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Delhi : दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा- अपनी मर्जी से किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकता ईडी, नियंत्रित हैं शक्तियां
Fri, 20 Oct 2023 06:47 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 20 Oct 2023 06:47 AM IST
सार
ईडी अपनी इच्छानुसार किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकता। न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले एजेंसी को तीन गुना आवश्यकताओं का पालन करना होगा।
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दिल्ली हाईकोर्ट
- फोटो : ANI
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विस्तार
दिल्ली हाईकोर्ट ने बृहस्पतिवार को कहा कि धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 19 के तहत किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने की प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की शक्ति अनियंत्रित नहीं है। ईडी अपनी इच्छानुसार किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकता।
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न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी ने कहा कि किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले एजेंसी को तीन गुना आवश्यकताओं का पालन करना होगा। सबसे पहले निदेशक को उचित विश्वास रखना चाहिए कि गिरफ्तार किया गया व्यक्ति पीएमएलए के तहत अपराध का दोषी है, न कि किसी अन्य अधिनियम के तहत। दूसरा, ऐसे विश्वास के कारणों को लिखित रूप में दर्ज किया जाना चाहिए। तीसरा, ऐसा विश्वास उस सामग्री पर आधारित होना चाहिए, जो निदेशक के पास है।
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प्रासंगिक रूप से कोर्ट ने यह भी कहा कि पीएमएलए की धारा 50 के तहत समन जारी करने की ईडी की शक्तियों में गिरफ्तारी की शक्तियां शामिल नहीं हैं। न्यायमूर्ति भंभानी ने कहा कि ईडी की गिरफ्तारी की आशंका वाला व्यक्ति अग्रिम जमानत के लिए आवेदन कर सकता है, भले ही उसे प्रवर्तन मामले की सूचना रिपोर्ट (ईसीआईआर) या अभियोजन शिकायत में आरोपी के रूप में नामित नहीं किया गया हो।
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यह है मामला
कोर्ट आशीष मित्तल नामक व्यक्ति की ओर से एडुकॉम्प मामले में ईसीआईआर को रद्द करने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। मित्तल ने यह निर्देश देने की मांग की थी कि ईडी को उनकी स्वतंत्रता को कम करने के लिए उनके खिलाफ कोई भी कठोर कदम उठाने से रोका जाए। उन्होंने कहा कि उन्हें इस बात की प्रबल आशंका है कि उन्हें ईडी की ओर से अवैध रूप से हिरासत में लिया जाएगा या गिरफ्तार किया जाएगा। साथ ही उन्हें कंपनी के मुख्य प्रवर्तकों-कथित मुख्य लाभार्थियों के हितों की रक्षा के लिए बलि का बकरा बनाया जाएगा।
- ईडी ने याचिका पर प्रारंभिक आपत्ति जताई और तर्क दिया कि वर्तमान याचिका दायर करने का कारण केवल पीएमएलए की धारा 50 के तहत जारी एक समन था और इससे अधिक कुछ नहीं। यह स्थापित कानून है कि समन पर रोक लगाने या रद्द करने की मांग करने वाली रिट याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
- मामले पर विचार करने के बाद, न्यायमूर्ति भंभानी ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि याचिका समयपूर्व है। याचिकाकर्ता अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर कर सकता है।