Delhi High Court: सेंट्रल रिज पर नहीं होगा कोई निर्माण, नौ अक्टूबर को होगी मामले की अगली सुनवाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि सेंट्रल रिज पर कोई निर्माण नहीं होगा। कोर्ट ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि सेंट्रल रिज एक संरक्षित क्षेत्र है और यह ताजी हवा का प्राथमिक स्रोत है।
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दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को स्पष्ट किया कि राजधानी में सेंट्रल रिज पर कोई निर्माण नहीं होगा। इस दायरे में स्मारक मालचा महल में पर्यटकों के लिए 25 मीटर की सीमा दीवार, ग्रिल कार्य और शौचालय का निर्माण शामिल है। न्यायमूर्ति जसमीत सिंह ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि स्मारक का निर्माण महत्वपूर्ण है। हालांकि आज की स्थिति के अनुसार सेंट्रल रिज में चारदीवारी या शौचालय के निर्माण के माध्यम से ऐसा नहीं किया जाना है। अदालत ने मामले की सुनवाई नौ अक्टूबर तय करते हुए कहा कि फिलहाल सेंट्रल रिज पर कोई निर्माण नहीं होगा।
सेंट्रल रिज जो 864 हेक्टेयर से अधिक तक फैला हुआ है और दिल्ली में उत्तरी अरावली तेंदुआ वन्यजीव गलियारे में स्थित है। इसे वर्ष 1914 में एक आरक्षित वन में बनाया गया था और यह सदर बाजार के ठीक दक्षिण से धौला कुआं तक फैला हुआ है। मालचा महल एक तुगलक युग का शिकार लॉज है, जो सेंट्रल रिज के अंदर स्थित है।
अदालत एक अवमानना याचिका पर सुनवाई कर रही है। इसमें एमिकस क्यूरी, वकील गौतम नारायण और आदित्य एन प्रसाद ने उन मामलों से संबंधित कुछ मुद्दों को उठाते हुए एक संक्षिप्त याचिका दायर की थी, जहां पार्टियों को राष्ट्रीय राजधानी में पेड़ लगाने के निर्देश दिए गए थे।
एमिकस क्यूरी ने एक समाचार पत्र का हवाला देते हुए अदालत को बताया कि महल के नवीनीकरण और संरक्षण के तहत दिल्ली सरकार ने जल्द ही स्मारक पर दो फुट ऊंची चारदीवारी बनाने का फैसला किया है। अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए कहा कि सेंट्रल रिज एक संरक्षित क्षेत्र है और यह ताजी हवा का प्राथमिक स्रोत है और राजस्थान से राष्ट्रीय राजधानी तक बहने वाली शौचालय के लिए एक प्राकृतिक बाधा है। आज की तारीख में यहां कंक्रीटीकरण नहीं हो सकता।