शीला दीक्षित के खिलाफ टैंकर घोटाले की जांच शुरू
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केजरीवाल सरकार ने दिल्ली जल बोर्ड(डीजेबी) में शीला सरकार के दौरान हुए टैंकर घोटाले की जांच शुरू कर दी है। इस घोटाले में शीला सरकार पर 400 करोड़ की गड़बड़ी करने का आरोप है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आने वाले 10 दिनों में आंतरिक रिपोर्ट आने के बाद घोटाले की जांच एसीबी को सौंपी जा सकती है।
गौरतलब है कि 2012-13 में जल बोर्ड ने तीन कंपनियों को 385 टैंकर का ठेका दिया था। इस मामले में दिल्ली सरकार का आरोप है कि जो काम 200 करोड़ में हो सकता था वो पूर्व सरकार ने 600 में किया था।
एसीबी को सौंपी जा सकती है जांच
जल बोर्ड के चेयरमैन व कानून मंत्री कपिल मिश्रा ने शीला सरकार के दौरान हुए टैंकरों के ठेके के विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। कहा जा रहा है कि इस टेंडर में लगभग 400 करोड़ की घपलेबाजी हुई है।
जल बोर्ड ने इस घोटाले की आंतरिक जांच के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित की है जिसे 10 दिनों में अपनी आंतरिक रिपोर्ट सौंपनी है। इस आंतरिक रिपोर्ट को बाद में एसीबी को सौंप देने की संभावना है।
जिस वक्त 2012-13 में ये घोटाला हुआ था उस वक्त बोर्ड की अध्यक्ष शीला दीक्षित और उपाध्यक्ष मतीन अहमद थे। जल बोर्ड ने यह जांच सिटिजन फ्रंट फॉर वॉटर डेमोक्रेसी नाम के एनजीओ की शिकायत पर बैठाई है।
पानी की तरह बहा पैसा
आरोपों के अनुसार मार्च 2010 से दिसंबर 2011 के दौरान जल बोर्ड ने किराए के टैंकर के लिए 5 बार टेंडर आमंत्रित किया। चार बार प्रक्रिया को अंतिम दौर में रद्द कर दिया गया। आखिर में दिसंबर 2011 में तीन कंपनियों को 385 टैंकर सप्लाई करने का ठेका दिया गया।
लेकिन इन पौने दो साल में ठेका तीन गुना बढ़ गया। 385 टैंकरों में तीन हजार लीटर क्षमता के 130 टैंकर और नौ हजार लीटर के 255 टैंकरों को सप्लाई करने का ठेका तीन कंपनियों को दस साल के लिए दे दिया गया।
कौन-कौन सी कंपनियां है शामिल?
सिटी लाइफ लाइन प्रायवेट लिमिटेड
रैमकी इनवाइरो इंजिनियर्स लिमिटेड
वी एस के टेक्नोलॉजीज प्रायवेट लिमिटेड
ये थी गड़बड़
जुलाई 2010 में एक महीने के लिए तीन हजार लीटर और नौ हजार लीटर के एक टैंकर के लिए जो डील क्रमशः 42, 000 और 50,000 रुपये में हो रही थी उसे दिसम्बर 2011 में 98,000 और 1,30,000 रूपये में किया गया। यहां साफ पता चलता है कि डेढ साल में डील की रकम दुगुनी-तिगुनी हो गई।