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वैवाहिक रेप हमारी संस्कृति का हिस्सा बन गया है: दिल्ली हाईकोर्ट

Tue, 16 May 2017 02:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Tue, 16 May 2017 02:30 PM IST
सार

वैवाहिक रेप बन गया है संस्कृति का हिस्सा
- हाईकोर्ट ने कहा- यह एक गंभीर मुद्दा, पूछा- कितने देशों में वैवाहिक बलात्कार एक अपराध है
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली।

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Delhi high court said rape after marriage become part of our culture

विस्तार

दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा कि वैवाहिक बलात्कार एक गंभीर मुद्दा है, जो संस्कृति का हिस्सा बन गया है। खंडपीठ ने नाबालिग पत्नी से जबरन शारीरिक संबंध बनाने के मामले को रेप के रूप में मानने के संबंध में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की।

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कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश गीता मित्तल और न्यायमूर्ति सी हरि शंकर की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान पूछा कि कितने देशों में वैवाहिक बलात्कार एक अपराध है। यह एक बहुत गंभीर मुद्दा है। वैवाहिक रेप हमारी संस्कृति का हिस्सा बन गया है और महिलाओं के लिए रेप का मुकदमा दर्ज करवाना मुश्किल हो गया है।
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खंडपीठ भारतीय दंड संहिता की धारा 375 को चुनौती देने वाली एनजीओ आरआईटी फाउंडेशन द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया है कि इस धारा में प्रावधान किया गया है कि 15 वर्ष से अधिक आयु की पत्नी से शारीरिक संबंध बनाना अपराध नहीं है।

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18 वर्ष से कम आयु को नाबालिग माना

Delhi high court said rape after marriage become part of our culture

याची ने कहा कि 18 वर्ष से कम आयु को नाबालिग माना गया है, तो फिर इस प्रकार के शारीरिक संबंध रेप की श्रेणी में आने चाहिए। सरकार ने धारा 375 का बचाव करते हुए कहा है कि पति-पत्नी के निजी संबंध पारंपरिक सामाजिक संरचना पर आधारित हैं और यह असंवैधानिक नहीं है।

याची ने इस प्रावधान को असंवैधानिक घोषित करने की मांग की है, क्योंकि यह विवाहित महिलाओं के खिलाफ भेदभाव करती है। याची ने कहा कि यह महिलाओं का यौन उत्पीड़न है। धारा 375 महिलाओं के बीच मनमाने ढंग से भेदभाव करता है।

​क्योंकि यह 15 साल की आयु की लड़कियों को शादी की इजाजत देता है, जबकि किसी भी दूसरी महिला के मामले में उसकी सहमति 18 वर्ष की आयु पर मानी जाती है। अदालत ने मामले की सुनवाई 18 जुलाई तय की है।

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