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सीएम केजरीवाल ने चार महीने पहले किए थे ये वादे, अब तक अधूरे हैं ये 6 दावे

Sun, 17 Sep 2017 02:00 PM IST
परीक्षित निर्भय/अमर उजाला, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Sun, 17 Sep 2017 02:00 PM IST
सार

कई बदलाव के इंतजार में दिल्ली के अस्पताल
सीएम केजरीवाल ने चार महीने पहले दिए थे आदेश, लचर कार्यप्रणाली बनी हुई है बाधा


नई दिल्ली।

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delhi hospitals facing these six problem after kejriwal promise before four month ago

विस्तार

चार महीने पहले राजधानी दिल्ली की सेहत सुधारने के लिए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सरकार 5 बड़े फैसलों पर अमल करने वाली थी, लेकिन सरकारी सिस्टम की लचर कार्यप्रणाली इसके मार्ग में रोड़ा बनी हुई है।

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अस्पतालों में मरीजों को चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध कराने और दवाओं से लेकर स्टाफ की भर्ती तक इसमें शामिल है, बावजूद इसके अभी तक इन फैसलों पर अस्पतालों में बदलाव देखने को नहीं मिल रहा है। न ही इस बारे में कोई अधिकारी स्पष्ट जानकारी देने को तैयार है।
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स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, 13 मई को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रदेश के सभी चिकित्सा अधीक्षकों के साथ बैठक की थी। इसमें अस्पतालों में कम पड़ी दवाओं का ब्योरा तक मांगा गया था, लेकिन फिर भी हालात ऐसे हैं कि अस्पतालों में दवाओं का अभाव है।

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स्टाफ की भर्ती

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एक करोड़ की मंजूरी
दिल्ली सरकार ने घोषणा की थी कि सभी अस्पतालों के चिकित्सा अधीक्षक और डायरेक्टर अपने अस्पताल में एक करोड़ रुपये तक का काम करवा सकते हैं। इसमें जरूरी दवाओं से लेकर मशीनों की खरीद और मरम्मत शामिल है।

यह फैसला लागू भी किया जा चुका है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों की मानें तो अभी तक किसी भी अस्पताल में इस राशि का इस्तेमाल किए जाने का ब्योरा विभाग तक नहीं पहुंचा है, जबकि खामियां अभी भी अस्पतालों में बरकरार हैं।

स्टाफ की भर्ती
अस्पतालों में स्टाफ की कमी को दूर करने के लिए सरकार ने स्टाफ की भर्ती किए जाने की मंजूरी दी थी, लेकिन किसी भी अस्पताल में अब तक भर्तियां नहीं निकाली गई हैं। न ही अब तक सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अस्पतालों में तैनात किया गया है। कहा जा रहा है कि ये कर्मचारी सुरक्षा से लेकर प्रशासनिक कार्यों तक की निगरानी रखेंगे।

​पुरानी मशीनें

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rml hospital

नोडल ऑफिसर
मरीजों को पर्याप्त दवाएं उपलब्ध कराने के लिए दिल्ली सरकार हर अस्पताल में नोडल ऑफिसर तैनात करने वाली है। इसका आदेश जारी हो चुका है। इसके तहत अस्पताल में दवाएं नहीं मिलने पर मरीज वहां तैनात नोडल ऑफिसर को शिकायत दर्ज करवा सकता है।

इन ऑफिसर की जिम्मेदारी होगी कि ये मरीज को 100 फीसदी दवाएं सरकारी अस्पताल से मुहैया करवाएं। हालांकि इस प्रक्रिया में भी अभी कुछ इंतजार करना पड़ सकता है।

पुरानी मशीनें
अस्पतालों में लंबे समय से खराब पड़ी मशीनों को लेकर भी पिछले दिनों सरकार ने बड़ा फैसला लिया था। इसमें हर अस्पताल में कई साल से खराब पड़ी मशीनों को सुधरवाने या बेचकर नई मशीनें खरीदने का अधिकार चिकित्सा अधीक्षक को सौंपा जाना है।

सरकार की मंशा थी कि छोट-छोटी समस्याएं सरकारी सिस्टम की वजह से लंबित पड़ी रहती हैं, इसलिए हर अस्पताल का अधीक्षक स्वयं इन खामियों को दूर कर सकता है, लेकिन अब तक ऐसा कुछ हुआ नहीं है।

100 फीसदी दवाओं का लंबा इंतजार

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ई-मार्केटिंग
कोई भी अस्पताल का सामान सरकारी ई-मार्केटिंग की वजह से अधर में नहीं लटकेगा। अस्पताल प्रबंधन अपने स्तर पर भी टेंडर निकाल सकता है। इतनी छूट मिलने के बाद भी अब तक कोई बड़ा टेंडर किसी अस्पताल का सामने देखने को नहीं मिला है।

100 फीसदी दवाओं का लंबा इंतजार
स्वास्थ्य विभाग के एक सीनियर ऑफिसर ने कहा, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने सभी अस्पतालों को 100 फीसदी दवाओं का कोटा पूरा  करने के भले ही निर्देश दिए हों, लेकिन इस प्रक्रिया में अभी लंबा वक्त लगने वाला है।

विभाग की मानें तो 100 फीसदी दवाएं मिल पाना तो काफी मुश्किल भी लग रहा है। हालांकि सीपीए को भी दवाओं की लिस्ट तैयार करने की 31 अक्तूबर तक की डेडलाइन दी हुई है।

राहत की बात ये है कि एक नवंबर से दिल्ली के हर एक अस्पताल में मरीज को 100 फीसदी दवा उपलब्ध होगी। अगर ऐसा नहीं है, तो मरीज अस्पताल के खिलाफ शिकायत दे सकता है।  

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