दिल्ली हाईकोर्ट : निचली अदालत को आजीवन कारावास की सजा देने का अधिकार नहीं, उम्रकैद 20 साल कैद में तब्दील
पीठ ने हाल ही में सभी दोषियों की अपील खारिज कर दी, लेकिन उनको दी गई मृत्युपर्यंत तक की आजीवन कारावास की सजा को 20-20 साल की कैद की सजा में बदल दिया।
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हाईकोर्ट ने कहा कि निचली अदालत को किसी हत्यारे को मृत्युपर्यंत तक आजीवन कारावास की सजा देने का अधिकार नहीं है। यह अधिकार केवल सुप्रीम कोर्ट एवं हाईकोर्ट को है। कोर्ट ने यह टिप्पणी करते हुए एक एएसआई जोगिंदर एवं एक महिला की हत्या के जुर्म में छह लोगों को दी गई आजीवन कारावास की सजा को 20 साल की सजा में बदल दिया। कहा कि उस दौरान उन्हें कैदियों को मिलने वाली कोई भी राहत नहीं दी जाएगी।
न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता एवं न्यायमूर्ति पूनम ए. बांबा की पीठ ने अन्य धाराओं के तहत अभियुक्तों को दी गई सजा एवं जुर्माने की राशि में कोई बदलाव नहीं किया और उसे बरकरार रखा है। इस मामले में निचली अदालत ने दोषी संदीप उर्फ सेंडी, विजय दहिया, जीत दहिया, किशन मलिक, आशीष जिंदल और संदीप उर्फ जय को अपने तीन फरवरी 2018 के फैसले में मृत्यु होने तक उम्र कैद की सजा सुनाई थी। अदालत ने अभियुक्त संदीप उर्फ जय, जीत, आशीष व संदीप उर्फ सेंडी पर 70-70 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया था। अन्य दो अभियुक्तों पर 50-50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया था। सभी अभियुक्तों ने अपनी सजा को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
पीठ ने हाल ही में सभी दोषियों की अपील खारिज कर दी, लेकिन उनको दी गई मृत्युपर्यंत तक की आजीवन कारावास की सजा को 20-20 साल की कैद की सजा में बदल दिया। यह मामला वर्ष 2016 का है। हत्या का कारण आपसी रंजिश बताया जा रहा है। इसके अनुसार, 10 और 11 दिसंबर, 2016 की रात को दिल्ली पुलिस में एएसआई जोगिंदर और एक महिला मुनेश की हत्या रोहिणी इलाके के दीप विहार के एक मकान में कर दी गई थी। पुलिस ने पास ही में लगे सीसीटीवी कैमरे से दोषियों की पहचान करते हुए दो लोग संदीप उर्फ जय और जीत दहिया को 11 दिसंबर, 2016 को ही गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने संदीप उर्फ सेंडी, विजय दहिया, किशन मलिक और आशीष जिंदल को बाद में गिरफ्तार किया था।