दिल्ली की जंग में कैसा रहा नजीब का एक साल?
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दिल्ली के 20वें उपराज्यपाल नजीब जंग को एक साल के कैरियर में तीन तरह के शासन का अनुभव मिला है।
कांग्रेस सरकार में शीला दीक्षित के साथ काम किया तो आम आदमी पार्टी की सरकार में अरविंदर केजरीवाल कैबिनेट का अभिभाषण भी पढ़ा। फिर 16 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लगा तो सीधे सड़क पर उतरकर अफसरों को फील्ड में भेजना शुरू किया।
महज एक साल में तिहरे शासन का अनुभव शायद ही किसी उपराज्यपाल को मिला हो। कांग्रेस ने 1973 बैच के आईएएस रहे नजीब जंग को जामिया मिलिया इस्लामिया के उप कुलपति से उपराज्यपाल बनाया था।
केजरीवाल के कामों को नजीब ने दी रफ्तार
अब केन्द्र में सरकार भाजपा की है, ऐसे में पहली बार उपराज्यपाल बनकर तीन शासन का अनुभव लेने वाले नजीब जंग पर तलवार लटकने की अटकलें भी तेजी से चल रही है।
नजीब जंग ने राजनिवास में 9 जुलाई, 2013 को पद एवं गोपनीयता की शपथ ली थी। फिर विधानसभा चुनाव हुए तो कांग्रेस बुरी तरह हारी और आम आदमी पार्टी ने सरकार बना ली।
अरविंद केजरीवाल ने 28 दिसंबर, 2013 को शपथ लेकर पहले ही दिन से फटाफट फैसले में जुटे तो नजीब जंग ने भी फाइलें तेजी से बढ़ाई। फिर अरविंद केजरीवाल ने अचानक 14 फरवरी को इस्तीफा दिया।
खुद लड़ी दिल्ली की जनता की जंग
केजरीवाल कैबिनेट ने विधानसभा भंग करने की सिफारिश की थी लेकिन नजीब जंग ने ऐसा नहीं किया। विधानसभा निलंबित करके दिल्ली में 16 फरवरी को राष्ट्रपति शासन लगा।
दिल्ली में राष्ट्रपति शासन लगते ही उपराज्यपाल नजीब जंग ने प्रशासनिक सुधारों और जनता से अफसरों की मुलाकात पर काम शुरू कर दिया। प्रधान सचिव समेत विभागों प्रमुखों को आदेश दिया गया कि जनता दरबार लगाएं, फील्ड में जाकर कमियां देखें।
इतना ही नहीं अस्पताल, आब्जर्वेशन होम का निरीक्षण करने खुद पहुंच गए। मानसून में जलभराव का डर सताने लगा तो नालों की साफ सफाई देखने भी नालों तक पहुंच गए। उपराज्यपाल नजीब जंग को इस बीच अफसरों की अनदेखी जरूर झेलनी पड़ रही है।