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'आखिर सर्विस टैक्स क्यों नहीं देता फेसबुक'

Sat, 27 Sep 2014 08:29 AM IST
Updated Sat, 27 Sep 2014 08:29 AM IST
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delhi high court questions about facebook tax.

सोशल साइट फेसबुक हमेशा ही चर्चा का विषय रही है। कभी अपनी खूबियों के चलते तो कभी आपत्तिजनक कंटेट और टिप्पणियों की वजह से। लेकिन इस बार मामला थोड़ा हट कर है।

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दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा है कि फेसबुक इंक से सर्विस टैक्स क्यों नहीं वसूला जाता। इसके साथ ही अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल के पेश न होने पर नाराजगी जताई है।
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न्यायमूर्ति बीडी अहमद और सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने पूर्व भाजपा नेता केएन गोविंदाचार्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि जब गूगल सर्विस टैक्स अदा करता है तो फिर फेसबुक को किस आधार पर छूट दी गई है। हमें इसे समझने में मुश्किल हो रही है।
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फेसबुक के बारे में आप ये क्यों नहीं जानते?

delhi high court questions about facebook tax.

अदालत ने इस मामले में सरकार से स्पष्ट हलफनामा पेश करने का निर्देश हुए सवाल भी किया कि क्या केन्द्र सरकार इन मुद्दों के प्रति संवेदनशील है कि सोशल मीडिया साइट से डेटा बेच रहे हैं और टार्गेटेड एड की सेवा प्रदान कर रहे हैं।?

पूर्व बीजेपी नेता के एन गोविंदाचार्य की ओर से पेश वकील ने हाईकोर्ट के सामने ये सभी मुद्दे एक-एक करके उठाए जिसके बाद अदालत ने सवाल किया, ‘आप ये सब क्यों नहीं जानते? क्या आप इन चीजों के प्रति संवेदनशील हैं या यह आपकी समझ से बाहर है।?’

इस मामले में केन्द्र सरकार के अधिवक्ता ने अपने जवाब में कहा कि भारत में फेसबुक इंक का कोई दफ्तर नहीं है जबकि फेसबुक इंडिया का विशेष आर्थिक क्षेत्र (सेज) में एक कार्यालय है जहां से वह सेवाएं निर्यात कर रही है और इसलिए उन्हें सर्विस टैक्स से मुक्त रखा गया है।

क्या है फेसबुक की आमदनी?

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हाईकोर्ट की पीठ ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है कि देश से फेसबुक की आमदनी क्या है? क्या वेबसाइट और विभिन्न भारतीय कंपनियों के बीच लेनदेन सेवाओं की कोई निर्धारित व्यवस्‍था है या नहीं?

पीठ ने कहा कि सरकार इस बात का पता लगाए कि फेसबुक और भारतीय कंपनियों के बीच कैसे लेनदेन हो रहे हैं। क्या उन सेवाओं पर टैक्स लगाया जा सकता है? अगर सेवाएं प्रदान की जा रही हैं तो वह भारतीय संस्‍थाओं की ओर से हैं या बाहर से?

मामले में अदालत ने यह भी कहा कि सरकार सर्विस टैक्स और सोशल मीडिया के दिशानिर्देशों पर एक बेहतर हलफनामा दाखिल करें। मामले की अगली सुनवाई एक अक्तूबर को होगी।

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