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Delhi : स्वदेशी होगी लेप्रोस्कोपी और एंडोस्कोपी मशीन, जापान बनेगा मददगार; एम्स का ओसाका विश्वविद्यालय से करार
Wed, 28 Aug 2024 02:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Wed, 28 Aug 2024 02:23 AM IST
सार
मेड इन इंडिया चिकित्सा उपकरण विकसित करने के लिए एम्स ने जापान के ओसाका विश्वविद्यालय के साथ करार किया है। समझौते के तहत एम्स के झज्जर स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनसीआई) में राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण विकास, सत्यापन और कौशल प्रशिक्षण केंद्र तैयार होगा।
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विस्तार
देश के अस्पतालों में जल्द ही स्वदेशी लेप्रोस्कोपी व एंडोस्कोपी मशीन से मरीजों का इलाज होगा। मेड इन इंडिया चिकित्सा उपकरण विकसित करने के लिए एम्स ने जापान के ओसाका विश्वविद्यालय के साथ करार किया है। समझौते के तहत एम्स के झज्जर स्थित राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (एनसीआई) में राष्ट्रीय चिकित्सा उपकरण विकास, सत्यापन और कौशल प्रशिक्षण केंद्र तैयार होगा। यहां सर्जरी सहित कई रोगों के इलाज में इस्तेमाल होने वाले चिकित्सा उपकरण विकसित होंगे।
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विशेषज्ञों का कहना है कि तो देश में अभी 70 फीसदी से अधिक चिकित्सा उपकरण (हाई ग्रेड) विदेश से आयात होते हैं। इसमें कमी लाने के लिए स्वदेशी उन्नत उपकरण विकसित किए जा रहें हैं। इन्हें बनाने के दौरान भारतीय मरीजों की जरूरत व अनुकूलता को ध्यान में रखा जाएगा।
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एम्स के सर्जिकल विषयों के प्रोफेसर डॉ. हेमंगा के. भट्टाचार्या ने बताया कि एनआईसी स्थित करीब पांच एकड़ जमीन पर इस केंद्र को विकसित किया जाएगा। इसमें जापान के विशेषज्ञों की मदद से एम्स के डॉक्टर व सर्जन आईआईटी के इंजीनियरों के साथ मिलकर स्वदेशी चिकित्सा उपकरण तैयार करेंगे। मौजूदा समय में लेप्रोस्कोपी, एंडोस्कोपी, प्लास्टिक व लंग्स सर्जरी के लिए उपकरण सहित अन्य विदेश से आते हैं। हमारी कोशिश है कि इन्हें भारत में ही तैयार किया जाए। इसके लिए जापान तकनीक देगा। जबकि आईआईटी के इंजीनियर इन्हें बनाने में मदद करेंगे। वहीं, एम्स के डॉक्टर व सर्जन अपनी जरूरत को बताएंगे। साथ ही इनका जानवरों व मनुष्य पर परीक्षण करेंगे।
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तीन लेयर में काम करेंगे केंद्र
डॉ. हेमंगा के अनुसार पांच एकड़ भूमि पर तैयार होने वाला यह केंद्र तीन लेयर पर काम करेगा। इस केंद्र में तीन सेंटर होंगे। पहले सेंटर में डॉक्टरों के दिशा-निर्देश पर भारतीय लोगों की अनुकूलता के आधार पर चिकित्सा उपकरण का डिजाइन तैयार होगा। दूसरे सेंटर में तैयार हुए डिजाइन की मैकेनिकल जांच होगी। इस दौरान इन उपकरणों का परीक्षण जानवरों के अलावा मनुष्य पर होगा। वहीं तीसरे सेंटर में उपकरण बनने के बाद इन्हें चलाने का परीक्षण दिया जाएगा। यहां मेडिकल के छात्रों को उपकरण इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी जाएगी।
सस्ते दाम में उपलब्ध होगा आधुनिक उपकरण
जापानी तकनीक की मदद से विकसित होने वाले इन स्वदेशी उपकरण के दाम में काफी गिरावट आएगी। ऐसी उम्मीद है कि यह आयात होने वाले उपकरण के मुकाबले 10 गुना तक सस्ते हो सकते हैं। इनकी गुणवत्ता और तकनीक भी आधुनिक होगी। इन किफायती शल्य चिकित्सा उपकरणों को भारतीय मरीजों के परिवेश के आधार पर विकसित किया जाएगा।
एम्स के डॉक्टरों ने किया दौरा
स्वदेशी आधुनिक उपकरणों को विकसित करने के लिए एम्स के डॉक्टरों ने फुकुशिमा मेडिकल डिवाइस डेवलपमेंट सपोर्ट सेंटर, कोबे में मेडिकल डिवाइस डेवलपमेंट सेंटर (एमईडीडीईसी) और हिरोशिमा में मेडिकल डिवाइस निर्माण कंपनी कास्टेम कंपनी लिमिटेड का दौरा किया। इसके अलावा कुछ अन्य बैठक भी हुई।
जापान करेगा प्रौद्योगिकी और ज्ञान हस्तांतरण
देश में चिकित्सा उपकरणों को विकसित करने के दौरान जापान विशेष रूप से प्रौद्योगिकी और ज्ञान हस्तांतरण करेगा। इसकी मदद से भारतीय आबादी के लिए उच्च गुणवत्ता वाले किफायती चिकित्सा उपकरणों को सुलभ बनाया जा सकेगा।