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जहांगीरपुरी बवाल: किशोर को मजिस्ट्रेट के समक्ष क्यों किया पेश, हाईकोर्ट की दिल्ली पुलिस को फटकार

Tue, 19 Apr 2022 11:10 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 19 Apr 2022 11:10 AM IST
सार

उच्च न्यायालय ने जहांगीरपुरी इलाके में हनुमान जयंती जुलूस के दौरान हुई झड़पों के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए 16 साल के किशोर होने का दावा करने वाले एक आरोपी को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है। किशोर आरोपी को कल रोहिणी अदालत के ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था। इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पुलिस को जब पता था कि आरोपी किशोर है तो उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष क्यों पेश किया गया

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Delhi Jahangirpuri Violence Why was the minor produced before the magistrate
Delhi Jahangirpuri Violence - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

उच्च न्यायालय ने जहांगीरपुरी हिंसा मामले में पकड़े गए एक किशोर को मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करने पर पुलिस को फटकार लगाई और उसे सोमवार को ही न्याय बोर्ड के समक्ष पेश करने का आदेश दिया। किशोर को रोहिणी अदालत के ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने रविवार को एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था। 
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उच्च न्यायालय ने जहांगीरपुरी इलाके में हनुमान जयंती जुलूस के दौरान हुई झड़पों के सिलसिले में गिरफ्तार किए गए 16 साल के किशोर होने का दावा करने वाले एक आरोपी को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश करने का आदेश दिया है। किशोर आरोपी को कल रोहिणी अदालत के ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने एक दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया था। 
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इस पर अदालत ने नाराजगी जताते हुए कहा कि पुलिस को जब पता था कि आरोपी किशोर है तो उसे मजिस्ट्रेट के समक्ष क्यों पेश किया गया। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल और न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर की पीठ ने एक महिला द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान यह आदेश दिया। पीड़िता ने याचिका में आरोप लगाया कि उसके नाबालिग बहनोई को उसकी उम्र का उचित खुलासा किए बिना केवल 16 साल की उम्र के बावजूद गैरकानूनी हिरासत में रखा गया है।
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सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता तारा नरूला ने तर्क दिया कि नाबालिग को पुलिस हिरासत में नहीं भेजा जा सकता और न ही पुलिस उसे हिरासत में ले सकती है। उन्होंने कहा कि किशोर न्याय अधिनियम में प्रावधान है कि जैसे ही किसी किशोर को  कानून का उल्लंघन करने पर पुलिस द्वारा पकड़ा जाता है उसे विशेष किशोर पुलिस इकाई या नामित पुलिस अधिकारी कके संरक्षण में रखा जाएगा व बिना किसी नुकसान के किशोर को बोर्ड के समक्ष पेश करेगा।


नरूला ने किशोर के दावे का समर्थन करने के लिए नाबालिग के नगरपालिका जन्म प्रमाण पत्र पेश किया। इस पर न्यायमूर्ति मृदुल ने मौखिक रूप से टिप्पणी की कि यह संबंधित किशोर न्याय बोर्ड के लिए उसकी उम्र निर्धारित करने के लिए है। सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली पुलिस से पूछा कि नाबालिग को जेजेबी के सामने क्यों नहीं पेश किया गया। 
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