओर इस दिशा में पहल न करने की स्थिति में एमसीडी उपराज्यपाल के पास दस्तक देगी। उम्मीद है कि वह वार्ड समितियों के चुनाव व सदन से स्थायी समिति के एक सदस्य के रिक्त पद चुनाव की तरह मेयर चुनाव में भी हस्तक्षेप कर सकते है।
अप्रैल में नामांकन पत्र दाखिल हो गए थे
इस वर्ष मेयर पद अनुसूचित जाति के पार्षद के लिए आरक्षित है। आम आदमी पार्टी और भाजपा के अनुसूचित जाति के पार्षदों ने अप्रैल माह में मेयर चुनाव की प्रक्रिया आरंभ होने के दौरान नामांकन पत्र दाखिल कर दिए थे। मगर मुख्यमंत्री कार्यालय के माध्यम से मेयर चुनाव कराने के लिए पीठासीन नियुक्त करने की फाइल उपराज्यपाल सचिवालय नहीं गई थी। इस कारण उपराज्यपाल ने पीठासीन अधिकारी नियुक्त करनेे सेे मना कर दिया था। उन्होंने तय प्रक्रिया के तहत फाइल भेजने और वर्तमान मेयर को चुनाव न होने के तक कामकाज देखने के निर्देश दिए थे।
आप व भाजपा के बीच मतों का कम अंतर
मेयर चुनाव में 249 चुने हुए पार्षद, दिल्ली के लोकसभा व राज्यसभा के 10 सांसद व विधानसभा अध्यक्ष की ओर से एमसीडी में मनोनीत 14 विधायक वोेट डालेंगे। एमसीडी का वार्ड रिक्त है। इन 273 वोटों में आप के पास 124 पार्षदों, राज्यसभा के तीन सांसदों और 13 विधायकों के वोेट है।
इसके अलावा उसे एक निर्दलीय पार्षद का भी समर्थन है। हालांकि आप से नाराज चल रही उसकी राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के वोट डालने के लिए आना मुश्किल है। इस तरह आप के पास 140 वोट है। जबकि भाजपा के पास 115 पार्षदों, लोकसभा के सात सांसदों व एक विधायक का वोट है। लिहाजा उसके पास 123 वोट है। उधर कांग्रेस के नौ पार्षदों के इस बार भी चुनाव का बहिष्कार करने की संभावना है। इस तरह भाजपा जीत के आंकड़े से नौ वोट पीछे है और वह जीत के मामले में आप पार्षदों के दल बदलने या फिर क्रॉस वोट करने पर निर्भर है।