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दिल्ली शराब घोटाले में नेताओं की रिहाई का मामला: केजरीवाल का 'पुनर्जन्म', विपक्ष की उम्मीदों को लगे पंख

Sat, 28 Feb 2026 06:39 AM IST
दुष्यंत शर्मा हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली
हिमांशु मिश्र, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 28 Feb 2026 06:39 AM IST
सार

दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से ही सियासी सुर्खियों से गायब हुए केजरीवाल के पास नई ऊर्जा और पुराने दमखम के पास वापसी का मौका होगा।
 

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Delhi liquor scam: Kejriwal's 'rebirth', gives wings to opposition's hopes
अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया को कोर्ट ने किया बरी - फोटो : PTI

विस्तार

बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल, तेलंगाना की पूर्व सीएम के चंद्रशेखर राव की पुत्री के कविता समेत 23 लोगों की रिहाई ने पांच राज्यों में होने जा रहे विधानसभा चुनाव से पूर्व विपक्ष को मोदी सरकार के खिलाफ बड़ा मुद्दा थमा दिया है। ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद एक ओर जहां चुनाव में केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा राजनीतिक कारणों से विपक्ष के नेताओं को प्रताडि़त करने के आरोपों को बल मिलेगा, वहीं दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद से ही सियासी सुर्खियों से गायब हुए केजरीवाल के पास नई ऊर्जा और पुराने दमखम के पास वापसी का मौका होगा।

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दरअसल केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा विभिन्न आरोपों में कई विपक्षी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई पर लगातार सियासी वार पलटवार हुए हैं। केजरीवाल और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन को जेल भेजने, गांधी परिवार के सदस्यों से पूछताछ जैसे मामलों में विपक्ष ने समय-समय पर मुखर विरोध जताते हुए एकजुटता भी जाहिर की। हालांकि तब अदालती कार्रवाई जारी रहने, आरोपियों को अदालत से राहत नहीं मिलने के कारण इस मुद्दे को सियासी धार नहीं मिल सकी। अब स्थिति दूसरी है। ट्रायल कोर्ट ने शराब घोटाले में ठोस सबूत के बिना मामला बनाने पर सीबीआई को कड़ी फटकार भी लगाई है। ऐसे में इस फैसले ने विपक्ष के आरोपों को पहली बार बड़ा और मजबूत आधार दिया है।
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नरम-गरम रुख पर उठेंगे सवालः शराब घोटाले के सियासी गुब्बारे के फूट जाने के बाद जांच एजेंसियों द्वारा व्यक्ति विशेष के लिए समय-समय पर अपनाए गए नरम-गरम रुख पर भी सवाल उठेंगे। मसलन पाला बदलने के बाद असम के सीएम हिमंता विस्वा सरमा, पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष शुभेंदू अधिकारी, दिवंगत पूर्व डिप्टी सीएम अजीत पवार, दिवंगत वरिष्ठ नेता रहे मुकुल रॉय से संबंधित जांच को ठंडे बस्ते में डालने के आरोपों को मजबूती मिलेगी। इन नेताओं से संबंधित मामलों में बरती गई नरमी का उदाहरण देते हुए विपक्ष ने भाजपा को वाशिंग मशीन की संज्ञा दी थी।
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दिल्ली विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद न सिर्फ केजरीवाल के सियासी भविष्य पर बल्कि आप के अस्तित्व पर सवाल उठ रहे थे। नतीजे के बाद से केजरीवाल की सक्रियता अचानक कम होने ने इन धारणाओं को बल मिला था। हालांकि इस फैसले ने बाजी पलट दी है। 


इसने न सिर्फ केजरीवाल को पुराने दमखम और नई ऊर्जा के साथ वापसी का अवसर दिया है, बल्कि गोवा-गुजरात में रुकी पड़ी विस्तार की संभावना को वापस लाने और दिल्ली में पुराना दमखम दिखाने का भी अवसर दिया है। वैसे केजरीवाल ने यह कह कर इसकी शुरुआत भी कर दी है कि भाजपा चुनाव कराए, अगर उसे 10 सीट भी मिलती है तो वह राजनीति छोड़ देंगे।

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